फटाफट (25 नई पोस्ट):

Saturday, September 29, 2007

राधा


कभी कविता को मेरी
डसता आनंद है ऐसे
घोर तमस में कोई
दिया जलता हो जैसे

कविता के हिंदोले पर
आनंद झूलता है जब
चैतन्यमयी होता है
अंतरमन मेरा तब तब

आर्थों का नाद तरलतम
शब्दों कि दिडधा दिडधा
कविता में लीन यूँ देखो
जीवन है जैसे राधा

तुषार जोशी, नागपुर

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

13 कविताप्रेमियों का कहना है :

manju का कहना है कि -

tushr, as usual its a beautiful poem,very touching and totally full of maning, gr8.

"राज" का कहना है कि -

Tushar ji!!!!
as usual wonderful creation...full of emmotions n its very touching poem......small but meaningfull....
congrats!!!!
*****************
कभी कविता को मेरी
डसता आनंद है ऐसे
घोर तमस में कोई
दिया जलता हो जैसे

कविता के हिंदोले पर
आनंद झूलता है जब
*****************

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

तुषार जी,
ये कविता कब लिखी थी आपने.....हिंद्युग्म की सबसे छोटी कविताओं में से एक हो गई ये कविता.....खैर, मैं भी बड़ी कवितायें नही लिख पाता...मगर, आपके शब्द ज्यादा सधे हुए हैं......
बधाई...

निखिल

anuradha srivastav का कहना है कि -

तुषार जी बहुत खूब लिखा-
कविता के हिंदोले पर
आनंद झूलता है जब
चैतन्यमयी होता है
अंतरमन मेरा तब तब

RAVI KANT का कहना है कि -

तुषार जी,

कभी कविता को मेरी
डसता आनंद है ऐसे
घोर तमस में कोई
दिया जलता हो जैसे

इसमे कविता को आनंद का डसना और अँधेरे में दिए का जलना में क्या साम्य है???जलना तो दिए का स्वभाव होता है पर डसना आनंद का स्वभाव नहीं। वैसे मेरा अल्पजञान भी ठीक से न समझ पाने का कारण हो सकता है।
बाकी कविता सुन्दर लगी।

विकास मलिक का कहना है कि -

आपकी कविता पढकर बहुत अच्छा लगा
पहली बार पढ रहा था
छोटी सी कविता में काफी कुछ कह दिया

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

तुषार जी,


सुन्दर सारगर्भित रचना की बधाई।


*** राजीव रंजन प्रसाद

Gita pandit का कहना है कि -

कविता के हिंदोले पर
आनंद झूलता है जब
चैतन्यमयी होता है
अंतरमन मेरा तब तब

तुषार जी !
बहुत खूब ....

सुन्दर रचना

बधाई।

shivani का कहना है कि -

aapka prayaas bahut sunder hai...kavita padhne mein thodi kathin lagi lekin 5,6 baar padhne per samajh aayi....badhai....

अजय यादव का कहना है कि -

तुषार जी!
कविता के विषय में मैं रविकांत जी से सहमत हूँ.

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

कविता इतनी भी छोटी नहीं होनी चाहिए की बातों को ठीक से विस्तार भी न मिल पाये और दूसरी बात यह कविता आपके स्तर की बिलकुल नहीं है।

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

तुषार जी,

मै शैलेश जी, अजय जी और रविकाँत जी की टिप्पणी से सहमत हूं. आपसे आपेक्षायें अधिक हैं

tanha kavi का कहना है कि -

आर्थों का नाद तरलतम
शब्दों कि दिडधा दिडधा
कविता में लीन यूँ देखो
जीवन है जैसे राधा

बहुत खूब तुषार जी। राधा के माध्य्म से आपने एक कवि की मनोस्थिति का बढिया वर्णन किया है।
बधाई स्वीकारें।

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)