फटाफट (25 नई पोस्ट):

Thursday, November 19, 2009

कौन हुआ बेघर ?


ईश्वर को
ऊँगली दिखाता
व्योम छिद्रान्वेषी
टावर,
प्रतिपल बताता
मौसम की जानकारी
चाँद पर पानी के सबूत
भूकंप,
सूनामी,
बवंडर के जमाखर्च
सास बहु के झगड़ों
की पेचीदगियां और तफसील,
बोरवेल में फसे बच्चों के
जिंदगी और मौत के
टूर्नामेंट की लाइव कवरेज,
जनप्रतिनिधियों में
रुस्तम ए हिंद
दंगल के दांवपेंच,
रजत पटल की कालिख,
जांच कमिशनों का
भाषण चाटण ठठ्ठा,
शेर बाज़ार का सट्टा,
तेजी मंदी के आनंदी,
कुछ भी छूटा ना था
उसकी पकड़ से,
बस छूट गए
ढीले होते पेच और
जड़ों में लगी जंग के
समाचार,
और एक रात
भरभरा कर गिर पडा,
झोंपड़पट्टी के
सात लोग दब कर मर गए,
शहर के लोग चिल्ला उठे,
अरे! क्या हुआ ?
कंहा गए सिगनल ?
बिग बोस के घर से
कौन हुआ बेघर ?

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

11 कविताप्रेमियों का कहना है :

राकेश कौशिक का कहना है कि -

मानवीय मूल्यों की अनदेखी की तरफ इशारा करती रचना.
"उसकी पकड़ से
बस छूट गए
ढीले होते पेच और
जड़ों में लगी जंग के
समाचार"
कवि को बधाई और शुभकामनाएं.

Devendra का कहना है कि -

------
कुछ भी छूटा ना था
उसकी पकड़ से,
बस छूट गए
ढीले होते पेच और
जड़ों में लगी जंग के
समाचार
----------
-अच्छा व्यंग्य है।

M VERMA का कहना है कि -

बहुत सूक्ष्म कविता और ---

सम्वेदनाओ की झनझनाहट लिये हुए

मार्मिक भी

KISHORE KALA का कहना है कि -

gadion ki chillapon
undekha karate hue chaldena
sishuon ki katar nigahen
do dinon se bhokhi hoon
ek man ki dard bhari pukar
sab kuch to najar aata hai jeewanme
phir kahin thaharao nahi
bahati hui nadi ki tarah.
kishore kumar jain.guwahati assam

rachana का कहना है कि -

aap ki kavita sach batati hui sabhi ko kuchh sochne pr majboor karti hai
कुछ भी छूटा ना था
उसकी पकड़ से,
बस छूट गए
ढीले होते पेच और
जड़ों में लगी जंग के
kavita ka sar hai ye lines
achchhi lagi kavita
saader
rachana

poonam का कहना है कि -

vinay,
आप बहुत कम और सधे शब्दों में बहुत गहरी बात कह देते हो

मनोज कुमार का कहना है कि -

अच्छी रचना। बधाई।

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

आज नये नये आकर्षक प्रोग्राम लोगों के दिलोदिमाग पर हावी हो चके है..विशेस रूप से रियलिटी शो..लोगो की उत्सुकता और छोटे पर्दे की लोकप्रियता का बहुत बढ़िया ढंग से आपने कविता का रूप दिया है..बढ़िया रचना..बधाई

श्याम सखा 'श्याम' का कहना है कि -

घर से बेघर था क्या करता
दुनिया का डर था क्या करता

Dr. shyam gupta का कहना है कि -

सोच निकलेगी तो बहुत दूर तलक जायेगी : वाह क्या कहने! सुन्दर ,अति-सुन्दर ।

Apoorv का कहना है कि -

हमारे इंटरटेन्मेंट-हंग्री समाज मे लुप्तप्राय होती जा रही संवेदनहीनता को बड़े नये प्रतीक (टी वी टावर) के माध्यम से व्यक्त किया...
..और यह कविता नही हकीकत भी है..हम ही खुद सुबह की चाय के साथ पेपर के मुखप्रष्ठ पे बम-ब्लास्ट्स, पावर्टी-इन्डेक्स, मधु कोडा, बाढ़ के अपडेटेड आँकड़े सरसरी नजर से देख के पेज-थ्री पर बढ़ जाते हैं..करीना के कपड़ों की नाप लेने...

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)