फटाफट (25 नई पोस्ट):

Wednesday, December 16, 2009

दिल अपना उस पार गया


जब आपस का प्यार गया
जीने का आधार गया

इश्क किया था जब हमने
दिल उनको उपहार गया

मुँह उघड़ा जब सूरज का
रात गई, अँधियार गया

मुँह क्या मोड़ा माया ने
साख गई, सत्कार गया

उनसे आँख लड़ी जब ‘श्याम’
दिल अपना उस पार गया

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

10 कविताप्रेमियों का कहना है :

पी.सी.गोदियाल का कहना है कि -

बेहतर रचना !

Anonymous का कहना है कि -

मुँह क्या मोड़ा माया ने
साख गई, सत्कार गया
पूरी रचना सुन्दर है, और हकीकत से अवगत कराती ये पंक्तिया बहुत अच्छा लगा
धन्यवाद
विमल कुमार हेडा

मनोज कुमार का कहना है कि -

रचना अच्छी लगी।

परमजीत बाली का कहना है कि -

बढ़िया रचना!!

निर्मला कपिला का कहना है कि -

मुँह क्या मोड़ा माया ने
साख गई, सत्कार गय
बहुत खूब धन्यवाद्

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

उनसे आँख लड़ी जब ‘श्याम’
दिल अपना उस पार गया

प्रेम की सुंदर भावनाएँ दर्शाती..सुंदर ग़ज़ल..बढ़िया लगी..धन्यवाद श्याम जी

Devendra का कहना है कि -

बेहद खूबसूरत गज़ल
हर शेर अच्छे, हर बात अच्छी।

Sumita का कहना है कि -

सुंदर रचना..बधाई!

अभिन्न का कहना है कि -

जब आपस का प्यार गया
जीने का आधार गया
.....
मुँह क्या मोड़ा माया ने
साख गई, सत्कार गया
..........

बहुत की सरल ओर सरस रचना
एक एक शेर जबरदस्त
धन्यवाद

प्रवीण पराशर का कहना है कि -

sandhar, badhii .... धन्यवाद

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)