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Thursday, March 06, 2008

संगिनी



यूं जब अपनी पलके उठा के
तुम देखती हो मेरी तरफ़
मैं जानता हूँ
कि तुम्हारी आँखे
पढ़ रही होती है
मेरे उस अंतर्मन को
जो मेरा ही अनदेखा
मेरा ही अनकहा है


अपनी मुस्कराहट से
जो देती हो मेरे सन्नाटे को
हर पल नया अर्थ
और मन की गहरी वादियों में
चुपके से खिला देती हो
आशा से चमकते
सितारों की रौशनी को
मैं जानता हूँ कि
यह सपना मेरा ही बुना हुआ है


पूर्ण करती हो मेरे अस्तित्व को
छाई सरदी की पहली धूप की तरह
भर देती हो मेरे सूनेपन को
अपने साये से फैले वट वृक्ष की तरह
सम्हो लेती हो अपने सम्मोहन से
मैं जानता हूँ कि
यही सब मेरे साँस लेने की वजह है

तुम जो हो ....
एक अदा.....
एक आकर्षण....
एक माँ ,एक प्रेमिका
और संग संग जीने की लय
मैं जानता हूँ कि
प्रकति का सुंदर खेल
तेरे हर अक्स में रचा बसा है !!

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35 कविताप्रेमियों का कहना है :

anitakumar का कहना है कि -

सुन्दर रचना रंजना जी
यूं जब अपनी पलके उठा के
तुम देखती हो मेरी तरफ़
मैं जानता हूँ
कि तुम्हारी आँखे
पढ़ रही होती है
मेरे उस अंतर्मन को
जो मेरा ही अनदेखा
मेरा ही अनकहा है

ये लाइनें मुझे सबसे अच्छी लगीं

रश्मि प्रभा का कहना है कि -

तुम जो हो ....
एक अदा.....बहुत स्वाभाविक चित्रण,एक स्वाभाविक उम्मीद
अनकहे को पढ़ने का भाव.......बहुत बढ़िया

tanha kavi का कहना है कि -

बहुत हीं मासूम-सी रचना है रंजू जी। दिल को छू गई।

बधाई स्वीकारें।

-विश्व दीपक ’तन्हा’

सजीव सारथी का कहना है कि -

सरल शब्दों में सुंदर बखान....

mamta का कहना है कि -

बहुत सुंदर कविता।

nc का कहना है कि -

रंजना जी धन्यबाद,
एक स्त्री होकर आपने संगिनी का इतना सुन्दर चित्रण किया है कि
क्या कहने .
संगिनी तेरे रूप अनेक,
लगता है हमारे मन के अन्दर बैठकर कविता लिखी है.

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

तुम जो हो ....
एक अदा.....
एक आकर्षण....
एक माँ ,एक प्रेमिका
और संग संग जीने की लय
मैं जानता हूँ कि
प्रकति का सुंदर खेल
तेरे हर अक्स में रचा बसा है !!
-- नारी जाती को समर्पित यह छंद सुंदर है |

अवनीश तिवारी

Dr. RAMJI GIRI का कहना है कि -

"कि तुम्हारी आँखे
पढ़ रही होती है
मेरे उस अंतर्मन को
जो मेरा ही अनदेखा
मेरा ही अनकहा है"

बहुत ही मोहक और स्वप्निल चित्रण है 'संगनी' का...पूरी समग्रता लिए हुए .

Sanjeet Tripathi का कहना है कि -

फागुन के महीने ने आपको फिर रोमांस रस की ओर लौटा दिया लगता है ;)

बढ़िया कविता॰!

Vicky का कहना है कि -

Behad Khubsoorati Se aapne In Pyaar Bhare Ehasaason ko Bayan Kiya Hai Ranjana Ji..

Har Ek Line. Har ek Lafz Dil Ko Chhoo gaya.. Bahut Sunder Chitran Kiya Hai aapne Antarmann ka..!!

Daad Kubool karen..

Vicky

जीतेश का कहना है कि -

अपनी मुस्कराहट से
जो देती हो मेरे सन्नाटे को
हर पल नया अर्थ.....

यहाँ पर कवितायो को पड़कर लगता है पता नही कहा से खोज लेते है आप लोग शब्द और कहा से मिल जाते है नए अर्थ........

सुंदर रचना.....

dilip uttam का कहना है कि -

see my site "www.thevishvattam.blogspot.com "

dilip uttam का कहना है कि -

jai hindam jai vishvattam

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari का कहना है कि -

Thanks, Sundar Rachana.

तपन शर्मा का कहना है कि -

बहुत सुंदर!!

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

वाह ! क्या बात है..

भाव-लय तारम्य गठन पठन शिल्प विन्यास एक दम जबरदस्त
संलग्न चित्र बहुत भाया..

अपनी मुस्कराहट से
जो देती हो मेरे सन्नाटे को
हर पल नया अर्थ
और मन की गहरी वादियों में
चुपके से खिला देती हो
आशा से चमकते
सितारों की रौशनी को
मैं जानता हूँ कि
यह सपना मेरा ही बुना हुआ है

बहुत प्रभावी रचना..

बरबाद देहलवी का कहना है कि -

रंजना जी हमेशा की तरह आपके तरकश का यह तीर भी ह्रदय भेदी है बहुत बाद पडा आपको पुरानि यादें ताज़ा हो गयीं आपकी रचना बेहद प्रभाव शाली है मुबारक हो

anju का कहना है कि -

वाह बहूत बदिया रंजू जी
लिखते रहिये
अपनी मुस्कराहट से
जो देती हो मेरे सन्नाटे को
हर पल नया अर्थ

EKLAVYA का कहना है कि -

पूर्ण करती हो मेरे अस्तित्व को
छाई सरदी की पहली धूप की तरह
these lines have a great impact on the content of poem and the feelings of writer...

आलोक शंकर का कहना है कि -

shirshak me sangni likha hua hai, sangini hota hai.

शोभा का कहना है कि -

रंजू जी
बहुत अच्छी कविता लिखी है-
अपनी मुस्कराहट से
जो देती हो मेरे सन्नाटे को
हर पल नया अर्थ
और मन की गहरी वादियों में
चुपके से खिला देती हो
अति सुंदर

dr minoo का कहना है कि -

ranjna ji...ati sunder....
antarman ankaha andekha...bahut khoob...

anuradha srivastav का कहना है कि -

यूं जब अपनी पलके उठा के
तुम देखती हो मेरी तरफ़
मैं जानता हूँ
कि तुम्हारी आँखे
पढ़ रही होती है
मेरे उस अंतर्मन को
जो मेरा ही अनदेखा
मेरा ही अनकहा है
बहुत खूब..............

sahil का कहना है कि -

एक आकर्षण....
एक माँ ,एक प्रेमिका
और संग संग जीने की लय
मैं जानता हूँ कि
प्रकति का सुंदर खेल
तेरे हर अक्स में रचा बसा है
अच्छी पंक्तियाँ बन पड़ी हैं,अच्छा लगा,
आलोक सिंह "साहिल"

RAVI KANT का कहना है कि -

तुम जो हो ....
एक अदा.....
एक आकर्षण....
एक माँ ,एक प्रेमिका
और संग संग जीने की लय
मैं जानता हूँ कि
प्रकति का सुंदर खेल
तेरे हर अक्स में रचा बसा है !!

रंजना जी सुन्दर प्रस्तुति।

mehek का कहना है कि -

बहुत ही मनमोहक वर्णन रंजू जी ,आपका लिखा है ये पहली पंक्ति से जान गए ,मधुर दिलकश शब्द,पढ़कर भी जी नही भरा ,बहुत बधाई

नंदन का कहना है कि -

रंजू जी, "संगिनी" कविता के लिए बधाई स्वीकारें!
आज के इस अविश्वास भरे दौर में एक नारी की ओर से इस तरह की अभिव्यक्ति भारतीय परंपरा को जीवित रखने मे सहायक है।
तुम जो हो ....
एक अदा.....
एक आकर्षण....
एक माँ ,एक प्रेमिका
और संग संग जीने की लय
मैं जानता हूँ कि
प्रकति का सुंदर खेल
तेरे हर अक्स में रचा बसा है !!
नई पीढी को इन पंक्तियों से सीख लेनी चाहिए, जो छ्लावे की ओर तेजी से बढ रही है।

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

रंजना जी,

सुन्दर भाव भरी रचना में नारी के सभी रूपों का
सहज सौम्य चित्रण.... बधाई

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

तुम जो हो ....
एक अदा.....
एक आकर्षण....
एक माँ ,एक प्रेमिका
और संग संग जीने की लय
मैं जानता हूँ कि
प्रकति का सुंदर खेल
तेरे हर अक्स में रचा बसा है !!

बेहतरीन रचना, डुबोने में सक्षम।

*** राजीव रंजन प्रसाद

seema gupta का कहना है कि -

यूं जब अपनी पलके उठा के
तुम देखती हो मेरी तरफ़
मैं जानता हूँ
कि तुम्हारी आँखे
पढ़ रही होती है
मेरे उस अंतर्मन को
जो मेरा ही अनदेखा
मेरा ही अनकहा है
"बहुत सुंदर, बहुत खूब"

Regards

Karan Samastipuri का कहना है कि -

तुम जो हो ....
एक अदा.....
एक आकर्षण....
एक माँ ,एक प्रेमिका
और संग संग जीने की लय
मैं जानता हूँ कि
प्रकति का सुंदर खेल
तेरे हर अक्स में रचा बसा है !!
रंजू,
ये पंक्तियाँ मेरे दिल को छू गयी !
उत्कृष्ट ! एवं उत्कृष्टतम की शुभ-कामनाएं !

shyam sarswat का कहना है कि -

laazavab.......

GIRISH का कहना है कि -

abhivyakti aur bhav adbhut lage.

Mrs. Asha Joglekar का कहना है कि -

सुंदर रचना कोमल भावों को दर्शाती हुई ।

devanshukashyap का कहना है कि -

I would certainly like to congratulate you.

You have become a professional poet and writer.

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