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Saturday, May 16, 2009

अनोखी भाषा !


मृत्यु की दहलीज़ तक होती है माँ ,

जब नई ज़िन्दगी

जन्म लेने को आतुर होती है !

एक मासूम रुदन,

माँ s s s s s से स्वर में,

संजीवनी बन

कानों से दिल तक उतरती है ........

माँ के आंसुओं से मंत्रोच्चार होता है,

आशीष बन बरसता है,

खून की एक-एक बूंद ,

दूध बन जाती है,

आँचल में सुरक्षा की शक्ति

और मन में जीने की दृढ़ता होती है...........

एक मासूम ज़िन्दगी के साथ

माँ भी जन्म लेती है,

नई ज़िन्दगी,

नए रूप में,

दोनों साथ-साथ जीते हैं !

आहट,करवट,खामोशी,उद्विग्नता

माँ पहचान लेती है,

सारथी बन

जीवन के अर्थ देती है....

इस रिश्ते को कह सकते हो ' त्रिवेणी ',

बच्चे और माँ के मध्य

एहसासों की धारा

सरस्वती-सी बहती है...

गर्भनाल की भाषा

बड़ी अनोखी होती है !!!

--रश्मि प्रभा

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13 कविताप्रेमियों का कहना है :

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

subdar rachnaa

Avaneesh

sangeeta का कहना है कि -

rashmi ji,

bachche ko janm dete huye maa bhi nayi zindagi paati hai usake ehsaason ko bahut sundar shabdon men chitarit kiya hai..
sundar abhivyakti ke liye badhai

Jyotsna Pandey का कहना है कि -

दीदी प्रणाम!
ये सभी के लिए बोलती हुई कविता है ............
शायद कहीं मैं भी हूँ ,यहाँ .
क्योंकि मैं भी माँ हूँ ,और बेटी भी ..............

vandana का कहना है कि -

sach maa aur bachche ke beech anokha ahsaas hi hota hai.......jo sirf ek maa hi samajhti hai aur bachcha maa ke ahsaas ko.
bahut badhiya.

shanno का कहना है कि -

रश्मि जी,
बहुत अच्छे और सच्चे भाव हैं यह. धन्यबाद.

संत शर्मा का कहना है कि -

सच्चे और स्वाभाविक भावों की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति

ρяєєтι का कहना है कि -

बच्चे और माँ के मध्य एहसासों की धारा ...
यह एहसास एक् "माँ" ही समझ सकती है . Ilu

manu का कहना है कि -

रश्मि जी,
मत पूछियेगा के पढ़ते पढ़ते कैसा लगा ,,,,,,

गर्भ नाल की भाषा बड़ी अनोखी होती है,,,,,


कमाल रश्मि जी,,,,,कमाल,,,,
पहले आपको बधाई दी थी वाहक बन्ने की,,,
आज युग्म को बधाई देता हूँ,,,,,,
जो उन्हें आप जैसी कवियित्री मिली,,,

sangeeta sethi का कहना है कि -

रश्मि जी
अनोखी भाषा अनोखी ही है | गर्भ नाल की भाषा वाकई अनोखी होती है |
संगीता सेठी

मुकेश कुमार तिवारी का कहना है कि -

रश्मिप्रभा जी,

माँ और बच्चे के रिश्ते को एक नई पहचान देती कविता दिल को भा गई और शब्द-संयोजना ने प्रस्तुति को एक नया आयाम दिया।

दिल से बधाईयाँ।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता का कहना है कि -

आदरणीय रशिम जी,
मॉं और नवजीवन के मध्‍य का अविस्‍मणीय बोधन, बधाई

Shailesh Jamloki का कहना है कि -

रश्मि जी,
बस इतना कहूँगा...मन मोह लिया आपने मेरा..

शुकिया.. इतनी सुन्दर रचना पढने का मौका देने के लिए,..

सादर
शैलेश

kishor kumar khorendra का कहना है कि -

बच्चे और माँ के मध्य

एहसासों की धारा

सरस्वती-सी बहती है...

गर्भनाल की भाषा

बड़ी अनोखी होती है !!!
vah sundar

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