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Monday, December 31, 2007

सूरजकुण्ड में हुआ हिन्द-युग्म कवि-मिलन



अरावली पर्वत शृंखलाओं का एक छोर, पक्षियों का कलरव, हवाओं में जीव-जंतुओं की ध्वनि, गाड़ियों के प्रदूषण से थोड़ा सा दूर, फरीदाबाद के रमणीय स्थल सूरजकुण्ड पर कल यानी ३० दिसम्बर २००७ को दोपहर ३ बजे से हिन्द-युग्म ने एक कवि मिलन का आयोजन किया। हिन्द-युग्म चाहता है कि वो छोटे-छोटे मंचों से शुरूआत करे और रचनाकारों को माँजकर बड़ों मंचों तक पहुँचाये। हिन्द-युग्म का यह आयोजन नव वर्ष के स्वागत के लिए भी था।

हमने बहुत छोटी संख्या '२३' से इसका आगाज़ किया। कुल १५ कवियों ने काव्य पाठ किया। हिन्द-युग्म की दशा और दिशा पर भी चर्चा हुई। गौरतलब है कि २ फरवरी २००८ से दिल्ली के प्रगति मैदान में लगने वाले विश्व पुस्तक मेला २००८ में हिन्द-युग्म भी शिरकत कर रहा है। इस पर भी विमर्श हुआ।

काव्य-पाठ से प्रायः लोग ऊब जाते हैं, लेकिन वहाँ ऐसा समा बँधा कि काव्य-पाठ का दूसरा दौर भी चला। वहाँ उपस्थित लोगों में मधुकर 'मधुर', श्रीकांत मिश्र 'कांत', अजय यादव, सुनीता चोटिया, पवन चोटिया, राजीव रंजन प्रसाद, रितु रंजन, कुहू, श्रीमती शीला देवी प्रसाद(राजीव जी की माताश्री), मोहिन्दर कुमार, नरेश राणा, सुषमा गर्ग, अंशुल गर्ग, स्वाति गर्ग, अंकुर गर्ग, शोभा महेन्द्रू, राघव शर्मा (बालकवि), अनु शर्मा (सपति), सजीव सारथी, भूपेन्द्र राघव व शैलेश भारतवासी आदि प्रमुख थे।

कुछ झलकियाँ-















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7 कविताप्रेमियों का कहना है :

shobha का कहना है कि -

इस कवि सम्मेलन का हम सभी ने रसास्वादन किया । सभी चाहते हैं कि इस प्रकार के आयोजन प्रति माह होते रहें । युग्म तथा इस कवि सम्मेलन के आयोजक को इतने सफल आयोजन के लिए बधाई ।

नीरज गोस्वामी का कहना है कि -

हिन्दयुग्म परिवार के इतने सदस्यों को एक साथ देख कर अपार हर्ष हुआ. ये शुरुआत आने वाले स्नेह सम्मेलनों के लिए मील का पत्थर साबित होगी. सभी प्रदेशों में इसका अनुसरण किया जन चाहिए. सब को देख कर लगा जैसे हम भी वहीं थे.
नीरज

tanha kavi का कहना है कि -

कवि-मिलन का यह नज़ारा देखकर बड़ा हीं बढिया लगा। महसूस हुआ कि मैं भी वहीं मौजूद हूँ। आगे भी ऎसे प्रयास होते रहें तो युग्म यूँ हीं विकास करता रहेगा।
-तन्हा।

Alpana Verma का कहना है कि -

इस कवि सम्मेलन ke सफल आयोजन के लिए आप की टीम को बहुत बहुत बधाई .
चित्र बता रहे हैं कि इतनी सर्दी के बावजूद आप सब ने पूरे उत्साह से भाग लिया.
बहुत खुशी हुई आप के प्रयासों को देख कर.
भविष्य के लिए भी ढेर सारी शुभ कामनाएं.

sahil का कहना है कि -

मुझे यह ग्लानि सदा रहेगी की जानकारी होने के बावजूद मैं इस आयोजन का लाभ नहीं उठा सका.माफ़ी चाहूँगा क्योंकि एक अन्य आयोजन के कारण मैं इसमे शरीक नहीं हो सका.
खैर इसमे शरीक हुए सभी साथियों को बहुत बहुत बधाई.
नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित
आलोक सिंह "साहिल"

सजीव सारथी का कहना है कि -

बहुत शानदार आयोजन रहा, मोहिंदर जी और शोभा जी को विशेष आभार, मेरा प्रस्ताव है की हर माह के तीसरे रविवार को हम कवि मिलन रखें, चूँकि दिन सुनिश्चित होगा तो सभी साथी इस दिन के लिए अपने आपको फ्री रख पाएंगे

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

यह आयोजन हिन्द-युग्म के आगे बढते कदम को दिशा देने की एक और कोशिश रहा...इस आरंभ को गति प्रदान करना आवश्यक है।

*** राजीव रंजन प्रसाद

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