फटाफट (25 नई पोस्ट):

Sunday, October 04, 2009

जाने क्यों


जाने क्यों,
कब,
कैसे,
लेकिन कुछ छूट जाता है

बहुत सहेजा,
नाज़ुक रिश्ता,
टूट जाता है....

माँ से हर बात बाँटना
पिता से छोटी-छोटी
चीजों पर ज़िद करना

ज़रा-ज़रा सी बात पर
बहन से रूठना,
भाई से झगड़ना,
परिवार के
हर सदस्य ...
हर वस्तु ...
पर अपना अधिकार
खोने लगता है

जाते हुए मुड़ कर देखना,
किसी के माँगने पर दे देना,
ख़ुशी होते ही हँस देना,
दर्द होते ही रो देना,

ये सभी आदतें
बचकानी-सी लगती हैं,

दोस्तों पर विश्वास,
प्यार पर आस्था,
जड़ों की अहमियत,
यहाँ तक कि
ईश्वर के अस्तित्व पर भी
संदेह होने लगता है ...

लेकिन घूम-फिर कर
थक-हार कर
कभी-न-कभी
जिंदगी में
फिर वो वक़्त
आता है,

जब ज़रुरत महसूस होती है
तलाशने की,
उन खोई हुई जड़ों को,
उन टूटे हुए धागों को,
उन छूटे हुए रिश्तों को ...
अपने अस्तित्व को ....

कवयित्री- कु॰ स्मिता पाण्डेय

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

22 कविताप्रेमियों का कहना है :

lalit sharma का कहना है कि -

जब ज़रुरत महसूस होती है
तलाशने की,
उन खोई हुई जड़ों को,
उन टूटे हुए धागों को,
उन छूटे हुए रिश्तों को ...
अपने अस्तित्व को ....

ये ही तो जिन्दगी है, बहुत बढि्या बधाई

"अर्श" का कहना है कि -

रिश्ते की अपनी अलग परिभाषा को परिभाषित करती ये कविता अछि लगी ... बधाई इनको मेरे तरफ से भी

अर्श

Sumita का कहना है कि -

बहुत सुंदर तरीके से भावनाओं को व्यक्त किया है। जब जरुरत महसूस होती है तलाशने की...बहुत अच्छी रचना बधाई !

Manju Gupta का कहना है कि -

बहुत सुंदर कविता लगी .बधाई

©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) का कहना है कि -

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति - जब जरूरत होती है तलाशने की ---- अपने अस्तित्व को …

Aarjav का कहना है कि -

शायद इसी को कहते है हारे को हरी नाम !!!!..................वैसे यह कविता कुछ ज्यादा समझ न आयी !

Safarchand का कहना है कि -

bahut sarahniya prayas hai. meri shubhkamna kaviyatri ko dein aaur sath mein ek request bhi karein (wahi request jo kisi ne mujhe paramarsh ke roop mein diya tha 1963 mein)---Khoob padhe...likhne se jyada padhna zaroori hai abhi is kaviyatri ke liye..Ye ladki to bahut kuch de sakti hai hindi ko
Safarchand

Safarchand का कहना है कि -

bahut sarahniya prayas hai. meri shubhkamna kaviyatri ko dein aaur sath mein ek request bhi karein (wahi request jo kisi ne mujhe paramarsh ke roop mein diya tha 1963 mein)---Khoob padhe...likhne se jyada padhna zaroori hai abhi is kaviyatri ke liye..Ye ladki to bahut kuch de sakti hai hindi ko
Safarchand

MANOJ KUMAR का कहना है कि -

आपकी मान्यता पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। जीवन की सच्चाई को सच साबित करती एक बेहतरीन रचना के लिए बधाई।

Devendra का कहना है कि -

हारे को हरी नाम नहीं सत्य को प्रणाम करती कविता।

शोभना चौरे का कहना है कि -

apne astitv ko tlashti stri ki bhavnao ko rekhankit karti sundar kavita
badhai

Sheeba Aslam Fehmi का कहना है कि -

hum sab ek tanha wajood hain aur jeeney ka matlab bichhadtey-jana bhi hai...Smita ek lamhe me kitni parten ho sakti hain purani yadon ki....aapne is reshe ko thama hai...kehti rahiye yunhi...aur tasweer me jaisi hain waisi hi khoobsoorat bani rahiyega...hamesha....waise Shair to hotey hi khoobsoorat hain!

mohammad ahsan का कहना है कि -

saraahniiya kavita, saral si, madhur si, nirmal si.......

Dipak 'Mashal' का कहना है कि -

जाने क्यों,
कब,
कैसे,
लेकिन कुछ छूट जाता है

बहुत सहेजा,
नाज़ुक रिश्ता,
टूट जाता है....

shuruaat hi itni shandar thi ki pata hi nahin chala kab kavita khatm ho gayee. laga ki jaise 2 minute me koi ghar ke aangan me khelti bachchi, kishorawastha me pahunchi aur fir badi bhi ho gayee, byah bhi di gai. sankshep me nari jeevan hai ye.

sundar kavita, shukriya aisa likhne ke liye.

आलोक उपाध्याय का कहना है कि -

दोस्तों पर विश्वास,
प्यार पर आस्था,
जड़ों की अहमियत,
यहाँ तक कि
ईश्वर के अस्तित्व पर भी
संदेह होने लगता है ...

बहुत खूब ....जिंदगी की हकीक़त को बखूबी बयां किया है आपने
देर से ही सही ..बधाई स्वीकारें ....

Shamikh Faraz का कहना है कि -

बहुत सुन्दर शब्दों से पिरोया है कविता को

जाने क्यों,
कब,
कैसे,
लेकिन कुछ छूट जाता है

बहुत सहेजा,
नाज़ुक रिश्ता,
टूट जाता है....

karma का कहना है कि -

दोस्तों पर विश्वास,
प्यार पर आस्था,
जड़ों की अहमियत,
यहाँ तक कि
ईश्वर के अस्तित्व पर भी
संदेह होने लगता है ...


रिश्ते इसे ही कहते है

बेहतरीन

kashi का कहना है कि -

जब ज़रुरत महसूस होती है
तलाशने की,
उन खोई हुई जड़ों को,
उन टूटे हुए धागों को,
उन छूटे हुए रिश्तों को ...
अपने अस्तित्व को ....

kya aapki soch samuch aisi hai ya ye bas ek kivita hai. yadi aap sachmuch aisa sochti hain to phir 1baar dhyan se sochiyega please.

Unknown का कहना है कि -

toms shoes at
skechers shoes cute!
cheap nike shoes special
bills jerseys go
toms outlet updating
michael kors handbags We
salomon boots this
lebron james shoes counting
louis vuitton sacs and
kansas city chiefs jerseys weekly

jeje का कहना है कि -

adidas nmd
adidas stan smith men
michael kors outlet online
adidas yeezy boost
yeezys
yeezy boost 350 v2
air max
adidas tubular x
michael kors factory outlet
nike zoom

aaa kitty20101122 का कहना है कि -

adidas nmd
nike air huarache
retro jordans
fitflops clearance
brady jersey
led shoes for kids
ferragamo belt
adidas ultra boost
yeezy
chrome hearts

adidas nmd का कहना है कि -

ugg boots
golden state warriors jerseys
louboutin shoes
cheap ugg boots
oakley sunglasses
ugg boots
ralph lauren outlet
coach outlet store online
nike tn
ray ban sunglasses outlet

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)