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Wednesday, May 19, 2010

इश्क सचमुच इक बला है-gazal


इश्क सचमुच इक बला है
खुद मजा है,खुद सजा है


हो गई फ़िर से खता है
दिल तुझे जो दे दिया है


इश्क सचमुच इक बला है

रोग भी खुद,खुद दवा है


गम से बचकर है निकलना
प्यार ही बस रास्ता है


आ रही शायद वही है
दिल मेरा जो झूमता है

है हसीं अपनी धरा ये
चाँद पीछे घूमता है


ढूंढता है ‘श्याम किसको
दिल हुआ क्या लापता है

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4 कविताप्रेमियों का कहना है :

M VERMA का कहना है कि -

हो गई फ़िर से खता है
दिल तुझे जो दे दिया है
दिल दे दिया तो लिया भी तो है
सुन्दर गज़ल

RC का कहना है कि -

गम से बचकर है निकलना
प्यार ही बस रास्ता है

है हसीं अपनी धरा ये
चाँद पीछे घूमता है
Yah ashaar bahut pasand aaye.

Anonymous का कहना है कि -

आ रही शायद वही है
दिल मेरा जो झूमता है

पहले मिसरे के अंत मे "है" आ रहा है जो आपकी गजल का रदीफ है

उचित समझे तो सुधार करें

swapnil का कहना है कि -

है हसीं अपनी धरा ये
चाँद पीछे घूमता है

ye mast laga

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