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Friday, September 12, 2008

विष्णु प्रभाकर का स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा है



९५ से भी अधिक आयु के वरिष्ठम साहित्यकार विष्णु प्रभाकर का स्वास्थ्य काफी समय से ठीक नहीं है। कुछ साहित्याकर बंधु उनसे मिलने गये। जो व्यक्तिगत तौर पर विष्णु प्रभाकर से मिल नहीं सकते, उनके लिए उनका हाल-चाल, उनकी तस्वीरें खींचकर और वीडियो भी शूटकर के लाये हैं।


'धरती अब भी घूम रही है' जैसी कालजयी कहानियों तथा 'आवारा मसीहा' जैसी सशक्त कृतियों के रचयिता विष्णु प्रभाकर जी इन दिनों अस्वस्थता से संघर्ष कर रहे हैं। विष्णु जी लगभग 96 वर्ष के हो गए हैं व कुछ वर्ष पूर्व उन्हें भारत सरकार ने 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया था। उनके उपन्यास 'अर्धनारीश्वर' पर उन्हें 'साहित्य अकादेमी' पुरस्कार भी दिया गया था। दिनांक ९ सितम्बर 'आनंदम' संस्था की और से उस के अध्यक्ष सुपरिचित साहित्यकार बलदेव वंशी तथा सचिव जगदीश रावतानी, कथाकार प्रेमचंद सहजवालातरुण रावतानी विष्णु जी का स्वास्थय पूछने तथा शुभकामना देने उनके निवास स्थान पर गए। विष्णु जी के सुपुत्र अतुल प्रभाकर ने बताया की विष्णु जी का स्वास्थय काफ़ी बिगड़ चुका है और वे ठीक से बोल पाने में भी असमर्थ हैं। अतुल प्रभाकर ने सभी अतिथियों का पूरा आदर-सत्कार किया। विष्णु जी ने कुछ अंतराल पश्चात आँखें खोली तो उन्होंने तुंरत आगंतुक साहित्य प्रेमियों को पहचान लिया। अपने स्वास्थ्य के विषय में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे अब ९६ वर्ष के हो चले हैं। इससे आगे वे कुछ बोल नहीं पाये। तत्पश्चात आँखें बंद कर ली। उनके सुपुत्र ने बताया कि वे आँखें मूँद कर समस्त संसार की सैर में खो जाते हैं। चेतना लौटने पर हमें बतलाते हैं कि वे कहाँ-कहाँ घूम आए। श्री रावतानी द्वारा पूछने पर कि क्या वे भी पिता से प्रेरित हो कर लेखन कार्य करते हैं, उनके सुपुत्र ने कहा कि वे अधिक नहीं लिख पाते। पर कभी-कभार कुछ कवितायें और अपने पिता के विषय में कुछ पत्रिकाओं के लिए लेख लिखते हैं। प्रेमचंद सहजवाला ने भी उनके सुपुत्र से यह पूछा कि एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार का सुपुत्र होने के नाते उन्हें कैसा महसूस होता है। इस के उत्तर में अतुल जी ने कहा कि विष्णु जी सब से पहले उनके पिता हैं तथा एक पिता होने के नाते उन्होंने सभी परिवारजनों को अपार प्रेम दिया। बलदेव वंशी जी से जब सहजवाला ने पूछा कि विष्णु जी के साहित्य के विषय में कुछ कहें तब वंशी जी ने एक महत्त्वपूर्ण बात कही कि आज के लेखक घर बैठे अखबार पत्रिकाओं से प्रेरणा ले कर ही लिखते हैं, जबकि विष्णु जी जैसे प्रतिबद्ध साहित्यकारों ने कई यात्राएँ की व असंख्य लोगों से मिल कर अपनी मौलिक दृष्टि बनाई। विष्णु जी जैसे साहित्य के महास्तंभ के विषय में सोच कर बलदेव वंशी जी की आँखें नम हो गईं। परिवारजनों का आतिथ्य पा कर व सब को धन्यवाद करते हुए 'आनंदम' के उक्त सदस्यों ने सब से विदा ली।


जगदीश रावतानी, विष्णु प्रभाकर और अतुल प्रभाकर


बलदेव वंशी, विष्णु प्रभाकर, अतुल प्रभाकर


अतुल प्रभाकर, जगदीश रावतानी और विष्णु प्रभाकर


वीडियो मोबाइल कैमरे से लिए गये हैं, इसलिए कम स्पष्ट हैं। हम १-२ दिनों में अच्छी गुणवत्ता का वीडियो उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे।



भाग-1



भाग-2



भाग-3



भाग-4



भाग-5



भाग-6



भाग-7

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4 कविताप्रेमियों का कहना है :

सजीव सारथी का कहना है कि -

विष्णु जी को जल्दी स्वस्थ लाभ हो यही कामना है

devendra का कहना है कि -

विष्णु प्रभाकर जी के स्वास्थ्य की जानकारी तथा नवीनतम तश्वीरें प्रकाशित करने के लिए धन्यवाद।

sumit का कहना है कि -

विष्णु प्रभाकर जी के जल्द स्वस्थ हो जाने की कामना करता हूँ

सुमित भारद्वाज

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

प्रेमचंद जी,

आपका बहुत-बहुत आभार। यदि आपलोग न पहुँचते तो हमें इस महान साहित्यकार की खबर कौन देता। खबरनवीसों के लिए यह तो कोई ख़बर नहीं है।

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