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Friday, April 04, 2008

ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात


आज बहुत दिनों बाद आपसे बात कर रहा हूं और उसके पीछे क्‍या कारण है ये तो म्‍ें नहीं जानता पर हां ये तय है कि  सजीव जी ने कई बार बात की और उनके साथ कई विषयों पर चर्चा हुई सो आज आप से बात कर रहा हूं । एक बात जो मैं कहना चाहता हूं कि सीखने के लिये बहुत धैर्य की ज़ुरूरत होती है । अगर आप में धैर्य नहीं है तो आप चाहे जो हो जाएं पर एक अच्‍छे छात्र नहीं हो सकते हैं । दूसरी बात ये है कि सीखते समय एक बात का ध्‍यान तो रखना ही होता है कि सीखने तो हम आए हैं। सिखाने वाला हम तक चल कर नहीं आया है कि भई मुझसे सीख लो । तो हमें विनम्र होना ही चाहिये बिना विनम्र हुए सीखा नहीं जा सकता है । अगर हम अपनी बात को पत्‍थर की लकीर मान कर चलेंगें तो फिर तो सीधी सी बात ये है कि हम सिखाने वाले को मूर्ख साबित करने के लिये ही सीखने आए हैं । विनम्रता हमारा सबसे बड़ा गुण है जो हमको हमेशा आगे रख्‍ता है । मेरे पास जो कुछ है वो मेरे गुरुओं और मेरे अनुभव की देन है और मैं उसे अगर आप को दे रहा हूं तो ये तो तय है कि शायद मैं आपसे थोड़ा सा ज्‍यादा जानता हूं । दूसरी बात ये कि मुझे एक लैक्‍चर लगाने में डेढ़ घंटे का समय लगता है पहले विषय की तैयारी करो फिर उसके अनुरूप उदा‍हरण तलाश करना और फिर लैक्‍चर लगाना ये सब लम्‍बा समय लेते हैं । सजीव जी से मैंने कहा कि सजीव जी आदमी हर काम दो कारणों से करता है पहला तो पैसे के लिये या फिर सम्‍मान के लिये । अगर हिन्‍द युग्‍म की बात करें तो ये तो आप सब जानते ही हैं कि मैं यहां पर पैसे के लिये नहीं कर रहा हूं लेकिन हां अगर मैं मान सम्‍मान आप लोगों से पाना चाहता हूं तो शायद मैं ग़लत नहीं हूं क्‍योंकि वो मेरा अधिकार है । अब अंतिम बात के साथ ही आज की बात को समाप्‍त कर रहा हूं । फिर आपकी टिप्‍पणियों से पता चलेगा कि आप क्‍या चाहते हैं । बात ये कि मैं सचमुच आहत हुआ हूं मुझे ठेस लगी है मुझे ऐसा लगा कि मैं ग़लती पर हूं मुझे सिखाने का काम नहीं करना नहीं चाहिये क्‍योंकि सीखना तो कोई चाहता ही नहीं है । मैं अपने आप को बड़ा जानकार नहीं मानता पर ये ज़रूर है क‍ि कुछ थोड़ा बहुत शायद जानता हूं । और वो थोड़ा बहुत आपके साथ बांटने के इरादे से आया था अब आप जैसा चाहें । आपकी टिप्‍पणियों के इंतेज़ार में आपका ही । यूनी ग़ज़ल शिक्षक


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17 कविताप्रेमियों का कहना है :

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

कुछ छोटी सी बातों पर हो गया गुरु अपना नाराज़ ,
नाराजगी मे भी देखों कहता उठाने ग़ज़ल की साज़ ,

निवेदन है नाराज़गी से अब नाता दो तोड़,
करते है पुन: शुरू अपनी ग़ज़ल कक्षा आज

--गुरूजी ग़ज़ल कक्षा शुरू करिये अब | विनम्रता से निवेदन है |

अवनीश तिवारी

anuradha srivastav का कहना है कि -

सर जी नाराज़गी छोड दीजिये। माना की हम सब बुरे छात्र-छात्रायें हैं। देखिये जब सीखने-सीखाने की बात होती है तो अध्यापक हमेशा असंतुष्ट होता है। मैं खुद अपने सीखने की रफ्तार से असंतुष्ट हूं। थोडे धैर्य की जरुरत दोनों तरफ है। कोशिश जारी है। आशा है आगे आपको नाराज़गी का मौका नहीं मिलेगा।

tanha kavi का कहना है कि -

पंकज जी,
हमसे जो भी गलती हुई है , उसके लिए युग्म की तरफ से मैं माफी माँगता हूँ। कृप्या गुस्सा छोड़ दें और हमें मझधार में छोड़कर ना जाएँ।

-विश्व दीपक ’तन्हा’

सजीव सारथी का कहना है कि -

स्वागत है आपका

hemjyotsana का कहना है कि -

आदरणीय गुरु जी ,
यदि हमसे भी कोई गलती हुई है तो हम पुरी विनम्रता से माफ़ी मांग रहे है ।
और यदि हमारे सहपाठी से भी हुई है तो उसकी तरफ़ से भी....

कृपया हम सब को माफ़ करें ।

अब कक्षा फ़िर से शुरु करें ।

आपकी अगले पाठ के इन्तजार में...

हेम ज्योत्स्ना

AMIT ARUN SAHU का कहना है कि -

भगवान का शुक्रिया अदा करता हूँ कि सर आप आए. आप जब से गए तो २-३ दिन हिंद युग्म देखा और फिर देखना ही बंद कर दिया . आज अचानक साईट खोली तो आपका पत्र पढ़कर अच्छा लगा कि आप आए. सर कहने वाले तो कहते रहेंगे , आप नाराज़ न होइये . १ बुरा है तो १० अच्छे छात्र भी तो है . आप दिल खोलके पढ़ाइये और डाटीये, हम तो ख़ुद को खुशनसीब समझते है कि आप जैसे गुरु हमे मिले. आप न होते तो मैं शायद ग़ज़ल कि एबीसी भी नही समझ पता. आप जल्दी कक्षाएँ शुरू कीजिये , हम सब आपका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं . सर मैं तो आपका ................. खैर छोडिये आप समझेंगे कि मैं कुछ ज्यादा ही बोल रहा हूँ . बस अब आ जाइये हम पलकें बिछाकर इंतजार कर रहे हैं.

सुनीता शानू का कहना है कि -

माना कि बहुत निक्कमे है लाचार है हम
मगर फ़िर भी आपके तलबगार है हम

सुनीता शानू

तपन शर्मा का कहना है कि -

पंकज जी, जैसे ही शीर्षक पढ़ा दिल खुश हो गया। आपने सही कहा कि आप हम सब से ज्यादा ज़रूर जानते हैं। क्योंकि यदि ऐसा होता तो हम में से ही कोई शिक्षक होता। आपका धन्यवाद और आपसे निवेदन है कि हमारी गलतियों को माफ करें।

Shailesh Jamloki का कहना है कि -

गुरूजी,
आप की बात अगर मै आपकी जगह पर अपने आप को रख कर सोचु, तो लगता है की आप बिलकुल सही हैं..और यहाँ पर पदने वाला कोई भी छोटा बच्चा नहीं है.. की उसे डांट पीट कर समझाया जाए..
मैंने तो सुना था.. गुरु का स्थान भागवान से भी ऊपर होता है.... पर उस दिन मेरे एक सहपाठी की टिपण्णी देख कर मुझे बहुत खिन्नता हुई... और ये कह कर किसी से वाद विवाद करने का मन भी नहीं हुआ.. क्यों की सब बहुत समझ दार है... अपने गलतियां न देख कर.. वाद विवाद करना.. बिलकुल भी सही नहीं है..

मैंने इतने दिनों तक.. कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इसका मतलब ये नहीं था.. की मै हिंद युग्म से दूर था.. बल्कि मै तब भी अपने व्यस्त समय से थोडा टाइम निकाल कर आपका पाठ पढने आ जाता था.. पर समय आभाव से होम वर्क पूरा नहीं कर पाया..
:(
आपकी होम वर्क पर दी गयी टिप्पणियों से मै बहुत प्रभावित हुआ.. और अपने आप को अपना गुरु मान कर बहुत गर्व महसूस हुआ.
और उसके बाद जो भी हुआ.. उस के बाद मै भी यही कहूँगा..
विद्यार्थियों के भले के लिए आप हमे पदाए..
और उम्मीद करते है ऐसे घटना दुबारा न हो...
सादर
शैलेश

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

क्षमा बड़न को चाहिये छोटन को उत्पात ।
कहा रहीम हरि को घट्यो जो भृगु मारी लात ॥

प्रणाम्..

दिल की प्रबल इक्षा
कक्षा की अपेक्षा..

sumit का कहना है कि -

गुरू जी,
मै तहदिल से आपका सम्मान करता हूँ
क्षमा चाहता हूँ परीक्षा मे नही आ सका
गजल लिखने मे कुछ समस्याए आ रही है
वो आपसे बाद मे पूछूंगा।
सुमित भाराद्वाज

Anonymous का कहना है कि -

सर,
मैं तो बस एक बात कहना चाहती हूँ. क्लास में अच्छे बुरे, सभी प्रकार के विद्यार्थी होते हैं. एक बुरे शिष्य के कारण कभी शिक्षक को क्लास छोड़ते नहीं देखा. वह शिष्य को तो डांट लगा सकता है, मगर दुसरे विद्यार्थियों को उस एक की वजह से छोड़ कर जाने की धमकी नहीं दे सकता. आपको किस वजह से दुःख हुआ, किसके कारण मन आहत हुआ, मुझे पता नहीं... मगर आप कृपया इन सब छोटी छोटी बातों को दिल से न लगाइये. न तो यहाँ सीखने वाले छोटे बच्चे हैं, न आप ही छोटे बच्चे हैं, जो छोटी छोटी बातो पर रूठ कर क्लास छोड़ने की धमकी दिया करते हैं. जो हुआ उसे भूल कर वही कीजिए जो एक शिक्षक को शोभा देता है.

Anonymous का कहना है कि -

मैंने तो यहाँ जब भी टिपण्णी पढी है, हर व्यक्ति को बहुत ही विनम्र पाया है. गुरूजी गुरूजी कहते उनकी जुबां नहीं थकती. आपका किसी बात पर नाराज़ होना सही हो सकता है, मगर उन्हें बीच मझधार में छोड़ देना - यहकहाँ का न्याय है?

RAVI KANT का कहना है कि -

गुरू जी,बहुत देर से टिप्पणी कर रहा हूँ(सिस्टम पर वायरस लग जाने से पिछले कई दिनों से मैं संपर्कशून्य स्थिति में था)। आपको पुनः यहाँ देखकर मन को बड़ी शांति मिली। विनम्र प्रार्थना है कि शिष्यों पर स्नेह बनाए रखें।

venus kesari का कहना है कि -

मै खुल के हंसा और वो नराज़ हो गया
खन्ज़र कि पैनी धार सा अन्दाज़ हो गय
जोशीले गीत जैसा मेरे लिये थ वो
मै उसके लिये टूटा हुआ साज़ हो गया

मै खुल के हंसा और वो नराज़ हो गया.................वीनस

अल्पना वर्मा का कहना है कि -

नमस्ते गुरु जी,
अच्छा किया जो आप ने अपनी खामोशी का कारण आज यहाँ बता दिया.मैं तो यह समझ रही थी कि समय अभाव के कारण आप नहीं आ पा रहे हैं.
हम समझ सकते हैं कि आप को कितनी ठेस लगी होगी लेकिन एक व्यक्ति से नाराज होने पर बाकि हम सब शिष्यों को भी आप ने दंड दे दिया!चलिये यह भी सही- हम सब ने भी एक और सबक सीखा लेकिन आप से निवेदन है कि आप फ़िर से ग़ज़ल गुरु का पद संभालें और हम सब को ऐसे मझधार में न छोडें!
सच है बहुत ही कम लोग अपना ज्ञान मुफ्त में बांटते हैं. आप जिस तरह से समझाते हैं वैसे कहाँ कोई समाझाता है.हम सब छात्र आप की कक्षाओं का इंतजार कर रहे हैं.कृपया वापस आ जाईये .
with regrads
alpana

seema sachdeva का कहना है कि -

Namskaar,
mai gazal ke baare me kuch nahi jaanati thi ,lekin HIND-YUGM par aa kar GAZAL-LIKHANA-SEEKHIYE ke sabhi bhaag sire se padh daale to GAZAL ki takneeki shabdaavali aur niyam samajh me aane lage hai ,ab likhane ka pryaas karoongi .Isake liye mai aapki tatha HIND-YUGM ki bahut-bahut aabhaari hoo aur tah dil se shukriya ada karati hoo....seema

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