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Tuesday, March 11, 2008

अनु की क्षणिकाएँ


प्रतियोगिता की ८वीं कविता के रचनाकार हमें विश्व पुस्तक मेला से मिले। अपने बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया। बस एक विजिटिंग-कार्ड देकर चले गये थे। उनकी दो क्षणिकाओं को हमने प्रतियोगिता में शामिल किया तो वो टॉप १० में आ गईं, उनके नं॰ पर संपर्क किया (कई बार), और वे चित्र और परिचय भेजते ही रह गये। विजिटिंग कार्ड पर इतना लिखा है कि ये रमेश शर्मा 'अनु' हैं, रोहिणी, दिल्ली में निवास करते हैं और इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में हिन्दी के सेक्शन ऑफिसर हैं।

पुरस्कृत कविता- दो क्षणिकाएँ

1)
हम तुम मिले
साथ चले
ऐसे जिए
जैसे
पानी सूख गया
और
किनारे मिल गए।

2)
मैं चल भी न पाया था कि
समय दौड़कर, मुझ से
आगे निकल गया
मेरी ही कहानी में
मेरे ही पात्र को
मात्र-
दर्शक बनाकर छोड़ गया

निर्णायकों की नज़र में-


प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक-५॰५, ७॰२, ६॰४
औसत अंक- ६॰३६६७
स्थान- पाँचवाँ


द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक-७, ८॰२, ३॰५, ६॰३६६७(पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- ६॰२६६७
स्थान- चौथा


अंतिम जज की टिप्पणी-
अच्छी क्षणिकाएँ हैं किंतु कथ्य ऐसे बिम्बों की तलाश कर रहे हैं जिससे बात धारदार भी हो और शब्द न्यूनतम भी।
कला पक्ष: ५॰५/१०
भाव पक्ष: ६॰५/१०
कुल योग: १२/२०
स्थान- आठवाँ


पुरस्कार- सूरज प्रकाश द्वारा संपादित पुस्तक कथा-दशक'

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11 कविताप्रेमियों का कहना है :

anju का कहना है कि -

रमेश जी बहुत बहुत बधाई
कया खूब कहा आपने
मेरी ही कहानी में
मेरे ही पात्र को
मात्र-
दर्शक बनाकर छोड़ गया

mehek का कहना है कि -

मेरी ही कहानी में
मेरे ही पात्र को
मात्र-
दर्शक बनाकर छोड़ गया
बहुत खूब,बधाई

जीतेश का कहना है कि -

पानी सूख गया
और
किनारे मिल गए........
बहुत खूब,किनारों को मिलाने की अच्छी परिकल्पना

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

दोनों ही क्षणिकायें बेहतरीन हैं, बधाई।

*** राजीव रंजन प्रसाद

seema gupta का कहना है कि -

मैं चल भी न पाया था कि
समय दौड़कर, मुझ से
आगे निकल गया
मेरी ही कहानी में
मेरे ही पात्र को
मात्र-
दर्शक बनाकर छोड़ गया
" क्या खूब कहा है, समय की ऐसी व्यखा कमाल है"

Regards

EKLAVYA का कहना है कि -

वाह क्या बात है बहुत ही बढ़िया ढंग से च्त्रित किया है खाशकर निम्नवत पंक्तियाँ
मेरी ही कहानी में
मेरे ही पात्र को
मात्र-
दर्शक बनाकर छोड़ गया

रंजू का कहना है कि -

दोनों ही बहुत अच्छी लगी ..बधाई आपको !!

RAVI KANT का कहना है कि -

रमेश जी, सुन्दर क्षणिकाएँ हैं-

हम तुम मिले
साथ चले
ऐसे जिए
जैसे
पानी सूख गया
और
किनारे मिल गए।

बधाई।

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

क्षणिकाएँ सुंदर है |
बधाई
अवनीश तिवारी

तपन शर्मा का कहना है कि -

पहली वाली क्षणिका ज्यादा पसंद आई।
बधाई।

बरबाद देहलवी का कहना है कि -

बहुत खूब गागर मे सागर भर दिया अनु जी मुबारक हो

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