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Tuesday, February 19, 2008

पावस नीर की एक कविता


पावस नीर भी ऐसे ही कवि हैं जिन्होंने हिन्द-युग्म की यूनिकवि प्रतियोगिता में पहली बार भाग लिया और हमें खुशी है कि उनकी कविता १४वें क्रम पर रही और हम प्रकाशित भी कर रहे हैं। जब दो कविताओं को बराबर अंक मिलता है तो हम उन्हें एक ही पायदान देते हैं और उसके बाद वाली कविताओं को समान प्राप्तांक वाली कविताओं की कुल संख्या को वर्तमान स्थान में जोड़कर, उसके बाद का स्थान देते हैं।

कविता- सांचा

वो पतले धागे सी रस्सी पर दौड़ता हुआ आया
उछला
कूदा
भागा
उल्टा हुआ
सीधा
खड़ा हुआ
नमस्कार किया
तालियाँ बजी
और खेल समाप्त हुआ
देखा उनकी ओर
जो दम साधे उसका खेल देख रहे थे
रंग बिरंगे चेहरे
जैसे एक ही सांचे मे ढले हुए
और उसे ख़ुद पर गर्व हो आया क्यूँकि उसका सांचा
अलग था

निर्णायकों की नज़र में-


प्रथम चरण के जजमेंट में मिले अंक- ७॰५
स्थान- बाइसवाँ


द्वितीय चरण के जजमेंट में मिले अंक- ६॰६, ५, ७॰५ (पिछले चरण का औसत)
औसत अंक- ६॰३६६६७
स्थान- पंद्रहवाँ


तृतीय चरण के जज की टिप्पणी- काव्यात्मक गंभीरता की कमी है।
कथ्य: ४/२ शिल्प: ३/१॰५ भाषा: ३/१॰५
कुल- ५
स्थान- तेरहवाँ


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13 कविताप्रेमियों का कहना है :

mehek का कहना है कि -

बहुत सुंदर बधाई

अजय यादव का कहना है कि -

अच्छी रचना है, नीर जी! आगे आपसे और भी बेहतर रचना की उम्मीद है.

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

जो दम साधे उसका खेल देख रहे थे
रंग बिरंगे चेहरे
जैसे एक ही सांचे मे ढले हुए
और उसे ख़ुद पर गर्व हो आया क्यूँकि उसका सांचा
अलग था

बहुत खूब पावस जी...
बधाई स्वीकारें।

*** राजीव रंजन प्रसाद

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

जो दम साधे उसका खेल देख रहे थे
रंग बिरंगे चेहरे
जैसे एक ही सांचे मे ढले हुए
और उसे ख़ुद पर गर्व हो आया क्यूँकि उसका सांचा
अलग था

बढ़िया....

sahil का कहना है कि -

पावस जी सुंदर रचना के लिए बधाई और चूँकि आप की पहली प्रस्तुति है तो हम अपने परिवार में आपका स्वागत करते हैं,आगे बेहतर की उम्मीद सहित
आलोक सिंह "साहिल"

sahil का कहना है कि -

पावस जी सुंदर रचना के लिए बधाई और चूँकि आप की पहली प्रस्तुति है तो हम अपने परिवार में आपका स्वागत करते हैं,आगे बेहतर की उम्मीद सहित
आलोक सिंह "साहिल"

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

भाव सुंदर है |
इसके लिए बधाई |
स्वागत है हिंद युग्म मे ....


अवनीश तिवारी

सजीव सारथी का कहना है कि -

वाह.... स्वाभाविक ही निकला था मुँह से..... बढ़िया शुरुवात पावस

RAVI KANT का कहना है कि -

पावस जी, बढ़िया लिखा है आपने।

और उसे ख़ुद पर गर्व हो आया क्यूँकि उसका सांचा
अलग था

बधाई।

pawas का कहना है कि -

पहले प्रयास को स्थान देने के लिए हिंद युग्म का आभारी हूँ
जिन्हें प्रयास अच्छा लगा उन्हें धन्यवाद और जिन्हें कमी दिखी उनसे माफ़ी चाहूँगा , आशा है अगला प्रयास आपकी उमीदों पर खरा उतरेगा

Gita pandit का कहना है कि -

सुंदर भाव .....

बधाई

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

कुछ ख़ास नहीं है पावस जी इसमें।

"Nira" का कहना है कि -

बहुत अछि रचना लिखी है
बधाई हो

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