शोक , ना अवसाद है,
मेरी रूह बे-औलाद है।
परदा करे वो इसलिए,
परदे में हीं आज़ाद है।
फ़िक्र आईने की क्यूँ,
संगत में जो बर्बाद है।
यम आना इत्मीनान से,
तबियत अभी नाशाद है।
तुम सबकी बद्दुआओं से,
दुनिया मेरी आबाद है।
दुखता है दिल इंसान का,
’तन्हा’ हीं एक अपवाद है।
शब्दार्थ:
यम = यमराज
नाशाद= उदास, गमगीन
-विश्व दीपक ’तन्हा’






