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Thursday, July 17, 2008

शिकवा


जिंदगी भर जिंदगी से शिकवा न करना,
खुदा को सरेआम यूँ बेहया न करना ।

उसकी मेहर को मिल्कियत मानने वाले,
साँसों को सरजमीन से अलहदा न करना।

जोश-औ-जुनूं बटे हैं सबमें हीं एक से,
हिम्मत से बदसलूकी तो बेवज़ा न करना।

अब तक करे है तू तकदीर का रोना,
अंधी सरपरस्ती तू इस दफा न करना।

इम्तिहां और इत्मीनान सीखकर उससे,
रात को सुबह का तू रास्ता न करना।

बरबस हीं बेबसी बन जाए है तेरी,
रिंदों को घरौंदे का यूँ हमनवा न करना।

’तन्हा’ ,लिबास रेशमी मिल गया तुझे,
खुदा की नेमतों को बस वाक्या न करना।

-विश्व दीपक ’तन्हा’

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17 कविताप्रेमियों का कहना है :

devendra का कहना है कि -

जोश-औ-जुनूं बटे हैं सबमे एक से
हिम्मत से बदसलूकी तो बेवज़ा न करना।
---आप मुखातिब होते तो इस शेर पर कहता----
---इरशाद।
--देवेन्द्र पाण्डेय।

तपन शर्मा का कहना है कि -

जिंदगी भर जिंदगी से शिकवा न करना,
खुदा को सरेआम यूँ बेहया न करना ।..

गज़ल की शुरुआत ही जबर्दस्त है तन्हा जी..
बहुत खूब.. बहुत अच्छे...

विपुल का कहना है कि -

आज काफ़ी दिनों बाद युग्म खोला और मुलाकात हुई आपसे ! बहुत खूब तन्हा जी... हमेशा वाले तेवर बरकरार हैं.. लगे रहिए

Harihar का कहना है कि -

बहुत खूब तन्हा जी!
एक से एक शेर में क्या बात कही है!

उसकी मेहर को मिल्कियत मानने वाले,
साँसों को सरजमीन से अलहदा न करना।

BRAHMA NATH TRIPATHI का कहना है कि -

जोश-औ-जुनूं बटे हैं सबमें हीं एक से,
हिम्मत से बदसलूकी तो बेवज़ा न करना।

वाह वाह तन्हा जी बहुत अच्छा सुहान अल्लाह

राष्ट्रप्रेमी का कहना है कि -

अब तक करे है तू तकदीर का रोना,
अंधी सरपरस्ती तू इस दफा न करना।
वाह! तन्हाजी क्या बात कही है. अंधी सरपरस्ती ही तो हमें पीछे ढकेलती है.

sahil का कहना है कि -

भाई जी,मजा आ गया.एक लंबे अरसे बाद आपको पढ़कर मन को अत्यन्त संतोष मिला.
कृपया लगे रहिये.
आलोक सिंह "साहिल"

Shailesh Jamloki का कहना है कि -

विश्व दीपक ’तन्हा’ जी,
आपकी ग़ज़ल बहुत अच्छी बन पड़ी है बहुत सुन्दर शेरो के साथ..

बस मुझे कई उर्दू शब्दों के अर्थ समझ नहीं आये..

जैसे अलहदा,नेमतों.. ये शब्द सुने हुए से है.. पर सही अर्थ जानना चाहूँगा...

सादर
शैलेश

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

वाह तन्हा जी ..

इम्तिहां और इत्मीनान सीखकर उससे,
रात को सुबह का तू रास्ता न करना।

बरबस हीं बेबसी बन जाए है तेरी,
रिंदों को घरौंदे का यूँ हमनवा न करना।

’तन्हा’ ,लिबास रेशमी मिल गया तुझे,
खुदा की नेमतों को बस वाक्या न करना।

बहुत बढिया..

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

तन्हा जी,

आप लौटे हैं पूरे फॉर्म के साथ। मुझे ग़ज़ल का फ्लो बहुत पसंद आया।

RC का कहना है कि -

Good read.

Smart Indian का कहना है कि -

अच्छा है. कविता की सुन्दरता में व्याकरण का भी अपना महत्व है और उस पर पूरा ध्यान दिया जाना चाहिए. आम बोलचाल से बाहर के शब्दों का अनुवाद साथ में देने से रचना का आनंद कई गुना बढ़ सकता है.

सजीव सारथी का कहना है कि -

वाह सुंदर संतुलित.....तेवरों से भरी ग़ज़ल, बहुत दिनों बाद लौटे हो, जनाब, मज़ा आया पढ़कर ...

Pramod का कहना है कि -

Bahut Achhe

देवेन्द्र कुमार मिश्रा का कहना है कि -

बहुत खूब तन्हा जी!
एक से एक शेर में क्या बात कही है!

Dheeraj Baid का कहना है कि -

bahut khoob tanha ji!!!

excellent composition!!!

करण समस्तीपुरी का कहना है कि -

उसकी मेहर को मिल्कियत मानने वाले,
साँसों को सरजमीन से अलहदा न करना।

काबिल-ए-तारीफ !! बहुत पसंद आया ! मानी भी मकसद भी और तरन्नुम भी ! शुक्रिया !!!

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