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Friday, January 25, 2008

कुमार लव की कविता


प्रतियोगिता के २२वें पायदान पर भी बिलकुल नया चेहरा है कुमार लव का। कुमार लव हिन्दी की प्रतिष्ठित साहित्यिक वेबज़ीनों में प्रकाशित होते रहते हैं।

कविता- शीर्षक उपलब्ध नहीं है

कवयिता -कुमार लव

बहुत बहुत पहले
एक दोपहर
हमने,
तुमने और मैंने,
कुछ ख्वाब देखे थे.
आज
उनकी हकीकत खरीद लाया हूँ,
पर...

खिड़की पर खड़े,
हम,
तुम और मैं,
डूबते सूरज को,
बारिश को,
खुशबुओं को,
देख रहे हैं,
पर...

मौसम ठीक हैं,
मतलब ऐसा बुरा भी नहीं,
भारी हैं,
बादल.
गर्मी नहीं,
...

दो सोने के कंगन,
एक प्यारा सा
(साफ-सुथरा)
घर,
उस दोपहर के ख्वाब,
पर...
निर्णायकों की नज़र में-


प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ६॰५, ५॰५, ७॰१
औसत अंक- ६॰३६७


द्वितीय चरण के जजमैंट में मिले अंक-४॰५, ६॰३६७ (पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- ५॰४३३५


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9 कविताप्रेमियों का कहना है :

Alpana Verma का कहना है कि -

*ऐसा लगता है कविता का अर्थ इन पंक्तियों में ही छुपा है-
'आज
उनकी हकीकत खरीद लाया हूँ,'

*जो बहुत कुछ 'अनकही' कह गयी है.

seema gupta का कहना है कि -

खिड़की पर खड़े,
हम,
तुम और मैं,
डूबते सूरज को,
बारिश को,
खुशबुओं को,
देख रहे हैं,
पर...
"एक खाव्ब और उसकी हकीकत की अच्छी दास्ताँ"
Regards

Avanish Gautam का कहना है कि -

अच्छी कविता है.

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

good going.

Avaneesh Tiwari

mehek का कहना है कि -

adhuri dastan ya phir ek khwab ke liyedo sone ke kangan.nice poem,congrates

RAVI KANT का कहना है कि -

सुन्दर भाव है।

sumit का कहना है कि -

एक प्यारा सा
(साफ-सुथरा)
घर,
उस दोपहर के ख्वाब,
पर...

बहुत ही सुन्दर ख्वाब पर....
सुमित भारद्वाज

सजीव सारथी का कहना है कि -

वाह.... कविता एक मुस्कराहट छोड़ जाती है लबों पर....काश....

sahil का कहना है कि -

बहुत ही प्यारी रचना.
आलोक सिंह "साहिल"

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