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Wednesday, July 22, 2009

दुनिया भर के गम थे-गज़ल श्याम



दुनिया भर के गम थे
और अकेले हम थे

साथ न कैसे देते
गम भी मेरे गम थे

जख्मो की बस्ती से
गायब क्यों मरहम थे

सपने क्या भंग हुए
दिल दरहम-बरहम थे

टीस बहुत थी सुर में
बस स्वर ही मद्धम थे

आंखे तो गीली थीं
सूखे मन मौसम थे

देख तुम्हे साथ मेरे
यार हुए बेदम थे

श्याम,संवरते कैसे
सब किस्मत के ख़म थे

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15 कविताप्रेमियों का कहना है :

Disha का कहना है कि -

सुंदर रचना व अच्छे भावों का संगम

sada का कहना है कि -

जख्मो की बस्ती से
गायब क्यों मरहम थे

बहुत ही अच्‍छा लिखा है।

Mrs. Asha Joglekar का कहना है कि -

आंखे तो गीली थीं
सूखे मन मौसम थे ।
बेहतरीन ।

ritu का कहना है कि -

अच्छी ग़ज़ल लगी आप की ..शुद्ध हिंदी और उर्दू दोनों के अल्फाज़ हैं ...लेकिन कहीं कुछ खटक नहीं रहा है ..

विश्व दीपक ’तन्हा’ का कहना है कि -

श्याम,संवरते कैसे
सब किस्मत के ख़म थे

गूढ बात कह गए हैं इस शेर में।
मज़ा आ गया।

बधाई स्वीकारें।

-विश्व दीपक

ओम आर्य का कहना है कि -

waah shyam ji gajab ki rachana lagi
.......aapke isi andaj ke mai kaayal hu

Manju Gupta का कहना है कि -

मधुर और छोटी भावपूर्ण रचना के लिए बधाई ..

रंजना का कहना है कि -

Waah !!! Bahut hi sundar gazal !!Badhai !!

PC Godiyal का कहना है कि -

बढिया कृति, मगर कुछ खटका कि जब साथ वो थे तो फिर क्यों बे-दम थे ?

csmann का कहना है कि -

khoobsoorat koshish hai;behr thori tedhi chuni hai aap ne,lekin khoob nibhaayaii hai
faal-fa'al-faal-fa'al
behtar hota agar yoon hoti
faa'ilaatun-faa'ilun ya aisi koii

venus kesari का कहना है कि -

श्याम जी आपकी गजलों के कायल तो हम पहले से ही है
आज तो आपने दिल लूट लिया, छोटी बहर में आपने काफिये का इतना सुन्दर प्रयोग किया है की बस क्या कहे, अल्फाज़ कम पड़ रहे हैं गजल की तारीफ के लिए

वाह वाह क्या बात है

वीनस केसरी

M VERMA का कहना है कि -

बहुत उम्दा गजल
वाह्

Shamikh Faraz का कहना है कि -

श्याम जी क्या खूब बात कही है आपने पहले शेअर में

दुनिया भर के गम थे
और अकेले हम थे

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

lajawab

Anonymous का कहना है कि -

दुनिया भर के गम थे
और अकेले हम थे
इतने साथियों गमों के रहते आप अकेले कहां रह पाए श्याम जी
सुन्दर गज़ल बधाई
शिखा

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