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दोहा गाथा सनातन: 20- दोहा पावन पयोधर


दोहा पावन पयोधर, दे मन को आनंद.
बारह-चौबिस गुरु-लघु, छत्तीस मात्रिक छंद..

जिस दोहे में बारह गुरु तथा चौबिस लघु कुल ३६ मात्राएँ हों उसे पयोधर कहते हैं।

उमस, घुटन, सीलन भरी, लोग खड़े निर्वात।
खूब गरजते मेघ तुम तब होती बरसात।। - डॉ. भारतेंदु मिश्र
भाषा अम्बर भाव् शशि, पिंगल है ऋतुचक्र।
तारक उपमा, जलद रस, तडित्छटा गण वक्र।।
रीति-नीति, युग-बोध नव, पुरा-पुरातन सत्य।
शिव-सुन्दर कर कह रहा, दोहा छंद अनित्य।।

द्वैताद्वैत, सगुण-निगुण, ज्ञान-प्रेम दिन-रात।
विविध मतों का तिमिर हर, दोहा करे प्रभात।।
सबा-सलिल शीतल-विमल, मिले नर्मदा-तीर।
सफल सदा हो साधना, नर हो ऋषि-गुरु-पीर।।

अगली कड़ी में मिलिए 'बल' दोहा से-