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Thursday, October 08, 2009

पूजा


सूरज की
पहली रश्मि को
न्यौतता,
बांस के
सिरे पर बंधा,
तिनकों का झाडू,
दिनान्कुरण पर
सशब्द,
गली में लहराता
एक दिन
दो नन्हे हाथों को
बोलते सुना,
"गंदा झाडू
भारी झाडू
मै ना पकडू
तिनका झाडू"
रख तर्जनी
होंटों पर
बोली माँ,
ना बेटा
झाडू नहीं
पतवार है ये
हमारी नैया
खेता है ,
मोरपंख हो
या तिनका
सब में
कान्हा
रहता है |

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9 कविताप्रेमियों का कहना है :

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

बेहतरीन भाव..सुंदर कविता...
बधाई विनय जी बढ़िया कविता लगी..

©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) का कहना है कि -

मोर पंख हो या तिनका, सबमें कान्हा रहता है । बहुत खूब । बधाई ।

neelam का कहना है कि -

विनय जी ,
आपकी कविता पढ़ते ही विनोबा जी की एक उक्ति याद आ गयी ,
मेहतर माने क्या मेहतर जाने तो महत्तर ,

rachana का कहना है कि -

विनय जी क्या खूब लिखा है अंत तो बहुत अच्छा है सब में कान्हा रहता है
बधाई
रचना

MANOJ KUMAR का कहना है कि -

ताजा हवा के एक झोंके समान कविता, एक जिज्ञासा जगाती है।

आलोक उपाध्याय का कहना है कि -

रख तर्जनी
होंटों पर
बोली माँ,
ना बेटा
झाडू नहीं
पतवार है ये
हमारी नैया
खेता है ,
मोरपंख हो
या तिनका
सब में
कान्हा
रहता है |
बेहतर और बिलकुल जिवंत रचना

"मोरपंख हो
या तिनका
सब में
कान्हा
रहता है | "

एक सबक़ है आप कि रचना में
बधाई स्वीकारें

Devendra का कहना है कि -

--'मोरपंख हो या तिनका
सबमें कान्हा रहता है।'
--आप जिस कंजूसी से शब्दों के मोती चुनते हैं
और जिस सफाई से पूरा दर्शन उड़ेल देते हैं
उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाय वह कम है।

Anonymous का कहना है कि -

विनय,
शीर्षक आम है और कविता भी खास नहीं है |
कविता और शीर्षक के मध्य जो कविता है वह कमाल की है | एक बार तुमने ही ने कही लिखा था " कविता शब्दों में नहीं होती कविता तो दो शब्दों के बीच रिक्त स्थान में होती है "
tumhari अपनी बात सार्थक करती एक पूर्ण कविता है साधुवाद
शुभम,
बुद्धिसागर

Shamikh Faraz का कहना है कि -

एक भावपूर्ण कविता जिसको आपने कई जगह पर शब्दों से कवितामई बना दिया.

बांस के
सिरे पर बंधा,
तिनकों का झाडू

इसी तरह

रख तर्जनी
होंटों पर
बोली माँ,
ना बेटा
झाडू नहीं
पतवार है ये
हमारी नैया
खेता है ,
मोरपंख हो
या तिनका
सब में
कान्हा
रहता है |

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)