फटाफट (25 नई पोस्ट):

Friday, October 26, 2007

एक छत के नीचे...


उनके शहर में फ़िर सुबा हुई,
शहर के मुर्गे की बांक -
अलार्म घड़ी का,
साहब को आखिर उठा कर ही माना,
थके मांदे थे कल रात के,
फ़िर भी उठे, जैसे किसी
जुर्म का भार हो सर पर,
नल की टूटी खोली और,
वाश बेसन में ही धो डाला -
रात का चेहरा
मेम साहब भी उठी,
और खिड़की के परदे हटा कर,
बाहर झाँकने लगी,
सामने वाली बिल्डिंग के पीछे से कहीं,
उजाला फूट रहा था,
सड़क पर चहल-पहल लग गयी थी,
गाड़ियों के शोर में भी सुनाई आ रहा था,
हल्का हल्का कलरव,चिडियों का,
नौकर चाय ले आया था,
और साथ में अखबार भी,
साहब ने अखबार उठाकर,
पलटना शुरू किया,
बिसनेस न्यूज़ पर आकर रुके,
शेयर्स के भाव....
औधोयोगिक क्रांति से बहुत खुश थे साहब,
तभी उनको ख्याल आया मीटिंग का,
घड़ी देखी तो बौखला गए,
सिगरेट जला ली और
फटाफट तैयार होने लगे.
वहीं मेम साब बड़ी तसल्ली से
अपने दिन की योजनाओं पर नज़र डाल रही थी -
शोप्पिंग.....डेंटिस्ट से मुलाकात...
सोशल वर्क के लिए जमुना स्लम बस्ती में जाना...
और फ़िर शाम को रेखा के घर फैंसी ड्रेस पार्टी... और डिनर..
लक्की रेखा, इकलौता बेटा अमेरिका जो जा रहा है...

दादा जी ने रोहन कों
ख़ुद तैयार किया था, स्कूल के लिए,
सारे रस्ते रोहन बोलता रहा,
दादाजी हँसते रहे,
स्कूल के गेट पर,
दादाजी ने रोहन कों
उसका बैग थमा दिया,
दादाजी कों एक प्यारी सी "किस्सी" देकर,
रोहन अपने क्लास की तरफ़ दौड़ गया,
दादाजी उसे देखते रहे,
अपनी आँखों से ओझिल होने तक,
और फ़िर.....

लौट आए अपने खाली मकान में,

बेटा-बहु कह गए थे फ़िर -
" आज रात देर से लौटेंगे "
........

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

12 कविताप्रेमियों का कहना है :

shobha का कहना है कि -

सजीव जी
वर्तमान जीवन की छवि उपस्थित की है । आज हम सब मशीन बन गए हैं । सब कुछ क्रम से होता रहता है ।
कभी-कभी लगता है कुछ तो नया होना चाहिए । धन कमाने की कामना ने जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को
छोड़ते जा रहे हैं । एक सुन्दर रचना के लिए बधाई

रंजू का कहना है कि -

आज के परिवार का बहुत ही वास्तविक चित्र है आपकी इस रचना में सजीव जी..ज़िंदगी की इस आपा धापी में अब यही नज़र आता है..
बहुत सुंदर लगी यह ..बधाई

anuradha srivastav का कहना है कि -

कटुसत्य उजागर करती है। बदलती जीवनशैली ,परिवेश और रिश्ते ........... एक रिक्तता और तिक्ता उभर कर आयी है।
विषय व कविता अवसाद व बोझिलता को बढाती है और यही आपके सफल होने का पैमाना है।

Avanish Gautam का कहना है कि -

सजीव भाई माफी चाहता हूँ लेकिन बहुत सुनी और दोहराई हुई बात लगती है. एक बात तो मै भी मानता हूँ शायद सारी कविताएं सिर्फ एक ही बात को कहने के लिये लिखी जाती हैं. बस उन्हे कहने या लिखने का तरीका उन्हे नई और अलग कविता बना देता है. साथ ही कवि को भी.

tanha kavi का कहना है कि -

सजीव जी,
आज के समाज का आपने बड़ी हीं सच्चाई से चित्रण किया है।हर घर की कहानी यह है। रिश्तों पर पैसों की मार पड़ी है। एक हीं छ्त के नीचे हजार दीवारें रहती हैं।
आपसे ऎसी हीं कविता की उम्मीद रहती है। बधाई स्वीकारें।

-विश्व दीपक 'तन्हा'

अजय यादव का कहना है कि -

सजीव जी!
हमारे वर्तमान परिवेश और विघटित होते पारिवारिक मूल्यों का बहुत प्रभावी चित्र खींचा है आपने. सुंदर रचना के लिये बधाई!


- अजय यादव
http://ajayyadavace.blogspot.com/
http://merekavimitra.blogspot.com/

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' का कहना है कि -

बन्धु सजीव जी

बहुत ही असाधरण विषय को सीधे सरल शब्दों में पाठक के सामने लाती हुयी रचना। भाव संप्रेषणीयता की संपूर्णता में सक्षम अब बात मित्र अवनीश जी के बिन्दु पर तो कवि का दायित्व एक साहित्यिक कुक मात्र का नहीं है नयी नयी व्यंजनात्मक विधियों से साहित्य की डिशेश को परोसते रहना उसका कार्य जन जागरण के विषयों को तब तक अलार्म वाली घंटी की तरह बजाते रहना भी है जब तक वांछित चेतना का समाज में प्रादुर्भाव ना हो जाये

शुभकामनायें

anitakumar का कहना है कि -

सजीव जी एक बहुत ही कड़वी सच्चाई को सामने रक्खा है आपने बिना कोई अपनी धारणा बनाए, बहुत खूब, हाँ , आज उम्र के साथ जिम्मेदारी से मुक्ती नही मिलती।

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

सजीव जी,


देरी से टिप्पणी करने के लिये क्षमा प्रार्थी हूँ। आपकी शैली का मैं कायल हूँ। कविता के दोनों भाग आहत करते है, सोच के कई आयाम प्रदान करते हैं और खोखले पन का अहसास कराते हैं। ये कहाँ आ गये हम....


*** राजीव रंजन प्रसाद

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

टंकण की बहुत सी गलतियाँ हैं। प्रूफ़ रीडिंग कर लिया करें।

कविता पर गद्यात्मकता हावी है। अवनीश जी से मैं सहमत हूँ। ग़ालिब का अंदाज़े-बयाँ ही उन्हें औरों से अलग करता है। गुलज़ार ही जिगर से बीड़ी जला पाते है। आप भी कोई चौकाने वाला अंदाज़ खोजिए।

praveen का कहना है कि -

great sajeev !!!!!!!!!!!!!!!

Anonymous का कहना है कि -

No deposit free bankroll - POKER bonus
all possible free bankrolls free bonus $50 no deposit Good luck at the tables.

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)