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Wednesday, December 23, 2009

हर तरफ दुनिया में बस ताजिर हैं


हर तरफ दुनिया में बस ताजिर हैं
ऐ मेरे मलिक मुझे भी एक काम दे दे .
रोज एक शख्स के गमों को मिटाकर
चेहरे पर तबस्सुम लाने का इनाम दे दे.


हर इंसान की है अपनी एक कहानी,
गमों के सैलाब में डूबती जिंदगानी,
जब तक बख्सी है तूने सांसों की डोर
दिलों में मोहब्ब्त जगाने का पैगाम दे दे .


रहम में आज मैं तेरे दर पे आया हूँ,
दुखियों के गमों की भर पोटली लाया हूँ,
दुनिया से सारे रंजो-अलम मिटा सकूँ
पाक कुरान का मुझे वह कलाम दे दे .


हर इंसान दूसरे पर यकीन करे,
आसमां भी जमीं से दुआ सलाम करे,
हर जिंदगी को नेमत से नवाज सकूँ
खुशियों से भरा गुलशन इनाम दे दे .


यह दुनिया एक जन्नत बन जाए,
हर कली फूल बन कर इतराए,
लोगों के दिलों में मुझे थोड़ी जगह दे दे,
मेरी इस आरजू को ऐ खुदा अंजाम दे दे .


कुलवंत सिंह

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4 कविताप्रेमियों का कहना है :

निर्मला कपिला का कहना है कि -

यह दुनिया एक जन्नत बन जाए,
हर कली फूल बन कर इतराए,
लोगों के दिलों में मुझे थोड़ी जगह दे दे,
मेरी इस आरजू को ऐ खुदा अंजाम दे दे .
बहुत सुन्दर प्रेरना देती कविता है कुलवन्त जी वैसी भी खुद बहुत अच्छे इन्सान हैं और अच्छा लिखते हैं। उन्हें बधाई और आशीर्वाद्

sumita का कहना है कि -

रोज एक शख्स के गमों को मिटाकर
चेहरे पर तबस्सुम लाने का इनाम दे दे.
आज के दौर में सभी को ऐसी कामना करने की जरुरत है...एक दूसरे के गमों के भागीदार बनें,भाईचारा बना रहे...बहुत ही सुंदर रचना..कुलवंत जी को बधाई.

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

हर इंसान की है अपनी एक कहानी,
गमों के सैलाब में डूबती जिंदगानी,
जब तक बख्सी है तूने सांसों की डोर
दिलों में मोहब्ब्त जगाने का पैगाम दे दे .

बिल्कुल सच कहाँ यह दुनिया विविधता से भरा है और हर एक आदमी अपनी अलग दुनिया में डूबा रहता है लोगो को एक दूसरे के बारे में सोचने का वक्त ही नही मिलता है बस लोग अपने अपने में ही लगे रहते है..सुंदर विचारों से ओतप्रोत बहुत बढ़िया कविता..कुलवंत जी बहुत बहुत बधाई

Harihar का कहना है कि -

जब तक बख्सी है तूने सांसों की डोर
दिलों में मोहब्ब्त जगाने का पैगाम दे दे .

वाह कुलवन्त जी ! आनन्द आ गया पढ़ कर ।

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