छ्पाक.....
नदी चूमने
आतुर शाखा से
कूदा एक बालक
जल में
फ़िर एक और
छपाक
एक और ...
तन तरिणी
मन महिसागर
आडे तिरछे
उलटे सीधे
शीर्षासन
कभी उनिंदे
होड लगा
उस पार लपकते
पल में सतह
पल में तल
भद्र एक
वहीं खडे थे
चक्षु द्वय
उन पर गडे थे
तर्जनी से
उन्हे बुलाया
क्या ये
छप - छप
करते हो
क्यूं ऊर्जा जाया
करते हो
अनुशासन में
रहना सीखो
व्याकरण में तैरों बेटा
क्यूं विधा अपमानित
करते हो
पहले जानो
ब्रेस्टस्ट्रोक और
बटरफ़्लाई क्या है
किसे कहते है डाईविंग और
फ़्रीस्टाईल क्या है
जलक्रीडा के
हितानुरागी
ज्ञान बाँट कद्दावर हुए
नजर गडाये बालू पर
बालक जल से बाहर हुए
अब हर शाम उदास तीनों
सरिता तीरे रहते है
तैरने की ललक बहुत पर
स्वलघुभ्रमी
जल में उतरने से डरते है ।








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13 कविताप्रेमियों का कहना है :
सुंदर है पर और रोचक हो सकती थी,शब्द ढूंढें मत स्वयम झरने देन निर्झर की तरह ,भावः व् चित्रण सटीक है ,बधाई ,अनाम
शब्द चयन बहुत अच्छा लेकिन बात जमी नही | आपने कविता के माध्यम से एक चित्र अवश्य खीचा लेकिन उतना मजा नही आया.......सीमा सचदेव
जोशी जी ने बहुत अच्छा चित्रण अपनी रचना से किया,साथ ही शुद्ध हिन्दी के शब्दों से कविता में बहुत सुन्दरता या यूँ कहे के चित्रण में जान आ गई,कुछ बेचारे भोले-भाले बालक जो अपने बचपन को अपने ही अंदाज से खुलकर जी रहे थे उन्हें बड़े-२ शब्दों के नीचे दबा दिया,..........बहुत अच्छी रचना! बधाई!
सरल और सुंदर कृति
बच्चे कितने खुश थे पर इस उपदेश ने उन मासूमो की खुशियाँ छीन लीं .
बहुत अच्छा लिखा है और सच मानिये असा मेने कभी कभी अपनी बेटी के साथ महसूस भी किया है वो आप ने हिसाब से कुछ कर रही होती है यदि में उस को कुछ अच्छा तरीका बताती हूँ तो करती तो है पर उतने मजे से नही
सादर
रचना
vinay ji,aapse hamesha achhe ki ummid rahti hai,aap aksar ummid par khare bhi utarte hain,par isbaar chuk ho gayi.
ALOK SINGH "SAHIL"
अच्छी कविता है
बच्चो मे बचपना होना अच्छा लगता है उन मासूमो को क्यो तकनीकि चीजो मे उलझाया जाए
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aisi kavita hindyugm per?
जोशी जी
बराबर लिखा कई प्रतिभाये अनावश्यक आलोचनाओं के कारन आगे नही आपाती बहुत सरल तरीके से बहुत बड़ी बात batai | अच्छा लिखातरे है जारी रहे
sundar
Ishara kidhar hai Janaab?
:-)
अच्छी कविता विनय जी
अच्छी लगी - कविता भी सीख भी!
भद्र एक
वहीं खडे थे
चक्षु द्वय
उन पर गडे थे
तर्जनी से
उन्हे बुलाया
क्या ये
छप - छप
करते हो
क्यूं ऊर्जा जाया
करते हो
अनुशासन में
रहना सीखो
व्याकरण में तैरों बेटा
behad sateek baat hai ,kabhi kabhi hum bachhon ko niyamon me
baandhkar unki jindgi ke sabse bade khalnaayak ban jaate hain .
inhi bhadra purush ki bhaani
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