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Tuesday, January 22, 2008

कसक




दर्द ने जब हद से बढ कर
दिल की गहराई में दूर कहीं
किसी अहसास को पाला होगा
उस घडी आंखों ने तेरी चुपके
आस का मोती ढाला होगा

मुस्कान होंठों की शिकन भर
और हंसी बेमानी चुभन भर
मैं बांटे फ़िरा जमाने भर में
बेवजह सौगात समझ कर
और तुमने तो आह को भी
बरसों होठों पर संभाला होगा

क्या पाया मैने भी सोचो तो
यूं अपनी हदों से निकल कर
वापस आ नहीं सकता फ़िर से
तुझ तक अब खुद चल कर
चुन लूं सभी फ़ूल और कलियां
उससे भी भला अब क्या होगा
तोड के एक बार जो बिखेरा था
वो प्यार फ़िर कहां से माला होगा

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12 कविताप्रेमियों का कहना है :

seema gupta का कहना है कि -

मुस्कान होंठों की शिकन भर
और हंसी बेमानी चुभन भर
मैं बांटे फ़िरा जमाने भर में
बेवजह सौगात समझ कर
और तुमने तो आह को भी
बरसों होठों पर संभाला होगा
" शीर्षक कसक को सही रूप मे सार्थेक करती एक अच्छी रचना "
Regards

रंजू का कहना है कि -

मुस्कान होंठों की शिकन भर
और हंसी बेमानी चुभन भर

अच्छा लिखा है मोहिंदर जी ..एक पुराना गीत याद आ गया इसको पढ़ के !!

shobha का कहना है कि -

मोहिन्दर जी
काफी अलग शैली में लिखी है यह कविता । दिल को स्पर्श करती हुई भावपूर्ण रचना ।
मुस्कान होंठों की शिकन भर
और हंसी बेमानी चुभन भर
मैं बांटे फ़िरा जमाने भर में
बेवजह सौगात समझ कर
और तुमने तो आह को भी
बरसों होठों पर संभाला होगा
अति सुन्दर ।

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' का कहना है कि -

दर्द ने जब हद से बढ कर
दिल की गहराई में दूर कहीं
किसी अहसास को पाला होगा
उस घडी आंखों ने तेरी चुपके
आस का मोती ढाला होगा
....

मोहिंदर जी !

पहला छंद .... ही दिल पर भारी पड़ा .... आगे की बात क्या कहूं ... मित्रवर बहुत बहुत

शुभकामनाएं

mehek का कहना है कि -

rhis is simply fantastic,from strat to end,each word is more than perfect.very very nice.

sahil का कहना है कि -

मोहिंदर जी एकबार फ़िर अच्छी प्रस्तुति.
बधाई हो
आलोक सिंह "साहिल"

Alpana Verma का कहना है कि -

'दर्द ने जब हद से बढ कर
दिल की गहराई में दूर कहीं
किसी अहसास को पाला होगा
उस घडी आंखों ने तेरी चुपके
आस का मोती ढाला होगा'

**बहुत खूब लिखा है!

-'तोड के एक बार जो बिखेरा था
वो प्यार फ़िर कहां से माला होगा'
*भावों की अच्छी प्रस्तुति है.

tanha kavi का कहना है कि -

दर्द ने जब हद से बढ कर
दिल की गहराई में दूर कहीं
किसी अहसास को पाला होगा
उस घडी आंखों ने तेरी चुपके
आस का मोती ढाला होगा

मोहिन्दर जी,
पहला छंद सच में मर्मस्पर्शी है, अंदर तक झकझोर कर रख देता है, लेकिन तीसरा आते-आते आप कुछ कमजोर पड़ जाते है, ऎसा मुझे लगा।हो सकता है, यह बस मेरा हीं मंतव्य हो।
परंतु पूरे तौर पर आप सफल हुए हैं।
इस नाते आप बधाई के काबिल हैं।

-विश्व दीपक 'तन्हा'

सजीव सारथी का कहना है कि -

तोड के एक बार जो बिखेरा था
वो प्यार फ़िर कहां से माला होगा
वाह

kavi kulwant का कहना है कि -

दर्द को सजीव करती सुंदर रचना..

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

मोहिन्दर जी,

बहुत गहरी सोच एवं भावयुक्त रचना..

मुस्कान होंठों की शिकन भर
और हंसी बेमानी चुभन भर
मैं बांटे फ़िरा जमाने भर में
बेवजह सौगात समझ कर
और तुमने तो आह को भी
बरसों होठों पर संभाला होगा

बहुत सुन्दर..

sunita (shanoo) का कहना है कि -

खूबसूरत गीत है मोहिन्दर जी अच्छा लगा...जाने कब आपकी सुरीली आवाज में सुनने को मिलेगा...:)

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