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Saturday, July 12, 2008

आज एक दर्द की गुमशुदी का इश्तेहार दिया है


आज चौथे स्थान की कविता की बारी है। यश की क्षणिकाओं का ज़ादू ने फिर से जजों का मन मोहा है। पिछली बार भी यश की क्षणिकाएँ शीर्ष १० में थीं।

पुरस्कृत कविता- क्षणिकाएँ

गुमशुदी
आज एक दर्द की गुमशुदी का
इश्तेहार दिया है,
जो कोई ढूँढ कर लाये,
उसे नया दर्द इनाम मिलेगा,
लिख दिया है .

हारा हुआ जुआरी
कल भी हारा था,
आज भी हारा हूँ,
कल भी हारूँगा,
खुलते हैं जिंदगी के पत्ते,
हारे हुए जुआरी से..

खामोशियाँ
खामोशियों को खर्च करना हो तो कर
पर पहले,
उसे कमाना तो सीख...

तूफ़ान
जो आसुंओं से न पता चले उम्र भर,
छुपे हुए कुछ तूफ़ान ऐसे,
मेरी भीगी आँखों में हैं...

जिन्दगी
जिन्दगी तेरा जुल्म,
रोज चेहरा बदल बदल कर मिलता है,
कल मुझे उसका पता मिला,
आज उसने घर बदल लिया...

दिल
दिल वालों का दर्द है -
जीना,
और जीने का दर्द है - दिल.

आंसू
आज दिन रोया है,
कल रात भी रोयी थी,
आज चाँद सिसकेगा,



प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ७॰९, ५
औसत अंक- ६॰४५
स्थान- तीसरा


द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- ५॰२, ६, ४, ८, ६॰४५(पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- ५॰९३
स्थान- चौथा


पुरस्कार- मसि-कागद की ओर से कुछ पुस्तकें। संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी अपना काव्य-संग्रह 'मौत से जिजीविषा तक' भेंट करेंगे।

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10 कविताप्रेमियों का कहना है :

तपन शर्मा Tapan Sharma का कहना है कि -

खामोशियाँ
खामोशियों को खर्च करना हो तो कर
पर पहले,
उसे कमाना तो सीख...

आज दिन रोया है,
कल रात भी रोयी थी,
आज चाँद सिसकेगा,


क्या बात है यश जी,
मजा आ गया... बहुत सही लिखा है..
बधाई स्वीकार करें...

Anonymous का कहना है कि -

छोटे कैनवास पर बड़ी बात कहने का दम-खूब हैं ये क्षणिकायें।श्यामसखा ‘श्याम’

Sajeev का कहना है कि -

एक बार फ़िर सुंदर क्षणिकाएं

pallavi trivedi का कहना है कि -

जिन्दगी तेरा जुल्म,
रोज चेहरा बदल बदल कर मिलता है,
कल मुझे उसका पता मिला,
आज उसने घर बदल लिया...

वाह...बहुत सुंदर क्षणिकाएं हैं....बधाई.

BRAHMA NATH TRIPATHI का कहना है कि -

आज एक दर्द की गुमशुदी का
इश्तेहार दिया है,
जो कोई ढूँढ कर लाये,
उसे नया दर्द इनाम मिलेगा,
लिख दिया है .

खामोशियों को खर्च करना हो तो कर
पर पहले,
उसे कमाना तो सीख...

बहुत अच्छी क्षणिकाएँ
बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति

Smart Indian का कहना है कि -

कृपया कविता के अंत से अर्ध विराम हटा लें वरना ऐसा लगता है जैसे पूरा कर पाने से पहले ही कागज़ कवि के हाथ से ले लिया गया हो परीक्षा की उत्तर पुस्तिका जैसे.

रेनू जैन का कहना है कि -

खामोशियाँ
खामोशियों को खर्च करना हो तो कर
पर पहले,
उसे कमाना तो सीख...

तूफ़ान
जो आसुंओं से न पता चले उम्र भर,
छुपे हुए कुछ तूफ़ान ऐसे,
मेरी भीगी आँखों में हैं...

यश जी, जबसे आपकी क्षणिकाएं पढ़ी हैं, हर बार प्रतीक्षा रहती है और पढने की... गागर में सागर की तरह काफ़ी कुछ कह देते हैं आप...........

Anonymous का कहना है कि -

मस्त कर देने वाली kshanikayein लिखी हैं सर जी.
आलोक सिंह "साहिल"

devendra kumar mishra का कहना है कि -

बहुत सही लिखा है..

करण समस्तीपुरी का कहना है कि -

यश जी !
बहुत खूब ! अब मैं क्या कहूँ, गागर में सागर या एक से बढ़ कर एक !!!!

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