जेहाद के नाम पर
मासूमों को बरगलाने वालो
उनको अपने नापाक मंसूबों
को पूरा करने में लगाने वालो
जो हाथ कितने चमत्कार कर सकते थे
उनके हाथ में बन्दूक थमाने वालो
कायरो
सामने आओ
एक माँ,
करेगी क्या हश्र तेरा
देखना है तो सामने आ
ये तेरी फितरत नहीं
बुझदिल
तू मासूमों के हाथों
मासूमों का कत्ल करा रहा है
कमीने
तुझे
तो
नहीं मिलेगी
दोजख में भी जगह
ये उस माँ शाप है
जिसने तुम्हारे लिए
पाँचों वक़्त की नमाज़ अदा करनी
शुरू कर दी है
तुम्हारी तबाही के लिए
तुम्हारी बर्बादी के लिए
क्योंकि वो अल्लाह मेरा भी है
--नीलम मिश्रा






