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Friday, May 09, 2008

विडम्बना


डरी सहमी ऑंखें,
चेहरे पर हताशा,
तन पर कपड़े नदारद,
घुटनों को छाती से चिपकाये,
बेडियों में जकड़ी काया,
शून्य को घूरती हुई,
कहीं कुछ ढूँढती है शायद,
निश्ब्द्ता में भी है कोलाहल,
ह्रदय में जारी है उम्र की कवायद,
मगज एक मरघट हो जैसे,
कुछ चिताएँ जल रहीं हैं,
कुछ लाशें सडी हुई सीं,
पडी हुईं हैं, जिन पर,
भिनभिनाती है मक्खियाँ,
जैसे - कुछ अनसुलझी गुत्थियाँ,
कुछ अनुत्तरित सवालों का समूह्गान जैसे,
कैसी विडम्बना है ये,
आखिर हम मुक्त क्यों नही हो पाते...???

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13 कविताप्रेमियों का कहना है :

Harihar का कहना है कि -

संजीव जी ! काश हम इस विडम्बना से
मुक्त हो पाते !

सुन्दर अभिव्यक्ति के लिये बधाई

Seema Sachdev का कहना है कि -

सच्च मी कैसी विडम्बना है यह जिससे हम मुक्त नही हो पाते,न चाहते हुए भी यह कड़वे सच्च का जहर पीना पड़ता है | आपने ऐसा सवाल उठाया है ,जिसके जवाब टू बहुत है ,लेकिन कोई हल नही है.....अच्छी रचना के लिए बधाई ...सीमा सचदेव

DR.ANURAG ARYA का कहना है कि -

ह्रदय में जारी है उम्र की कवायद,
मगज एक मरघट हो जैसे,
कुछ चिताएँ जल रहीं हैं,
कुछ लाशें सडी हुई सीं,
पडी हुईं हैं, जिन पर,
भिनभिनाती है मक्खियाँ

इस घुटन का हल ढूंढने मे जाने कितनी सदिया बीत जायेगी......पर आपने मन मोह लिया...

shubhashish का कहना है कि -

sunder abhivyakti

शोभा का कहना है कि -

सजीव जी
बहुत सुन्दर और गम्भीर भाव लिए है यह कविता-
कुछ अनुत्तरित सवालों का समूह्गान जैसे,
कैसी विडम्बना है ये,
आखिर हम मुक्त क्यों नही हो पाते...???

एक सशक्त अभिव्यक्ति के लिए बधाई।

mehek का कहना है कि -

ह्रदय में जारी है उम्र की कवायद,
मगज एक मरघट हो जैसे,
कुछ चिताएँ जल रहीं हैं,
कुछ लाशें सडी हुई सीं,
पडी हुईं हैं, जिन पर,
भिनभिनाती है मक्खियाँ
बहुत सशक्त अभिव्यक्ति, बहुत बधाई.

तपन शर्मा का कहना है कि -

क्या बात है सजीव जी, हमेशा की तरह।

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

अच्छा हा, लेकिन मजा नही आया :(

अवनीश तिवारी

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

सजीव जी,

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है.. बहुत बहुत साधूवाद

pooja anil का कहना है कि -

सजीव जी ´
बस एक अनुत्तरित सवाल है,
सचमुच विडंबना है ,
शुभकामनाएँ

^^पूजा अनिल

tanha kavi का कहना है कि -

सजीव जी!
कविता पढकर ऎसा लगा कि मानो आप अपनी बात पूरी तरह से कह नहीं पा रहे हों। कहीं कुछ छूट-सा गया है। लेकिन कविता का विषय आपने बहुत हीं बढिया उठाया है और शब्दों का भी सुंदर जाल बुना है। इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं\

-विश्व दीपक ’तन्हा’

सतीश वाघमारे का कहना है कि -

हर एक पंक्ति सीधे दिल में उतर गई. आपकी अभिव्यक्ति को विनम्र अभिवादन !

Rama का कहना है कि -

डा. रमा द्विवेदी...

सच में यह विड़म्बना ही है जिसके जवाब हैं लेकिन उन जवाबों को कोई मानेगा नहीं...इसलिए कोई जवाब नहीं देना चाहता....अच्छी स्तरीय व गंभीर चिंतन की कविता के लिए बधाई....

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