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Friday, March 28, 2008

बहुत देर तक


बहुत देर तक,
यूहीं तकता रहा मैं,
परिंदों के उड़ते हुए काफिलों को,
बहुत देर तक,
यूहीं सुनता रहा मैं,
सरकते हुए वक्त की आहटों को,

बहुत देर तक,
डाल के सूखे पत्ते,
भरते रहे रंग आँखों में मेरे,
बहुत देर तक,
शाम की डूबी किरणें,
मिटाती रही जिंदगी के अंधेरे,

बहुत देर तक,
मेरा मांझी मुझको,
बचाता रहा भंवर से उलझनों की,
बहुत देर तक,
वो उदासी को थामे,
बैठा रहा दहलीज पे धडकनों की,

बहुत देर तक,
उसके जाने के बाद भी,
ओढा रहा मैं उसकी परछाई को,
बहुत देर तक,
उसके एहसास ने,
सहारा दिया मेरी तन्हाई को,

बहुत देर तक...
हाँ ... बहुत देर तक ...

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17 कविताप्रेमियों का कहना है :

EKLAVYA का कहना है कि -

वह किसिस के इंतजार की परिदाती अऔर् वियोग की भावना का अच वरण किया है आपने...

Harihar का कहना है कि -

बहुत देर तक,
डाल के सूखे पत्ते,
भरते रहे रंग आँखों में मेरे,
बहुत देर तक,
शाम की डूबी किरणें,
मिटाती रही जिंदगी के अंधेरे,

बहुत ही सुन्दर कविता!

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

हमेशा की तरह "मखमली अहसासों" पर खूबसूरत शब्द...

*** राजीव रंजन प्रसाद

seema sachdeva का कहना है कि -

बहुत देर तक,
मेरा मांझी मुझको,
बचाता रहा भंवर से उलझनों की,
और
बहुत देर तक,
उसके एहसास ने,
सहारा दिया मेरी तन्हाई को,
पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी ......सीमा सचदेव

Manoj Mishra का कहना है कि -

सजीव
अब तुम सब के साथ बहुत अच्छे से खेलने लगे हो बहुत देर तक एक बहुत बेहतरीन कविता है

Manoj Mishra का कहना है कि -

सजीव
अब तुम सब के साथ बहुत अच्छे से खेलने लगे हो बहुत देर तक एक बहुत बेहतरीन कविता है

करण समस्तीपुरी का कहना है कि -

बहुत देर तक...
हाँ ... बहुत देर तक ...
ये कविता बहुत याद आती रही,
मेरे मानस को बरबस लुभाती रही !
बहुत देर तक...
हाँ ... बहुत देर तक ...
धन्यवाद !

शोभा का कहना है कि -

सजीव जी
भावों को सुंदर रूप मैं वाणी दी है-
बहुत देर तक,
उसके जाने के बाद भी,
ओढा रहा मैं उसकी परछाई को,
बहुत देर तक,
उसके एहसास ने,
सहारा दिया मेरी तन्हाई को,
ऐसा होता है अक्सर संवेदन शील लोगों के saath

POOJA ANIL का कहना है कि -

बहुत देर तक ,
याद रहेगी यह कविता ....
हाँ....... ,बहुत देर तक .
बहुत बढिया
पूजा अनिल

EKLAVYA का कहना है कि -

बहुत देर तक,
उसके एहसास ने,
सहारा दिया मेरी तन्हाई को,

बहुत देर तक...
हाँ ... बहुत देर तक ...
अन्तिम पंक्तियों में बड़ा ही बढ़िया भाव है

anitakumar का कहना है कि -

सुंदर अभिव्यक्ती…

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

बहुत देर तक,
उसके जाने के बाद भी,
ओढा रहा मैं उसकी परछाई को,
बहुत देर तक,
उसके एहसास ने,
सहारा दिया मेरी तन्हाई को,
-- खूबसूरत है |

अवनीश

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

kavita padhne mein uttam hai...
baandh kar rakhti hai बहुत देर तक ,
हाँ....... ,बहुत देर तक .

nikhil anand giri

Manish का कहना है कि -

शब्द अच्छे लगे पर भाव में खास कुछ नहीं लगा।

रंजू का कहना है कि -

बहुत देर तक,
उसके जाने के बाद भी,
ओढा रहा मैं उसकी परछाई को,
बहुत देर तक,
उसके एहसास ने,
सहारा दिया मेरी तन्हाई को,

बहुत देर तक...
हाँ ... बहुत देर तक ...

अच्छी लगी आपकी यह रचना सजीव जी ...:)

anju का कहना है कि -

अच्छी रचना
बहुत खूब सजीव जी
बहुत देर हो गई अब जाग जाइये बुरा न मानिएगा
अति सुंदर

अल्पना वर्मा का कहना है कि -

ओढा रहा मैं उसकी परछाई को,
बहुत देर तक,
उसके एहसास ने,
सहारा दिया मेरी तन्हाई को,
-सीधी सरल सुंदर कविता.
भावाभिव्यक्ति में सफल.

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