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Saturday, July 21, 2007

कविताओं की साप्ताहिक समीक्षा (नये यूनिसमीक्षक)


यद्यपि कविता ही अंतिम सत्य है, हर तरह की आलोचना का उत्तर देने की शक्ति रखती है, प्रत्यक्ष प्रशंसा को सहन करने की भी हिम्मत रखती है, फ़िर भी हिन्दी-कविता में यह परम्परा रही है कि अपनी रचनाओं में निहित धार-परिमार्जन हेतु, भाव-समृद्धि हेतु बुजुर्गों की सलाह ली जाय। किन-किन आयामों में कवि सोच चुका है, यह तय कर पाना तो मुश्किल है, फ़िर भी एक अनुभवी कवयिता नवअंकुरों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकता है।

हिन्द-युग्म पर प्रतिमाह ४५-५० कविताएँ प्रकाशित होती हैं। वैसे में हमारे यूनिमीमांसक जयप्रकाश मानस के लिए सभी कविताओं पर चर्चा करना मुश्किल होता है। मगर हम चाहते हैं कि हर कविता पर खुलकर बात हो। इसलिए हम प्रत्यके पाठक से भी बेवाक टिप्पणी करने का निवेदन करते हैं। साप्ताहिक समीक्षा से हम कविताओं पर बेहतर ढ़ंग से बात कर सकेंगे। यूनिमीमांसा चुनिंदा कविताओं पर हुआ करेगी।

साप्ताहिक समीक्षा को हम यूनिसमीक्षा की संज्ञा दे रहे हैं और इसकी ज़िम्मेदारी सम्हाल रहे हैं यूनिसमीक्षक ऋषभदेव शर्मा

प्रत्येक शुक्रवार को पिछले सप्ताह (सोमवार से रविवार) में प्रकाशित कविताओं की यूनिसमीक्षा श्री ऋषभदेव शर्मा हिन्द-युग्म पर प्रकाशित करेंगे

ऋषभदेव शर्मा- एक परिचय


जन्म
04.07.1957, ग्राम - गंगधाडी, जिला - मुज़फ्फर नगर, उत्तर प्रदेश
शिक्षा
एम.ए. (हिन्दी), एम.एससी. (भौतिकी), पीएच.डी. (उन्नीस सौ सत्तर के पश्चात की हिंदी कविताओं का अनुशीलन)।
कार्य
प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद - 500 004
1983-1990
जम्मू और कश्मीर राज्य में गुप्तचर अधिकारी (इंटेलीजेंस ब्यूरो, भारत सरकार)
1990-1997
प्राध्यापक : उच्च शिक्षा और शोध संस्थान,
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा : मद्रास और हैदराबाद केंद्र में।
1997-2005
रीडर : उच्च शिक्षा और शोध संस्थान : हैदराबाद केंद्र में।
2005-2006
प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान : एरणाकुलम केंद्र में।
संप्रति
१५ मई, २००६ से : प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान : दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद केंद्र में।
प्रकाशन
काव्य संग्रह
तेवरी, तरकश, ताकि सनद रहे।
आलोचना
तेवरी चर्चा, हिंदी कविता : आठवाँ नवाँ दशक। कविता की समकालीनता (प्रकाश्य)।
अनुवाद चिंतन
साहित्येतर हिंदी अनुवाद विमर्श।
संपादन पुस्तकें
पदचिह्न बोलते हैं, कच्ची मिट्टी-२, पुष्पक-३ और ४, अनुवाद का सामयिक परिप्रेक्ष्य, भारतीय भाषा पत्रकारिता, शिखर-शिखर (डॉ.जवाहर सिंह अभिनंदन ग्रंथ), हिंदी कृषक (काजाजी अभिनंदन ग्रंथ), माता कुसुमकुमारी हिंदीतर भाषी हिंदी साधक सम्मान अतीत एवं संभावनाएँ
अनुवाद
नई पीठिका, नए संदर्भ, स्त्री सशक्तीकरण के विविध आयाम, प्रेमचंद की भाषाई चेतना।
पत्रिकाएँ
संकल्य (त्रैमासिक) : दो वर्ष
पूर्णकुंभ (मासिक) : पाँच वर्ष : सहायक संपादक
महिप (त्रैमासिक) : सहयोगी संपादक
आदर्श कौमुदी : तमिल कहानी विशेषांक
कर्णवती : समकालीन तमिल साहित्य विशेषांक।
पाठ्यक्रम लेखन(विषय विशेषज्ञ)
डॉ.बी.आर.अंबेडकर सार्वत्रिक विश्वविद्यालय, हैदराबाद।
दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नै।
नवोदय विद्यालय, एन सी ई आर टी, दिल्ली।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया आफीसर्स एसोसिएशन इंस्टीट्यूट, चेन्नै।
विभिन्न विश्वविद्यालयों / महाविद्यालयों/संस्थानों द्वारा आयोजित संगोष्ठियों / लेखक शिविरों/ कार्यशालाओं में संसाधक/विषय विशेषज्ञ।
शोध निर्देशन
पीएच.डी. और एम.फिल. के ६५ शोध प्रबंधों का सफलतापूर्वक निर्देशन।
विशेष
मूलतः कवि। १९८० में तेवरी काव्यांदोलन (आक्रोश की कविता( का प्रवर्तन।अनेक शोधपरक समीक्षाएँ एवं शोधपत्र प्रकाशित। लगभग ५० पुस्तकों के लिए भूमिका-लेखन।
ई-मेल
साइट

सभी शोध निर्देशन




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17 कविताप्रेमियों का कहना है :

maithily का कहना है कि -

आपका प्रयास बहुत अच्छा है.

anuradha srivastav का कहना है कि -

सरहानीय कोशिश है ।

Gaurav Shukla का कहना है कि -

ऋषभदेव जी
अभिनंदन, आपका हिन्द-युग्म पर हार्दिक स्वागत करते हुये अत्यधिक हर्ष हो रहा है|
हार्दिक आभार, आपने अपने अति व्यस्त समय में से कुछ समय युग्म पर प्रकाशित कविताओं की साप्ताहिक समीक्षा के लिये निकाला|
आपकी अमूल्य समीक्षा युग्म के कवि मित्रों को निश्चित रूप से लाभान्वित करेगी

पुनः स्वागत है आपका

सादर
गौरव शुक्ल

गिरिराज जोशी "कविराज" का कहना है कि -

आदरणीय ऋषभदेव जी,

हिन्द-युग्म पर आपका हार्दिक स्वागत करते हुये अत्यधिक हर्ष हो रहा है| आपकी साप्ताहिक समीक्षा निश्चित तौर पर मार्गदर्शन देते हुए हमें उत्कृष्ट लेख़न को प्रोत्साहित करेगी।

आपकी अमूल्य समीक्षा मुझे एवं युग्म के अन्य सभी कवि मित्रों को भी निश्चित रूप से लाभान्वित करेगी।

हार्दिक धन्यवाद!

सुनील डोगरा ज़ालिम का कहना है कि -

हिन्द युग्म की सफलता की एक ऒर सीढी।

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

हम बहुत पहले से कविताओं की साप्ताहिक समीक्षा के ऊपर विचार कर रहे थे, आपके आने से खुशी हुई है। अब हिन्द-युग्म का स्तर और ऊँचा हो पायेगा।

हम आपका हार्दिक अभिनंदन करते हैं।

तपन शर्मा का कहना है कि -

ऋषभदेव जी, आपका हिंदयुग्म पर स्वागत है|
हिंद युग्म लगातार सीढ़ियाँ चढ़ रहा है और आगे बढ़ रहा है.. इसी दिशा में यह एक और बहुत ही सार्थक कदम है।

अजय यादव का कहना है कि -

ऋषभदेव जी,
हिन्द-युग्म पर आपका हार्दिक स्वागत है. निश्चय ही आपके आगमन से हमें अपनी कविताओं में और भी सुधार करने का मौका मिलेगा.

pramendra का कहना है कि -

abhinandan aur swagat

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

ऋषभदेव जी,
आपका हिंदयुग्म पर स्वागत है| हिन्द युग्म में प्रकाशित कवितायें कसौटी की आवश्यकता महसूस करती रही हैं, आपके आगमन से यह कमी पूरी हो सकेगी।

*** राजीव रंजन प्रसाद

रचना सागर का कहना है कि -

हिन्द युग्म का एक और सराहनीय कदम।

-रचना सागर

Anonymous का कहना है कि -

श्रद्धेय गुरुजी,

स्वागत... बधाई... और शुभकामनाएँ

आपके इस अति उत्कृष्ट कार्य के लिए ,

वेब पर आपकी ख्याति देख अत्यंत हर्ष हो रहा है,
हिंदी कविता के विकास के प्रति आपकी आपार रुचि के विषय में तो आपके सभी विद्यार्थी जानते ही हैं, आपने इस रुचि को इंटरनेट पर प्रदर्शित कर
हिंदी कविताके परिमार्जन की दिशा में नया आयाम जोड़ा है ।
हिंदी युग्म के माध्यम से इंटरनेट पर प्रकाशित कविताओं की ऑन लाइन समीक्षा कर, आप जो सराहनीय कार्य कर रहे हैं वह स्तुत्य है ।
आज कल इंटरनेट के माध्यम से हिंदी का बहुत तेज गति से विकास हो रहा है, इस में कविताएं लिखने और पढ़नेवालों की संख्या भी अपार है । आपकी समीक्षाओं से निश्चित ही हिंदी कविता को सही दिशा मिलेगी ।
आपके इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत बधाई ।

आपका
आत्माराम

Anonymous का कहना है कि -

श्रद्धेय गुरुजी,

स्वागत... बधाई... और शुभकामनाएँ

आपके इस अति उत्कृष्ट कार्य के लिए ,

वेब पर आपकी सेवाओं को देख अत्यंत हर्ष हो रहा है,
हिंदी कविता के विकास के प्रति आपकी आपार रुचि के विषय में तो आपके सभी विद्यार्थी जानते ही हैं, आपने इस रुचि को इंटरनेट पर विस्तार प्रदान कर
हिंदी पाठकों के लिए बहुत ही उपयोगी कार्य किया है । हिंदी युग्म की समीक्षाएं पाठकों की रुचि का परिमार्जन कर रही है ।
आपके इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत बधाई ।

आपका
आत्माराम

atmaram का कहना है कि -

श्रद्धेय,

हिंदी युग्म के माध्यम से कविताओं की समीक्षा कर, आप जो सराहनीय कार्य कर रहे हैं वह स्तुत्य है ।
आज कल इंटरनेट के माध्यम से हिंदी का बहुत तेज गति से विकास हो रहा है, इस में कविताएं लिखने और पढ़नेवालों की संख्या भी अपार है । आपकी समीक्षाओं से निश्चित ही हिंदी कविता को सही दिशा मिलेगी ।
आपके इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत बधाई ।

आपका
आत्माराम

atmaram का कहना है कि -

श्रद्धेय,

हिंदी युग्म के माध्यम से कविताओं की समीक्षा कर, आप जो सराहनीय कार्य कर रहे हैं वह स्तुत्य है ।
आज कल इंटरनेट के माध्यम से हिंदी का बहुत तेज गति से विकास हो रहा है, इस में कविताएं लिखने और पढ़नेवालों की संख्या भी अपार है । आपकी समीक्षाओं से निश्चित ही हिंदी कविता को सही दिशा मिलेगी ।
आपके इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत बधाई ।

आपका
आत्माराम

Anonymous का कहना है कि -

श्रद्धेय,

हिंदी युग्म के माध्यम से कविताओं की समीक्षा कर, आप जो सराहनीय कार्य कर रहे हैं वह स्तुत्य है ।
आज कल इंटरनेट के माध्यम से हिंदी का बहुत तेज गति से विकास हो रहा है, इस में कविताएं लिखने और पढ़नेवालों की संख्या भी अपार है । आपकी समीक्षाओं से निश्चित ही हिंदी कविता को सही दिशा मिलेगी ।
आपके इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत बधाई ।

आपका
आत्माराम

Anonymous का कहना है कि -

श्रद्धेय,

हिंदी युग्म के माध्यम से कविताओं की समीक्षा कर, आप जो सराहनीय कार्य कर रहे हैं वह स्तुत्य है ।
आज कल इंटरनेट के माध्यम से हिंदी का बहुत तेज गति से विकास हो रहा है, इस में कविताएं लिखने और पढ़नेवालों की संख्या भी अपार है । आपकी समीक्षाओं से निश्चित ही हिंदी कविता को सही दिशा मिलेगी ।
आपके इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत बधाई ।

आपका
आत्माराम

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