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Thursday, May 07, 2009

वह सुबह कभी तो आयेगी






नेह निर्झर
सूख चुका अब
जन अरण्य
उब चुका अब
अब ना मचलता
लहरों के संग
अब ना संवरता
मौसम के संग
नही बहलता
प्रेम गीत से
अविचल हर
हार जीत से
कोकिल कण्ठ
कर्कस क्रन्दन
रिक्त हदय
यांत्रिक स्पन्दन
श्रृध्दा धाम की
शाम उदास
आरती गौण
नगाडे खास
राम तुम्हारे
द्वार लाचार
रावण विराजे
बैखौफ दरबार
वक्र भाल
कदम बेताल
हाल बेहाल
पेट पाताल
उंगली पर तिलक
मुख पर चमक
मत रमत
चयन युघ्द
रण शरण
निरीह रियाया
कभी तो जीत पायेगी
आर ही आर
लडी जा रही लडाई
कभी तो पार जायेगी
सत्ता स्वार्थ का
तिमिर चीर
वह सुबह
कभी तो आयेगी

*
विनय के जोशी

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14 कविताप्रेमियों का कहना है :

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

क्या कहूँ कुछ कहा नहीं जाए...

mohammad ahsan का कहना है कि -

प्रशंसनीय

विनय का कहना है कि -

अच्छी कविता है।

---
चाँद, बादल और शामगुलाबी कोंपलें

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

अच्छी रचना है |

अवनीश तिवारी

manu का कहना है कि -

बहुत सुंदर विनय जी,,,,,
अच्छा प्रवाह,,,

"अर्श" का कहना है कि -

bahot hi prashansaniya kavita hai prawaah bhi khoob rahi...badhaayee

arsh

M.A.Sharma "सेहर" का कहना है कि -

सुबह कभी तो आयेगी...सभी को इंतज़ार है विनय जी .
सोचने को मजबूर करती सुन्दर अभिव्यक्ति !!

मुकेश कुमार तिवारी का कहना है कि -

विनय जी,

बस उस सुबह के इंतजार में हम भी आप के साथ है।

शब्द गंगा के भागीरथ को और क्या लिखा जाये टिप्पणी में।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

Priya का कहना है कि -

wo subah jaroor aayegi......bes kisi subhash, bhagat singh & yug pravart ki pahchaan ho jaye ya phir hum me se koi.......sankalp le aagey badh jaye

rachana का कहना है कि -

बहुत ही सुंदर शब्दों के साथ अच्छी कविता
सादर
रचना

rachana का कहना है कि -

बहुत ही सुंदर शब्दों के साथ अच्छी कविता
सादर
रचना

Dr. Smt. ajit gupta का कहना है कि -

विनयजी

बहुत ही श्रेष्‍ठ रचना। बधाई।

neelam का कहना है कि -

राम तुम्हारे
द्वार लाचार
रावण विराजे
बैखौफ दरबार
वक्र भाल
कदम बेताल

ek sukhad aavahan ,wo subah kabhi to aayegi

रश्मि प्रभा... का कहना है कि -

अवश्य आएगी वह सुबह......निःसंदेह ये ख्याल लेकर आयेंगे

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