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Wednesday, January 13, 2010

आपके पहलू में निकले अपना दम


जब भी तुझको याद करते हैं सनम
खुद को ही बरबाद करते हैं सनम

आपके पहलू में निकले अपना दम
बस यही फरियाद करते हैं सनम

हम फ़कीरों का ठिकाना, है कहां
टूटे दिल आबाद करते हैं सनम

कैद जुल्फों में तेरी हम तो रहें
पर तुझे आजाद करते हैं सनम

खेल अपनी जान पर ही तो शलभ
इश्क जिन्दाबाद करते हैं सनम

कोशिशे नाकाम सारी जब हुईं
तब भला इमदाद करते हैं सनम

‘श्याम’ है दरवेश,है खानाखराब
पर उसे सब याद करते हैं सनम

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8 कविताप्रेमियों का कहना है :

Devendra का कहना है कि -

हमेशा की तरह अच्छी गजल.
बधाई स्वीकार करें..

निर्मला कपिला का कहना है कि -

बहुत सुन्दर गज़ल है ।लोहडी की हिन्द युग्म परिवार को बहुत बहुत बधाई

Harihar का कहना है कि -

बहुत सुन्दर गज़ल !!

हृदय पुष्प का कहना है कि -

हम फ़कीरों का ठिकाना, है कहां
टूटे दिल आबाद करते हैं सनम

कैद जुल्फों में तेरी हम तो रहें
पर तुझे आजाद करते हैं सनम
बहुत खूब

manu का कहना है कि -

सुन्दर लिखा है श्याम जी...

शलभ वाली बात भी ठीक ही है...

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

हम फ़कीरों का ठिकाना, है कहां
टूटे दिल आबाद करते हैं सनम

बढ़िया ग़ज़ल..बधाई स्वीकारें श्याम जी!!

rachana का कहना है कि -

hamesha ki tarah sunder likha hai sabhi sher achchhe lage
badhai
saader
rachana

kavi kulwant का कहना है कि -

जब भी तुझको याद करते हैं सनम
खुद को ही बरबाद करते हैं सनम

आपके पहलू में निकले अपना दम
बस यही फरियाद करते हैं सनम

हम फ़कीरों का ठिकाना, है कहां
टूटे दिल आबाद करते हैं सनम

wah.. wah.. bahut khoob..

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