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Thursday, February 21, 2008

भुलावा



यादे हैं ...
कोहरे में लिपटी सुबह
कुछ आवारा बादल के टुकडे
और कुछ सूखे बिखरे फूल ,

बीती बातें हैं ..
धूमिल सी होती पगडंडियाँ
बिस्तर पर पड़ी सलवटें
दीवार पर सजा कोलाज़

वादे हैं ...
कोने में रखी झूलती कुर्सी
किसी किताब के मुड़े हुए पन्ने
दहलीज पर बिखरे अधबुने सपने

और खाली मन ..
अकेला पर अपने में डूबा
हवा में यूं ही उड़ता पंछी
ख़ुद से कहता ख़ुद की भाषा
रीते हुए वक्त से
फ़िर भर भर आता है......

ज़िंदगी को नया अर्थ
अभिनव अनुभूति देने के लिए
यूं ख़ुद को शब्दों का भुलावा देना
बहुत जरुरी है !!

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32 कविताप्रेमियों का कहना है :

Avanish Gautam का कहना है कि -

रंजू जी कविता अच्छी है. बधाई!

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

ज़िंदगी को नया अर्थ
अभिनव अनुभूति देने के लिए
यूं ख़ुद को शब्दों का भुलावा देना
बहुत जरुरी है !!
-- अच्छे बनी है |

अवनीश तिवारी

seema gupta का कहना है कि -

और खाली मन ..
अकेला पर अपने में डूबा
हवा में यूं ही उड़ता पंछी
ख़ुद से कहता ख़ुद की भाषा
रीते हुए वक्त से
फ़िर भर भर आता है......
" बहुत अच्छी पंक्तियाँ ,"

नीरज गोस्वामी का कहना है कि -

ngos1950रंजू जी
"बीती बातें हैं ..
धूमिल सी होती पगडंडियाँ
बिस्तर पर पड़ी सलवटें"
अद्भुत शब्द प्रयोग...वाह...
नीरज

राज भाटिय़ा का कहना है कि -

रंजू जी कविता बहुत खुबसुरत हे,बधाई!

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

रंजना जी,

यादों, बातों, वादों, मन और जिन्दगी को एक नया आयाम देती हुई सुन्दर रचना के लिये बधाई

Dr. RAMJI GIRI का कहना है कि -

बीती बातें हैं ..
धूमिल सी होती पगडंडियाँ---

वादे हैं ...
कोने में रखी झूलती कुर्सी---

ज़िंदगी को नया अर्थ
अभिनव अनुभूति देने के लिए---

यादों और वादों के स्याह मंज़र से गुजरते हुए ज़िन्दगी को बेपर्दा करती है ये बातें .
बहुत ही अनूठी रचना है आपकी ,रंजना जी.

छत्‍तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari का कहना है कि -

शव्‍द-शव्‍द भावों एवं अर्थों से परिपूर्ण । शुक्रिया ।

तपन शर्मा का कहना है कि -

सही कहा आपने ज़िन्दगी में कईं बार यूं ख़ुद को शब्दों का भुलावा देना बहुत जरुरी है !!
पूरी कविता अच्छी है।

titu का कहना है कि -

aapki kavita bahoot achhi lagi......usme jindagi ke baare mei kafi aachha likha hai........

सजीव सारथी का कहना है कि -

ज़िंदगी को नया अर्थ
अभिनव अनुभूति देने के लिए
यूं ख़ुद को शब्दों का भुलावा देना
बहुत जरुरी है !!
सही ....

Manoj Maikhuri का कहना है कि -

यादों, कुछ बीती बातों, कुछ भूले बीसरे वादों, और कुछ एकाकी मन को लेकर जिन्दगी को कुछ नए अर्थों में समझानें का सार्थक प्रयास है. ... उत्तम

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

ज़िंदगी को नया अर्थ
अभिनव अनुभूति देने के लिए
यूं ख़ुद को शब्दों का भुलावा देना
बहुत जरुरी है !!

गहरा दर्शन।

*** राजीव रंजन प्रसाद

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

वाह !..

गजब.. नमन है आपकी लेखनी को..

mehek का कहना है कि -

बहुत सुंदर

मीनाक्षी का कहना है कि -

खाली मन ..
अकेला पर अपने में डूबा
-बहुत खूब ! खाली भी है और डूबा भी है...

बरबाद देहलवी का कहना है कि -

रंजना जी

बेहतरीन रचना समझ नहीं आ रहा कौन सी पंक्तियों को सबसे अच्छी कहूं
खाली मन....
बीती बातें हैं ....
वादे हैं ...

एक से बडकर एक

sahil का कहना है कि -

ज़िंदगी को नया अर्थ
अभिनव अनुभूति देने के लिए
यूं ख़ुद को शब्दों का भुलावा देना
बहुत जरुरी है !!
सही कहा आपने रंजू जी शब्दों का भुलावा या यूं कहें शब्दों की ये मरीचिका इंसानी मन को काफी सुकून देती है,अपने गफ्लातों को जिंदा रखने का इससे बेहतर साधन और कुछ नहीं हो सकता.क्योंकि हकीकत पे हमारा अख्तियार नहीं होता पर अपने गढे शब्दों के दुनिया के अकेले बादशाह हम ही होते हैं,
बहुत अच्छी कविता,बधाई
आलोक सिंह "साहिल"

RAVI KANT का कहना है कि -

ज़िंदगी को नया अर्थ
अभिनव अनुभूति देने के लिए
यूं ख़ुद को शब्दों का भुलावा देना
बहुत जरुरी है !!

रंजना जी, बहुत प्यारी रचना है।

Mrs. Asha Joglekar का कहना है कि -

ज़िंदगी को नया अर्थ
अभिनव अनुभूति देने के लिए
यूं ख़ुद को शब्दों का भुलावा देना
बहुत जरुरी है !!
कितना सच कहा है ! भाव पूर्ण कविता ।

अजय यादव का कहना है कि -

रंजना जी! इस बार आपने अपनी क्षमता के अनुरूप लिखा है. बधाई स्वीकारें!

tanha kavi का कहना है कि -

रंजना जी,
अब आप पूरे रंग में आ चुकी हैं\ अब कोई भी आपकी रचना में खामियाँ नहीं निकाल सकता।
बधाई स्वीकारें!

-विश्व दीपक ’तन्हा’

shivani का कहना है कि -

यादें हैं ....
कोहरे में लिपटी सुबह
कुछ आवारा बादल के टुकड़े
और कुछ सूखे बिखरे फूल
रंजना जी ,आपकी ये यादें दिल को छू गयीं !बहुत कम शब्दों में बहुत कुछ कह गई आप !सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें !

मनीष वंदेमातरम् का कहना है कि -

रंजना जी!
ये बिम्ब ताज़ा है।

वादे हैं ...
कोने में रखी झूलती कुर्सी
किसी किताब के मुड़े हुए पन्ने
दहलीज पर बिखरे अधबुने सपने

कविता सुंदर है.............
कहीं दूर ले जा कर छोड़ देती है
अकेला......
कुछ भूला-भूला सा सोचने के लिए।।

shikha का कहना है कि -

Ranju di... Meri kahaani likhi lagti hai.. bilcul sahi kaha aapne..

Bahut achha likha hai, aur bahut badi soch ke saath likha hai aapne..
Bahut alag sa andaaz hai, lekin phir bhi apna sa lagta hai... [:)]

mukesh का कहना है कि -

bahut badia badhai

रश्मि प्रभा का कहना है कि -

बहुत ज़रूरी है भुलावा,यूँ ताउम्र भुलावे में चलता है वह आदमी,जिसके पास मन है

शोभा का कहना है कि -

रंजना जी
बहुत सुन्दर लिखा है आपने । भावों में डूबी कविता पढ़कर आनन्द आ गया
ज़िंदगी को नया अर्थ
अभिनव अनुभूति देने के लिए
यूं ख़ुद को शब्दों का भुलावा देना
बहुत जरुरी है !!

बधाई

अमिय प्रसून मल्लिक का कहना है कि -

रंजू जी की लोकप्रियता देखकर तो लगने लगता है कि अपनी राय देने लायक हूँ भी कि नहीं. अजी, यूँ ही मज़ाक कर रहा था.अच्छी रचना है. बधाई स्वीकारें!

www.kri80vt4u.blogspot.com

www.prasoon-mullick.blogspot.com

Gita pandit का कहना है कि -

और खाली मन ..
अकेला पर अपने में डूबा
हवा में यूं ही उड़ता पंछी
ख़ुद से कहता ख़ुद की भाषा
रीते हुए वक्त से


ज़िंदगी को नया अर्थ
अभिनव अनुभूति देने के लिए
यूं ख़ुद को शब्दों का भुलावा देना
बहुत जरुरी है !!


बहुत अच्छी कविता....

रंजू जी !
बधाई

स-स्नेह
गीता पंडित

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

सारे बिम्ब बहुत बढ़िया हैं। बहुत ही अच्छी कविता।

sanjeev का कहना है कि -

ranjana ji,
apki poems main mujhe ek tazagi najar aati hai.apne se judi hue.bhulaba bhi apki acchi poem hai.
s.m.sahil

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