फटाफट (25 नई पोस्ट):

Sunday, March 23, 2008

जोगीरा सा रा रारा......


होली मनाने के अपने-अपने अंदाज़ हैं.....उत्तर भारत में जोगीरा गाने का चलन है.....हर छंद के बाद आप भी कहिये जोगीरा सा रा रारा और फ़िर देखिये होली का मज़ा

एक तरफ़ हैं चाँद पर, इंसानों के पाँव,
और इधर अंधेर में, सदियों से हैं गाँव....

ना पानी, ना सड़क की, कोई करता बात,
हर नेता है पूछता, किसकी क्या है जात...

बाप दरोगा हो गए, बेटे हैं रंगदार,
माँ दुखियारी रो रही, हो बेबस, लाचार...

जब चाहा तब रात हो, पलक झपकते भोर,
क्या रखा है गाँव में, चलो शहर की ओर ...

कर धुएँ का नाश्ता, झटपट हों तैयार,
गए पड़ोस के भोज में, लेकर अपनी कार...

आँगन मेरे गाँव का, शहरी फ्लैट से बीस,
तिलक बराबर हो गई, पहली क्लास की फीस...

घर की मुर्गी दाल है, ऐसी अपनी सोच,
सौ करोड़ के देश में, रखें विदेश कोच...

दिल्ली आकर खो गए, शब्द , भावना, गीत,
त्योहारों पर कभी-कभी, याद आए मनमीत...

जोगीरा सा रा रा रा.....(अगले हफ्ते भी खेलेंगे होली....)

निखिल आनंद गिरि


आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

17 कविताप्रेमियों का कहना है :

vipul का कहना है कि -

निखिल जी हमेशा की तरह मस्त कर दिया आपने |
बहुत खूब... यह पंक्तियाँ बहुत पसंद आईं

"एक तरफ़ हैं चाँद पर, इंसानों के पाँव,
और इधर अंधेर में, सदियों से हैं गाँव"

सजीव सारथी का कहना है कि -

जोगीरा सा रा रारा.....
किसी दिन मंडली बना कर बैठते हैं और मिल कर गाते हैं इसे.....

बरबाद देहलवी का कहना है कि -

वाह! कमाल के दोहे है निखिल जी आज कल दोहे बहुत कम लिखे जा रहे हैं ऐसे मे आप्की कलम से निकले इन दोहों को पड्कर मज़ा आ गया

मीत का कहना है कि -

भाई वाह ...... सा रा रा रा, सा रा रा रा, सा रा रा रा, हो जोगीरा सा रा रा रा. मज़ा आ गया.

mehek का कहना है कि -

बहुत सुंदर

anuradha srivastav का कहना है कि -

भई वाह...........

anju का कहना है कि -

वाह निखिल जी आपने तो कमाल का लिखा है
हर पंक्ति , शब्द बोलता है
पसंद आया आजकल की समस्याओं का बखूबी वर्णन
किया है आपने
बधाई

Alpana Verma का कहना है कि -

'आँगन मेरे गाँव का, शहरी फ्लैट से बीस,
तिलक बराबर हो गई, पहली क्लास की फीस'

बहुत खूब अंदाज़ हैं !
सुंदर!

तपन शर्मा का कहना है कि -

मजा आ गया निखिल भाई।

seema sachdeva का कहना है कि -

अति सुंदर व्यंग्यात्मक कविता ,हम टू आपके साथ मलकर यही कह सकते है
जोगीरा सा रा रारा
जोगीरा सा रा रारा ......सीमा सचदेव

sunita yadav का कहना है कि -

सौ करोड़ के देश में, रखें विदेश कोच...दिल्ली आकर खो गए, शब्द , भावना, गीत,
त्योहारों पर कभी-कभी, याद आए मनमीत...जोगीरा सा रा रा रा.....

वाह क्या खूब ...!व्यंगात्मक दोहे ...!मजा आ गया ..

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

"जोगीरा सा रा रा रा....." तुम्हारे व्यंग्य की धार पैनी है। तुम्हारी अपार क्षमताओं के अनुरूप रचना..

*** राजीव रंजन प्रसाद

नीरज गोस्वामी का कहना है कि -

एक तरफ़ हैं चाँद पर, इंसानों के पाँव,
और इधर अंधेर में, सदियों से हैं गाँव....
वाह निखिल जी वाह...बहुत खूब लिखा है आप ने.
दुष्यंत जी का एक शेर याद आ गया:
"कहाँ तो तय था चिरागाँ हर एक घर के लिए
यहाँ चिराग मय्यसर नहीं शहर के लिए "
आप की पूरी रचना ही समसामयिक है और सूचने को मजबूर करती है. ऐसे विलक्षण रचना के लिए बधाई.
नीरज

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बहुत बढिया...

Rama का कहना है कि -

डा. रमा द्विवेदी said...

समकालीन यथार्थ की सुन्दर अभिव्यक्ति.....बधाई..

aaa kitty20101122 का कहना है कि -

adidas nmd
nike air huarache
retro jordans
fitflops clearance
brady jersey
led shoes for kids
ferragamo belt
adidas ultra boost
yeezy
chrome hearts

adidas nmd का कहना है कि -

ralph lauren outlet
snapbacks wholesale
prada outlet
cheap jordan shoes
nike huarache
jets jersey
true religion outlet
michael kors handbags
jordan shoes
michael kors outlet

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)