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Wednesday, March 31, 2010

अब भी गर नाकाम रहा तो-gazal


कल वो मुझको याद करेगा
व्यर्थ आँसू बरबाद करेगा

कल सब-कुछ स्वीकारेगा वो
लेकिन आज फ़साद करेगा

लगता था उसका मैं भी कुछ
याद मौत के बाद करेगा

कुट्टी कर लेगा यदि मुझसे
फिर किससे संवाद करेगा

अब भी गर नाकाम रहा तो
नव साजि़श ईजाद करेगा

बस्ती में जो कर गुजरा वो
क्या कोई जल्लाद करेगा

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8 कविताप्रेमियों का कहना है :

शारदा अरोरा का कहना है कि -

खूब कहा , जाने के बाद ही दूसरे कद्र जानते हैं |

Dev का कहना है कि -

बहुत खूब रचना की है

M VERMA का कहना है कि -

कुट्टी कर लेगा यदि मुझसे
फिर किससे संवाद करेगा
संवाद जरूरी है कुट्टी मत करने दीजियेगा
सुन्दर गज़ल

अमिता का कहना है कि -

बहुत खूब लिखा है जाने के बाद ही तो याद किया जाता है.

Anonymous का कहना है कि -

अब भी गर नाकाम रहा तो
नव साजि़श ईजाद करेगा
बहुत ही प्यारी रचना है..शाम जी को ढेरों बधाईयां!

अपूर्व का कहना है कि -

बेहद सुंदर गज़ल..कई सारे भावों को समेटे हुए..खासकर
कल सब-कुछ स्वीकारेगा वो
लेकिन आज फ़साद करेगा
और
अब भी गर नाकाम रहा तो
नव साजि़श ईजाद करेगा

दोनो शे’र बहुत दूर तक जाते हैं..हकीकत का आइना दिखाते हुए..श्याम जी को बधाई!

स्वप्निल तिवारी का कहना है कि -

hmmm shabd sanyojan badhiya hai

दिपाली "आब" का कहना है कि -

कल सब-कुछ स्वीकारेगा वो
लेकिन आज फ़साद करेगा

halki fulki gazal. acchi kahi hai

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