फटाफट (25 नई पोस्ट):

Sunday, September 28, 2008

नींद में डूबा चाँद चुराना क्या मुश्किल है....


रात सड़क पर जब सन्नाटा पसरा होता है,
चाँद फ़लक पर नींद के मारे गुम-सा होता है,
सामने वाले घर की बत्ती बुझने लगती है,
यादों की तितली खिड़की से दाखिल होती है.....

रात को जाने कितने घंटे,
यादों की तितली मेरे संग बैठक करती है,
हँसी-ठिठोली,चाय-पकौड़ी...
सब कुछ यादों की तितली संग....
यूँ कि जैसे एक रिहर्सल,
तुम आ जातीं तो क्या करता....

खिड़की पर जब तुम हौले से दस्तक देतीं,
मैं चुपके-से बाहर आता...
हम तुम हँसते ज़ोर-ज़ोर से बीच सड़क पर....
सड़क की चुप्प्पी हमसे चिढ़ती,
चाँद नींद में करवट लेता....
हम तुम हँसते ज़ोर-ज़ोर से बीच सड़क पर....
हँसी तुम्हारी,
मिश्री की मानिंद हवा में घुलती जाती,

एक आइसक्रीम वाला दूर से आता दिखता,
तुम ज़िद करतीं बच्चों जैसे....
काश! आइसक्रीम के बदले तुम चाँद भी कहतीं,
तो मैं लाता....
(नींद में डूबा चाँद चुराना क्या मुश्किल है....)

तुम जैसे ही होठों से "सॉफ्टी" को चखतीं...
आसमान से कुछ बूँदें भी गिरने लगतीं,
मैं मन ही मन सोचता रहता....
बारिश-वारिश सब धोखा है....
असल में चाँद जो ऊंघ रहा था,
अपनी किस्मत पर पछताकर जाग गया है...
उठते-उठते चाँद के मुंह पर,
लार जो थोडी-सी चिपकी थी,
टपक पड़ी है...
बारिश-वारिश सब धोखा है...

काश! कि ये सब मुमकिन होता...
रात भी है और सड़क भी है और सन्नाटा भी,
काश! चाँद के ऊँघने तक,
तुम भी आ जातीं.....
....................

निखिल आनंद गिरि

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

19 कविताप्रेमियों का कहना है :

दीपाली का कहना है कि -

कल्पनाओ को शब्दों में क्या पिरोया है.
अति सुंदर.

Anonymous का कहना है कि -

WAAH BADE BHAI,DIL KHUSH KAR DIYA.
ALOK SINGH "SAHIL"

शोभा का कहना है कि -

रात को जाने कितने घंटे,
यादों की तितली मेरे संग बैठक करती है,
हँसी-ठिठोली,चाय-पकौड़ी...
सब कुछ यादों की तितली संग....
यूँ कि जैसे एक रिहर्सल,
तुम आ जातीं तो क्या करता....
वाह! बहुत सुंदर दिल के भीतर तक उतरती कविता.

neelam का कहना है कि -

बहुत खूब ,बेहतरीन

विश्व दीपक का कहना है कि -

नींद में डूबा चाँद चुराना क्या मुश्किल है....

बारिश-वारिश सब धोखा है....
असल में चाँद जो ऊंघ रहा था,
अपनी किस्मत पर पछताकर जाग गया है...
उठते-उठते चाँद के मुंह पर,
लार जो थोडी-सी चिपकी थी,
टपक पड़ी है...
बारिश-वारिश सब धोखा है...

ये पंक्तियाँ पसंद आईं।
बधाई स्वीकारें।

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

बढ़िया

Anonymous का कहना है कि -

नींद में डूबा चाँद यह फ़िक्र ही गालिबाना है तमन्नाओं को खूबसूरती से पिरोया गया है काव्य के मैदान में इन खूबसूरत पंक्तियों के लिए आजीबन इसी फ़िक्र के लिए प्रार्थना करता हूँ
बज़मी नकवी

Smart Indian का कहना है कि -

बहुत खूब!

Anonymous का कहना है कि -

शानदार कविता है ..कैसे तुम्हारी कल्पना के घोडे इतनी दूर तक चले जाते है कैसे तुम सब कुछ शब्दो में बांध पाते है ..ऐसा लगाता है समंदर को शब्दो में बांधा गया हो ....

sohail moradabadi का कहना है कि -

उत्तम.. अति उत्तम... जवाब नही तुम्हारी कल्पनाओं का...
नींद में डूबा चाँद चुराना क्या मुश्किल है.... सही कहा भाई..

Anonymous का कहना है कि -

कल्पना की गहराई
चाहत की अमराई
आप की लिखाई
क्या कहना भाई
सादर
रचना

Unknown का कहना है कि -

ek kalpana aur ek sapna hota humesha apna

तपन शर्मा Tapan Sharma का कहना है कि -

काश! कि ये सब मुमकिन होता...
रात भी है और सड़क भी है और सन्नाटा भी,
काश! चाँद के ऊँघने तक,
तुम भी आ जातीं.....

खूबसूरत... बहुत अच्छा निखिल भाई...

Unknown का कहना है कि -

एक आइसक्रीम वाला दूर से आता दिखता,
तुम ज़िद करतीं बच्चों जैसे....
काश! आइसक्रीम के बदले तुम चाँद भी कहतीं,
तो मैं लाता....
(नींद में डूबा चाँद चुराना क्या मुश्किल है....)

बहुत अच्छा लिखा......
ये पंक्तिया बहुत पसंद आयी

सुमित भारद्वाज

Nikhil का कहना है कि -

शुक्रिया anonymous साहब......आप अपना परिचय भी तो दें....

Avanish Gautam का कहना है कि -

सुन्दर् :)

Sajeev का कहना है कि -

वाह भाई खूब , नींद में डूबा चाँद :) मज़ा आ गया कई बार पढ़ चुका हूँ, अभी मन नही भरा ...

गौरव सोलंकी का कहना है कि -

हमें तो बहुत मुश्किल लगता है चाँद चुराना, चाहे नींद में ही क्यों न हो ;)

ritu raj का कहना है कि -

nikhil bhai sone ke jaisa hai ye to.

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)