फटाफट (25 नई पोस्ट):

Wednesday, September 02, 2009

गाँव नही अब हमको जाना-श्याम सखा




गाँव नही अब
हमको जाना

कहकर हैं,चुप
बैठे
नाना

प्रीत-प्यार की
बात कहां

कौन पूछता

जात वहां


खत्म हुआ
सब
ताना-बाना
गाँव नही अब हमको जाना...
कोयल कागा
मौन हुए

संबंध सभी तो

गौण हुए


और सुनोगे
मेरा गाना

गाँव नही अब हमको जाना.........

बूआ-काका
नहीं-वहां

गीदड़-भभकी
हुआं-हुआं


खूब-भला
तुमने पहचाना
गाँव नही अब हमको जाना.........

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

16 कविताप्रेमियों का कहना है :

Anonymous का कहना है कि -

gaon ke badalte pridrshy par lubhvna geet

ramesh singh

ओम आर्य का कहना है कि -

बहुत ही खुब्सूरत भाव और रचना...

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

खत्म हुआ
सब ताना-बाना
गाँव नही अब हमको जाना...
कोयल कागा
मौन हुए
संबंध सभी तो
गौण हुए
बहुत खुब्सूरत रचना!!!

seema gupta का कहना है कि -

बूआ-काका
नहीं-वहां
गीदड़-भभकी
हुआं-हुआं

खूब-भला
तुमने पहचाना
गाँव नही अब हमको जाना.........
कभी गावं जाने को मन कितना उतावला रहता था......कविता गावं के आज के परिवेश को सार्थक करती लगी सुन्दर

regards

anonymous no. 2 का कहना है कि -

thanks god, some thing pleasantly different this time.

Anonymous का कहना है कि -

गाँव के बदलता स्वरूप का वर्णन किया है, बहुत अच्छा बहुत बहुत बधाई

विमल कुमार हेडा

shanno का कहना है कि -

श्याम जी,
प्यारी सी कविता है. बधाई! सोचती हूँ मैं:

गाँव ना जान के
ढूँढत बहुत बहाना
अब कितने चतुर
हुइ गये हैं नाना.

Manju Gupta का कहना है कि -

'गाँव नही अब हमको जाना कहकर हैं,चुप बैठे नाना प्रीत-प्यार की बात कहां .' ह्रदय को स्पर्श करती बहुत अच्छी पंक्तियाँ हैं . हमारी संस्कृति ,सामाजिक मूल्यों के विघटन को दर्शाती है . बधाई .

Apoorv का कहना है कि -

तभी आँगन मे कौवे आ कर अतिथि-आगमन की सूचना नही देते..शहरों के संबंध-ह्रास से गाँव अछूते नही रहे..बहुत सरल और उम्दा रचना!

तपन शर्मा का कहना है कि -

सरल शब्दों में रची गई रचना...

कोयल कागा
मौन हुए
संबंध सभी तो
गौण हुए

तपन शर्मा का कहना है कि -

सरल शब्दों में रची गई रचना...

कोयल कागा
मौन हुए
संबंध सभी तो
गौण हुए

Deepali Sangwan का कहना है कि -

गाँव के बदलते हालात को दर्शाती सटीक रचना, सच ही कहा, अब वहां कुछ भी नहीं बचा. दिल के बहुत करीब लगी आपकी रचना, अपने गाँव की याद दिला गई मुझे. शुक्रिया

--
Regards
-Deep

sada का कहना है कि -

गहरे भाव लिये सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति ।

Shamikh Faraz का कहना है कि -

भाव सुन्दर है श्याम जी के.

गाँव नही अब
हमको जाना
कहकर हैं,चुप
बैठे नाना

manu का कहना है कि -

कोयल कागा
मौन हुए
संबंध सभी तो
गौण हुए

kyaa baat hai shyaam ji....
kamaal likhaa hai..

SUNIL DOGRA जालि‍म का कहना है कि -

गाँव... व्यंग्य है या व्यथा

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)