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Thursday, March 19, 2009

पलकों पर ठहरी है रात की खुशबू





पलकों पर ठहरी है रात की खुशबू
अनकही अधूरी हर बात की खुशबू

साँसों की थिरकन पर चूड़ी का तरन्नुम
माटी के जिस्म में बरसात की खुशबू

पतझड़ पलट गया दहलीज तक आकर
जीत गई अंकुरित ज़ज्बात की खुशबू

अहसास ऐ मुहब्बत परत परत मर गया
जिंदा रही पहली मुलाकात की खुशबू

पलकें झुका के कैफियत कबूल की मगर
ज़वाबों से आती रही सवालात की खुशबू

जुल्फों की कैद में कुछ अरसा ही रहे
उम्र भर आती रही हवालात की खुशबू

कली रो पड़ी हूर के गजरे में संवर कर
भूल ना पाई पडौसी पात की खुशबू

लापता वियाकरण अश'आर से मगर
हर लफ्ज से है "विशेष" बात की खुशबू

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12 कविताप्रेमियों का कहना है :

रंजना [रंजू भाटिया] का कहना है कि -

पलकें झुका के कैफियत कबूल की मगर
ज़वाबों से आती रही सवालात की खुशबू

बहुत सुन्दर लिखा है आपने

अनिल कान्त : का कहना है कि -

दिल खुश हो गया आपकी ये रचना पढ़ कर ...सचमुच बहुत खूबसूरत लिखा है

प्रकाश बादल का कहना है कि -

वाह वाह सहज़ और मीठी गज़ल।

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

खुशबू जेहन को ताजगी दे रही है. महकते रहिये, महकते रहिये. खुशबू बिना व्याकरण के नहीं होती. जाने-अनजाने, चाहे-अनचाहे व्याकरण की खुशबू हर कविता में होती ही है...कहीं कम, कहीं ज़ियादः.

manu का कहना है कि -

सुंदर लिखा है विनय जी,
पहले ग़ज़ल की तरह लेने की कोशिश की थी मगर नहीं आयी,,,,
फिर दोबारा भाव पक्ष पर ध्यान देकर पढा तो बेहद आनंद आया,,,
बल्कि आपकी इन खुशबुओं के साथ और भी कई खुशबुयें चली आईं,,,,

मन खुश हो गया,,,,,,,,,,

Harihar का कहना है कि -

बहुत सुन्दर गजल विनयजी !

पलकें झुका के कैफियत कबूल की मगर
ज़वाबों से आती रही सवालात की खुशबू

neelam का कहना है कि -

पतझड़ पलट गया दहलीज तक आकर
जीत गई अंकुरित ज़ज्बात की खुशबू

vinay ji sabse jyada dil ko choone
wala sher aapki bagiya me se chun liya sabne ,to humne doosra wala le liya hai.
shaandar lekhan aur lekhni ko pranaam .

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

सुंदर, ताजगी भरी रचना के लिए बधाई |

अवनीश तिवारी

manu का कहना है कि -

thank god,,,,,,
bade miyaan यहाँ नहीं हैं,,
विनय जी,
आप भाग्यशाली हैं के आपकी कविता अभी हिंदी उर्दू विवाद से बची हुई है,,,,
मुझे यहाँ भी आना पडा चेक करने के लिए,,,,

शोभित जैन का कहना है कि -

जुल्फों की कैद में कुछ अरसा ही रहे
उम्र भर आती रही हवालात की खुशबू...
हर शेर लाजबाब है....

M.A.Sharma "सेहर" का कहना है कि -

साँसों की थिरकन पर चूड़ी का तरन्नुम
माटी के जिस्म में बरसात की खुशबू..


माटी की सोंधी खुशबू की ही तरह
मन को भावविभोर कर गयी ये सुन्दर ग़ज़ल.

बधाई इस खूबसूरत रचना की विनय जी

सादर !!!

प्रवीण पराशर का कहना है कि -

साँसों की थिरकन पर चूड़ी का तरन्नुम
माटी के जिस्म में बरसात की खुशबू



अहसास ऐ मुहब्बत परत परत मर गया
जिंदा रही पहली मुलाकात की खुशबू

पलकें झुका के कैफियत कबूल की मगर
ज़वाबों से आती रही सवालात की खुशबू

जुल्फों की कैद में कुछ अरसा ही रहे
उम्र भर आती रही हवालात की खुशबू

kaya khoob likha sir ji wahaaa!!!

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