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Friday, August 01, 2008

कौन सही? कौन गलत?


लावारिस हवाओं की थपेड़े खाती गर्द में
लोटपोट होता
बेशर्म मौसम का सरकता पल्लु
अब विलुप्त हुआ लजाती दुल्हन का रूप
और लहलहाती फसल का समां
गया वो भीनी भीनी हवाओं का
संगीत - सुरमय ।

अब अंगूरी खेतों की रखवाली करते
लपलपाते कुत्तों की बेताब आत्मा
हड्डी से भूख बढ़ा कर
खेल रही
मांस नोचने का खेल
दातों से चबा कर
मासूमियत को
उदर के हवाले करती ।

इधर सूअर के बच्चों से सीखते
हलाहल में अमृत तलाशते जीव
बदबू के साथ साथ
बदबू फैलाने का इल्जाम भी
ढो रहे हैं
इधर देख लो
खुद ही गवाही देकर
अपना निर्णय सुनाने को
एकत्र हुये असंख्य गजराज
जिनकी पवित्र वाणी पर
कीचड़ उछालते
दलदल में से उभरते
कीड़ों का उफान !
जो कुलबुला कर
महज गन्दगी फैंकते हैं
साफ सुथरी नाक में एकत्र हुई
घ्राण शक्ति पर !

इसमें कौन सही? कौन गलत?
खुद देख लो
चांदी की डंडी वाले तराजू में
जहां मुर्दा लाश पड़ी
शब्दों की हर पंक्ति का पलड़ा
जीवन्त शिशु से भारी ।

-हरिहर झा

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10 कविताप्रेमियों का कहना है :

Smart Indian का कहना है कि -

हरिहर झा जी, आपकी रचना अच्छी लगी. बधाई स्वीकारें. आप भारत से इतनी दूर रहकर भी आप हिन्दी की इतनी सेवा कर रहे हैं जानकर बहुत अच्छा लगता है.

Shailesh Jamloki का कहना है कि -

सच कहूँ तो हरिहर जी..
मुझे भी ये सवाल बहुत बार परेशां करता है.. आपने उजागर किया.. मुझे बहुत अच्छा लगा पढ़ कर
"लावारिस हवाओं की थपेड़े खाती गर्द में
लोटपोट होता
बेशर्म मौसम का सरकता पल्लु
अब विलुप्त हुआ लजाती दुल्हन का रूप
और लहलहाती फसल का समां
गया वो भीनी भीनी हवाओं का
संगीत - सुरमय ।"

सुन्दर
शैलेश

BRAHMA NATH TRIPATHI का कहना है कि -

बहुत अच्छा हरिहर बिल्कुल नए तरीके आपने भ्रष्टाचार को उजागर किया है अपनी कविता में
एक सार्थक प्रयास के लिए बधाई

SURINDER RATTI का कहना है कि -

हरिहर जी नमस्ते,
सुंदर रचना है .. बधाई
इसमें कौन सही? कौन गलत?
खुद देख लो
चांदी की डंडी वाले तराजू में
जहां मुर्दा लाश पड़ी
शब्दों की हर पंक्ति का पलड़ा
जीवन्त शिशु से भारी ।
सुरिंदर रत्ती

Lovely kumari का कहना है कि -

yah widambana aapne sadhe sabdon me utari, aabhar.

शोभा का कहना है कि -

इसमें कौन सही? कौन गलत?
खुद देख लो
चांदी की डंडी वाले तराजू में
जहां मुर्दा लाश पड़ी
शब्दों की हर पंक्ति का पलड़ा
जीवन्त शिशु से भारी ।
हरिहर जी,
बहुत बढ़िया लिखा है।

सजीव सारथी का कहना है कि -

बहुत खूब.... सोचने लायक विषय पर गहरे शब्दों का आवरण

nisha का कहना है कि -

बहुत ही अच्छी कविता
पढ़कर अच्छा लगा

RAVI KANT का कहना है कि -

हरिहर जी,
मार्मिक एवं सोचने पर विवश करती रचना।

arvind का कहना है कि -

jha ji aap ki kavita ne ek garamid dil bade hi maramik tarike se chu liya hai aap ko bahut bahut thanks

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