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Friday, November 28, 2008

जब बिछी लाशें विदा कर दी गईं


क्यों धुआं बस्ती में भरने है लगा
यक-ब-यक हर शख्स डरने है लगा

इक परिंदा ता-फलक पहुँचा मगर
जाने क्यों नीचे उतरने है लगा

नौजवां की आँख में सपने थे कल,
मौत बन कर अब विचरने है लगा

खूबसूरत शख्स था वो लाजवाब
अब कफ़न से वो सँवरने है लगा

जब बिछी लाशें विदा कर दी गईं
शह्र का मौसम सुधरने है लगा

रात देखा खूबसूरत आबशार
अश्क बन कर अब बिखरने है लगा

शब्दार्थः- यक-ब-यक- अचानक, एकाएक, ता-फ़लक़- आसमान तक, आकाश तक, आबशार- पहाड़ी सोता, जलप्रपात

ग़ज़लगो- प्रेमचंद सहजवाला

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10 कविताप्रेमियों का कहना है :

manu का कहना है कि -

क्या नक्शा उतारा है कल के हादसे का... कमाल है .
काश वो भी समझें
"मासूम हैं बहोत तेरे पाले हुए बन्दे,
हैं ज़हर नाक वो जो तुझे पाल रहे हैं.."
"बे-तक्ख्ल्लुस"

neelam का कहना है कि -

premchand ji sadhuvaad ,sirf saadhuvaad aapko

सीमा सचदेव का कहना है कि -

इन हादसों से मन इतना आहात है की कुछ कहने को शब्द नही | बस आंखे नम है

sunil kumar sonu का कहना है कि -

jo bach gaye unhe nav yauvan dhan mila.
jo chale gye unhe mahaj 3gaj kafan mila.

sunil kumar sonu का कहना है कि -

ek hadsa jo jindagi ke karib tha,
maut manke use ura le gya koi.

तपन शर्मा का कहना है कि -

रात देखा खूबसूरत आबशार
अश्क बन कर अब बिखरने है लगा..

जो चले गये उन्हें श्रद्धांजलि....

MUFLIS का कहना है कि -
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MUFLIS का कहना है कि -

...waqt ki nzaaqat ko mehsoos karte hue ek pur.asar ghazal kahi hai aapne. maiN sabhi paathakoN ki taraf se aapke khyalaat ka yooN anumodan kartaa hooN...
"zindgi pr maut ki ye saazisheiN
zehno.dil mei khauf bharne hai lga

muskraati zindgi ke shehr meiN
hr qadam ik darr pasarne hai lga

jism ghaayal aur laasheiN bekafan
khoon aankho mei utarne hai lga

ae khuda, ab hoN tumhari rehmateiN
iltejaa hr shakhs karne hai lga"

AAMEEN ---MUFLIS---
(totally inspired by you)

rachana का कहना है कि -

क्या कहें दर्द शब्द नही आंसू बनगए है और अब आंसू भी नाकाफी लगने लगे है एसे में आप की सुंदर ग़ज़ल पढ़ दिल भर आया
सादर
रचना

संजीव सलिल का कहना है कि -

धुआं कितना भी घना हो
रौशनी बुझने न देंगे
नहीं शव से हम डरेंगे
शिवों को मिटने न देंगे
शिवा है हिम्मत हमारी
कोशिशें घटने न देंगे
मौत को हम जिंदगी का
मर्सिया पढ़ने न देंगे
गोलियाँ कितनी चलाओ
फोड़ लो बम भी अनेकों
अडिग है आशा हमारी
दिलों को फटने न देंगे
संजिव्सलिल.ब्लागस्पाट.कॉम
संजिव्सलिल.ब्लॉग.सीओ.इन

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