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Tuesday, July 08, 2008

दौराने सफ़र


राहतें सारी आ गई हिस्से में उनके
और उजाले दामन के सितारे हो गये
चांद मेरा बादलों में खो गया है
कौन जाने इस घटा की क्या बजह है

आखिरी छोर तक जायेगा साथ मेरे
और फ़िर वो साया भी मेरा न होगा
ख्वाबों के लिये हैं ये सातों आसमान
हकीकत के लिये पथरीली सतह है

जब आस का विश्वास ले कर तैरता था
समझ लाश गिद्ध इर्द-गिर्द मंडराने लगे
क्यों उठ रही भीगी जमीं से गर्द है
पहली किरण से क्यों सुलगती सुबह है

राहों से मंजिलों का पता पूछता है
बीच राह में गुमराह राही हो गया है
कौन जाने गुजरे पडाव मंजिलें हों
भूलना ही हार को असली फ़तह है

दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से
सोचने को अब बाकी क्या बचा है
राह शोलों पर भी चल कर कट जायेगी
इस दिल मे जख्मों के लिये जगह है

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11 कविताप्रेमियों का कहना है :

शोभा का कहना है कि -

दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से
सोचने को अब बाकी क्या बचा है
राह शोलों पर भी चल कर कट जायेगी
इस दिल मे जख्मों के लिये जगह है
वाह बहूत खूब लिखा है।

Smart Indian का कहना है कि -

"दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से" -- अच्छा बयान है.

Harihar का कहना है कि -

राहतें सारी आ गई हिस्से में उनके
और उजाले दामन के सितारे हो गये
चांद मेरा बादलों में खो गया है
कौन जाने इस घटा की क्या बजह

बहुत बढ़िया मोहिन्दर जी

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

क्या बात है मोहिन्दर जी कविता है या मिशाइल...

बहुत ही अच्छी रेंज की मारक क्षमता वाली कविता..

करण समस्तीपुरी का कहना है कि -

बहुत खूब मोहिंदर जी !
मैं थोड़ा असमंजस में हूँ ! इसे ग़जल कहूं, कविता कहूं या रुबाई ??? साफगोई अच्छी मगर काफिया तंग है !

Avanish Gautam का कहना है कि -

भूलना ही हार को असली फ़तह है..


क्या बात है! बढिया मोहिन्दर जी!

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

बहुत खूब |


अवनीश तिवारी

आलोक शंकर का कहना है कि -

mohinder ji, ab aap purane form me waapas aa rahe hain. bahut sunder.

BRAHMA NATH TRIPATHI का कहना है कि -

राहों से मंजिलों का पता पूछता है
बीच राह में गुमराह राही हो गया है
कौन जाने गुजरे पडाव मंजिलें हों
भूलना ही हार को असली फ़तह है

दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से
सोचने को अब बाकी क्या बचा है
राह शोलों पर भी चल कर कट जायेगी
इस दिल मे जख्मों के लिये जगह है

वाह वाह क्या बात है मोहिंदर जी
बहुत अच्छा

sahil का कहना है कि -

लाजवाब जी,
मजा आ गया
आलोक सिंह "साहिल"

देवेन्द्र कुमार मिश्रा का कहना है कि -

दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से
सोचने को अब बाकी क्या बचा है
राह शोलों पर भी चल कर कट जायेगी
इस दिल मे जख्मों के लिये जगह है

वाह वाह क्या बात है

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