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Saturday, March 15, 2008

साध



का़श!
मैं बन जाऊँ एक सुगन्ध
जो सबको महका दे
सारी दुर्गन्ध उड़ा दे


या फिर…
बन जाऊँ एक गीत
जिसे सब गुनगुनाएँ
हर दिल को भा जाए


अथवा…
बन जाऊँ नीर
सबकी प्यास बुझाऊँ
सबको जीवन दे आऊँ


या फिर..
बन जाऊँ एक आशा
दूर कर दूँ निराशा
हर दिल की उम्मीद


अथवा…
बन जाऊँ एक बयार
जो सबको ताज़गी दे
जीवन की उमंग दे
नव जीवन संबल बने


तनाव ग्रस्त ..
प्राणी की पीड़ा पर
मैं स्नेह लेप बन जाऊँ
जग भर की सारी
चिन्ताएँ मिटा दूँ


जी चाहता है आज
निस्सीम हो जाऊँ
एक छाया बन
नील गगन में छा जाऊँ

सारी सृष्टि पर अपनी
ममता लुटाऊँ

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17 कविताप्रेमियों का कहना है :

Harihar का कहना है कि -

जी चाहता है आज
निस्सीम हो जाऊँ
एक छाया बन
नील गगन में छा जाऊँ

शोभाजी बहुत बढ़िया लेखन !

सजीव सारथी का कहना है कि -

सुंदर ख्याल .....

रंजू का कहना है कि -

तनाव ग्रस्त ..
प्राणी की पीड़ा पर
मैं स्नेह लेप बन जाऊँ
जग भर की सारी
चिन्ताएँ मिटा दूँ

बहुत सुंदर लिखा है आपने शोभा जी यदि हम ऐसा कर सके तो बहुत ही अच्छा है :)!!

seema gupta का कहना है कि -

जी चाहता है आज
निस्सीम हो जाऊँ
एक छाया बन
नील गगन में छा जाऊँ

सारी सृष्टि पर अपनी
ममता लुटाऊँ
:बहुत सुंदर भाव , एक नारी का हर रूप मे एक सुंदर सा सपना "
Regards

mehek का कहना है कि -

जी चाहता है आज
निस्सीम हो जाऊँ
एक छाया बन
नील गगन में छा जाऊँ
बहुत सुंदर

EKLAVYA का कहना है कि -

बहुत ही अच लिखा है बेहतर काव्य संग्रह सदैव मन की पीदाओं से मनुष्य मात्र के भौं का आलिंगन करती हैं

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

जी चाहता है आज
निस्सीम हो जाऊँ
एक छाया बन
नील गगन में छा जाऊँ

सारी सृष्टि पर अपनी
ममता लुटाऊँ
-- मन भावक अनुभूति है |

अवनीश तिवारी

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

आपकी बेहतरीन अभिव्यक्ति की प्रशंसा करते हुए आपको जन्मदिवस की कोटिश: बधाई देना चाहूँगा।

*** राजीव रंजन प्रसाद

ajay का कहना है कि -

बहुत ही सुंदर रचना है ... शोभा जी बहुत ही अच्छा लिखा है आपने

"जी चाहता है आज
निस्सीम हो जाऊँ
एक छाया बन
नील गगन में छा जाऊँ"

Sanjeev Satya का कहना है कि -

प्रत्येक पंक्ति,
प्रत्येक भाव,
अति उत्तम
हार्दिक बधाई, शोभा जी....

anju का कहना है कि -

जी चाहता है आज
निस्सीम हो जाऊँ
एक छाया बन
नील गगन में छा जाऊँ
वह क्या कहना
बहुत खूब शोभा जी
कविता अच्छी लगी

vipul का कहना है कि -

शोभा जी सच कहूँ तो मज़ा नहीं आया मुझे इस रचना में... भाव तो अच्छे थे पर शायद प्रस्तुतिकरण में कमी रह गयी !

sahil का कहना है कि -

जी चाहता है आज
निस्सीम हो जाऊँ
एक छाया बन
नील गगन में छा जाऊँ
शोभा जी,बेहतरीन पंक्तियाँ,बधाई
आलोक सिंह "साहिल"

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

इस तरह की कविता तो लोग बचपन में लिखते हैं।

tanha kavi का कहना है कि -

शोभा जी,
आपके विचार बेहद सराहनीय हैं। कविता को आपने जीने की कोशिश की है,बहुत हद तक सफल भी हुई हैं आप, परंतु यह और भी अच्छी हो सकती थी।ध्यान देंगे।

-विश्व दीपक ’तन्हा’

Kavi Kulwant का कहना है कि -

शोभा जी की शोभित कविता... बहुत खूब.. हार्दिक बधाई..

तपन शर्मा का कहना है कि -

माफ कीजियेगा शोभा जी, पर कुछ मजा नहीं आया पढ़ने में। आपसे काफी उम्मीदें रहती हैं।

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