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Wednesday, April 08, 2009

चुप रहूँगा तो अनकही होगी


चुप रहूँगा तो अनकही होगी
गर कहूँगा तो दिल्लगी होगी

या होगा बुझाने को तब कौ
आग पानी में जब लगी होगी

सो रहा दिन है तानकर चादर
रात तो सारी शब जगी होगी

मर गया मैं तो कौन पूछेगा
जिन्दगी मिस्ले-खुदकुशी होगी

बम गिरेंगे कभी जो धरती पर
शोर के बाद खामुशी होगी

मौत पीछा करेगी निश्चय ही
साथ गर तेरे जि़न्दगी होगी

दिल रकीबों के जल गए होंगे
तुझसे जब भी नजर लड़ी होगी

प्यास जब जाएगी गुजर हद से
होगा सागर न फिर नदी होगी

जब भी देखेंगे 'श्याम’ की मैयत
दुश्मनों को बहुत खुशी होगी

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन
लाल रंग वाली मात्राएं गिरेंगी[ कुछ मित्रों के अनुरोध पर चिह्नित]


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10 कविताप्रेमियों का कहना है :

मुकेश कुमार तिवारी का कहना है कि -

श्याम जी,

एक ही ग़जल में इतने सारे भाव. बहुत अच्छी रचना. मुझे इन लाईनों ने आपका मुरीद कर दिया :-
मौत पीछा करेगी निश्चय ही
साथ गर तेरे जि़न्दगी होगी

और इन पंक्तियों ने गुजरे जमाने की याद ताजा करा दी, जब की सारी टोली में होड़ मची रहती थी कि वो देखेंगी तो किसकी ओर? फिर दूसरों के जलने-भुनने के किस्से :-

दिल रकीबों के जल गए होंगे
तुझसे जब भी नजर लड़ी होगी

सच कहूँ एक भले इंसान के लिये यह ठीक नही लगा कि जो शख्स गीत कहता है / गजल कहता है उसका भी कोई दुश्मन होगा :-

जब भी देखेंगे 'श्याम’ की मैयत
दुश्मनों को बहुत खुशी होगी

अच्छे अशआर थे पूरी गजल के, लुत्फ जी भर के लिया.


मुकेश कुमार तिवारी

रज़िया "राज़" का कहना है कि -

चुप रहूँगा तो अनकही होगी
गर कहूँगा तो दिल्लगी होगी
लाजवाब। वाह।

संगीता पुरी का कहना है कि -

बहुत सुंदर भाव हैं ... अच्‍छी रचना है।

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

लाजवाब।

yash का कहना है कि -

आया होगा बुझाने को तब कौन
आग पानी में जब लगी होगी

acchaa lga aapake sher padh kr
yash

तपन शर्मा का कहना है कि -

maja aa gaya shyam ji...

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

ये दो शे'र ख़ासतौर पर पसंद आये

आया होगा बुझाने को तब कौन
आग पानी में जब लगी होगी

प्यास जब जाएगी गुजर हद से
होगा सागर न फिर नदी होगी

manu का कहना है कि -

सुंदर गजल श्याम जी,
बल्कि बहुत सुंदर,,,
बस यही कहूंगा ,,,,,,और कुछ नहीं ,
,,एक जगह पर कलर मिस्टेक है,,,,,
पर बाई दे वे,,,,,,,,,,,,

श्याम सखा‘श्याम ' का कहना है कि -

कौन
प्रिय मनु !
कौन के न का रंग नीला इसलिये है कि यहां मात्रा गिरी नहीं है-किसी भी मिसरे के अन्त में एक लघु मात्रा अगर बहर की मात्राओं से फ़ालतू भी है तो भी गज़ल छंद में यह छूट मान्य है। इसी कारण से इसे नीले रंग मे चिह्नित किया था कि लोग इसका अर्थ पूछें-आपने अपने अंदाज में पूछ लिया शुक्रिया
श्याम सखा‘श्याम

manu का कहना है कि -

aadarniya shyaam ji,
iski baat nahi kar rahaa,,,,
ye to maaloom hai,,,
COLOUR mein galti aur hi kahi hai,,,,

maine abhi kuchh poochha nahi hai,,,

bataayaa hai,,,,

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