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Wednesday, February 10, 2010

दोहे


गीत गुनगुना के आज, छेड़ो दिल के तार .
दिल में घर बसा लो तुम, मुझे बना लो यार .


मधुर मधुर मदमानिनी, मान मुनव्वल मीत .
मंद मंद मोहक महक, मन मोहे मन मीत .


मधुर प्रीत मन में बसा, जग से कर ले प्यार .
जीवन होता सफल है, जग बन जाये यार .


नन्हा मुझे न जानिये, आज भले हूं बीज .
प्रस्फुटित हो पनपूंगा, दूंगा आम लजीज .


पढ़ लिख कर सच्चा बनो, किसको है इंकार .
दुनियादारी सीख लो, जीना गर संसार .


संसारी संसारे में रहे लिप्त संसार .
खुद भूला, भूला खुदा, भूले नहि परिवार .


फक्कड़ मस्त महान कवि, ऐसे संत कबीर .
फटकार लगाई सबको, बात सरल गंभीर .


नाम हरी का सब जपो, कहें सदा यह सेठ .
ध्यान भला कैसे लगे, खाली जिनके पेट .


सच की अर्थी ढ़ो रहा, ले कांधे पर भार .
पहुंचाने शमशान भी, मिला न कोई यार .


देश को नोचें नेता, बन चील गिद्ध काग .
बोटी बोटी खा रहे, कैसा है दुर्भाग .


लालच में है हो गया, मानव अब हैवान .
अपनों को भी लीलता, कैसा यह शैतान .


रावण रावण जो दिखे, राम करे संहार .
रावण घूमें राम बन, कलयुग बंटाधार .


मर्याद को राखकर बेच मान अभिमान .
कलयुग का है आदमी, धन का बस गुणगान .


मैं मैं मरता मर मिटा, मिट्टी मटियामेट .
मिट्टी में मिट्टी मिली, मद माया मलमेट .


छल कपट लूट झूठ सब, चलता जीवन संग .
सच पर अब जो भी चले, लगे दिखाता रंग .


कवि कुलवंत सिंह

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12 कविताप्रेमियों का कहना है :

संगीता पुरी का कहना है कि -

बढिया दोहे !!

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

sundar vicharon se saje sundar dohe...dhanywaad kulwant ji

रंजना का कहना है कि -

कल्याणकारी सीख देते सुन्दर दोहे...

श्रद्धा जैन का कहना है कि -

रावण रावण जो दिखे, राम करे संहार .
रावण घूमें राम बन, कलयुग बंटाधार .

har doha bahut tez dhaar liye hue tha

ye magar bahut achcha laga

RaniVishal का कहना है कि -

आदरनीय,
दोहे इतने सुन्दर और प्रभावी है कि तरीफ़ के शब्द नही सुझरहे!! अनुप्रास अलन्कार का बहुत हि सुन्दर प्रयोग किया आपने!
सादर
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

Anonymous का कहना है कि -

बहुत बढ़िया दोहे लिखे , बहुत बहुत बधाई,
धन्यवाद
विमल कुमार हेडा

pravesh का कहना है कि -
This comment has been removed by the author.
pravesh का कहना है कि -

her shabd mai ek arth hai or dohe mai seekh hai ,bahut gahri soch hai aapki ...dhaynwaad Kulwant ji

sumita का कहना है कि -

बढिया दोहे के लिये बधाई!!

Anonymous का कहना है कि -

आचार्य सलिल जी कहां हो
आवाज दो जहां हो
इनको भी दोहे सिखलाओं
देर न करो आ जाओ ना
raam raam

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

कुलवंत जी,

आप कविता को चाहे छंदबद्धता के साथ रचें या अछंदबद्धता के साथ, कथ्य सतही नहीं होना चाहिए। इस ओर आपको बहुत गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है।

शिक्षा प्रद कहानिया from naveen का कहना है कि -

बहुत अच्छे दोसे है इन की आज के युग में जरुरत है

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