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Wednesday, June 25, 2008

गज़ल -मिली मुझे दुनिया


मिली मुझे दुनिया सारी जब मिला मौला
भुला दूँ मै खुद को नाम की पिला मौला

गमों से टूट रहा शख्स हर यहां रोता,
भरा दुखों से जहां तुमसे है गिला मौला

चमन बना सहरा गुल यहां रहे मुर्झा,
बहार यूँ निखरे हर कली खिला मौला

दिखा चुका अपने खेल खूब वह शैतां,
सदा सदा के लिए अब उसे सुला मौला

बदी को भूल के इंसा करे मोहब्बत बस,
दिलों में प्रीत की ऐसी अलख जला मौला

करें सभी हर पल बंदगी खुदा तेरी,
तुझे पा जाने का मौका तो इक दिला मौला

कवि कुलवंत सिंह

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10 कविताप्रेमियों का कहना है :

Seema Sachdev का कहना है कि -

बदी को भूल के इंसा करे मोहब्बत बस,
दिलों में प्रीत की ऐसी अलख जला मौला
सुंदर प्रार्थना है

mehek का कहना है कि -

बदी को भूल के इंसा करे मोहब्बत बस,
दिलों में प्रीत की ऐसी अलख जला मौला

करें सभी हर पल बंदगी खुदा तेरी,
तुझे पा जाने का मौका तो इक दिला मौला

wah bahut khubsurat badhai

devendra का कहना है कि -

मिली मुझे दुनियाँ सारी जब मिला मौला
भुला दूँ मैं खुद को नाम की पिला मौला
--सुंदर।

-देवेन्द्र पाण्डेय।

Anonymous का कहना है कि -

आपकी क़व्वाली ठीक ठाक सी है कोई ख़ास नहीं बन सकी.

एक फेन

करण समस्तीपुरी का कहना है कि -

कुलवंत जी,
आप ने इसे ग़ज़ल कहा है, पर मुझे इसमें ग़ज़ल की बारीकियों की जगह कव्वाली की रवानगी नजर आती है ! कहीं कहीं लयभंग के साथ कशीश की कमी रचना के सौंदर्य पर प्रभाव डालती है लेकिन आपका सूफियाना मिजाज़ निहायत ही काबिले-तारीफ है !!!

Harihar का कहना है कि -

गमों से टूट रहा शख्स हर यहां रोता,
भरा दुखों से जहां तुमसे है गिला मौला
क्या बात है! कुलवंत जी

sumit का कहना है कि -

कवि कुलवंत जी,
गजल बहुत प्यारी है पर चौथे और पाँचवे शे'र मे काफिया बिगड गया
क्योकि आपने मकते मे 'मिला' और 'गिला' लिया है इसलिए काफिया इ+ला था पर मे वो उ+ला और ला रह गया
सुमित भारद्वाज

sumit का कहना है कि -

कवि कुलवंत जी,
गजल बहुत प्यारी है पर चौथे और पाँचवे शे'र मे काफिया बिगड गया
क्योकि आपने मकते मे 'मिला' और 'गिला' लिया है इसलिए काफिया इ+ला था पर चौथे और पाँचवे शे'र मे वो उ+ला और ला रह गया
सुमित भारद्वाज

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

कुलवंत जी,

मै सुमित जी के बातों से सहमत हूँ | काफिया - इ + ला ही होना चाहिए था |
और अर्थ भी ज्यादा दुमदार नही लगे | कुल मिलकर सामान्य |
आपकी नयी रचना ले इंतज़ार में...


अवनीश तिवारी

Kavi Kulwant का कहना है कि -

Thanks for correcting me.. yes its mistake..

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