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Friday, August 24, 2007

आँखें तब आँसू भर लातीं


प्रियतम की यादों से अलंकृत
उसकी पग-ध्वनि से आंदोलित
मन-वीणा की तारें झंकृत
होकर प्रिय को पास बुलातीं
आँखें तब आँसू भर लातीं

सांसारिक कार्यों से बोझिल
दिन भर हँसते हैं सबसे मिल
हृदय टूटता रहता तिल-तिल
रातें दाह और भड़कातीं
आँखें तब आँसू भर लातीं

खिली चाँदनी है अंबर में
दीप प्रकाशित हैं घर-घर में
लेकिन मेरे कातर उर में
दुख की अंधियारी गहराती
आँखें तब आँसू भर लातीं

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16 कविताप्रेमियों का कहना है :

anuradha srivastav का कहना है कि -

खिली चाँदनी है अंबर में
दीप प्रकाशित हैं घर-घर में
लेकिन मेरे कातर उर में
दुख की अंधियारी गहराती
आँखें तब आँसू भर लातीं
विरह वेदना का अच्छा चित्रण किया अजय जी ।

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

अजय जी,

"आँखें तब आँसू भर लातीं" अच्छा गीत है। शब्द संयोजन और भाव दोनों ही सुन्दर।

खिली चाँदनी है अंबर में
दीप प्रकाशित हैं घर-घर में
लेकिन मेरे कातर उर में
दुख की अंधियारी गहराती
आँखें तब आँसू भर लातीं

वाह!!

*** राजीव रंजन प्रसाद

devanshukashyap का कहना है कि -

Good

गिरिराज जोशी "कविराज" का कहना है कि -

अजयजी,

बहुत ही सुन्दर भाव! आपके इस विरह गीत में शब्द-संयोजन और लय दोनों ही अच्छी है, बधाई!!!

Gita pandit का कहना है कि -

हृदय टूटता रहता तिल-तिल
रातें दाह और भड़कातीं

लेकिन मेरे कातर उर में
दुख की अंधियारी गहराती

आँखें तब आँसू भर लातीं

wah.....
aaAOsu yahaaM thak bhee aa gaye hain....ajay ji..

bhaav pradhaan rachanaa
ke liyen
aabhaar

विपुल का कहना है कि -

आपके शब्दों ने आपके भावों का बख़ूबी साथ दिया है |लय और गति भावों को उद्दीप्त कर रही है | एक अच्छे विरह गीत के सारे गुण आपकी इस रचना में विद्य्मान हैं |
सुंदर रचनाके लिए बधाई..

shrdh का कहना है कि -

सांसारिक कार्यों से बोझिल
दिन भर हँसते हैं सबसे मिल
हृदय टूटता रहता तिल-तिल
रातें दाह और भड़कातीं
आँखें तब आँसू भर लातीं

खिली चाँदनी है अंबर में
दीप प्रकाशित हैं घर-घर में
लेकिन मेरे कातर उर में
दुख की अंधियारी गहराती
आँखें तब आँसू भर लातीं
bhaut hi achhe se likha hai aapne kuch alag sa khyaal lekar aaye hain aap is baar
aankhen tab aansun bhar laati bhaut hi sachha likha hai

विपिन चौहान "मन" का कहना है कि -

अजय जी...
आप गज़ल लिखें या कविता ..
पता चल जाता है कि अजय जी की रचना है
बहुत बधाई
विरह वेदना को साकार रूप देने के लिये आभार

shobha का कहना है कि -

अजय जी
अच्छी कविता है । भाषा से अधिक भावों ने प्रभावित किया है ।
दिल के भावों को अच्छी अभिव्यक्ति दी है ।

रंजू का कहना है कि -

अजय जी,आपका लिखा हमेशा ही सुंदर होता है एक और सुंदर रचना के लिए आपको बहुत बहुत बधाई!!

RAVI KANT का कहना है कि -

अजय जी,
गेयता और भाव के मणिकांचन योग से चमत्कार उत्पन्न हो गया है गीत में। एक-एक पंक्ति अद्भुत लगी।

प्रियतम की यादों से अलंकृत
उसकी पग-ध्वनि से आंदोलित
मन-वीणा की तारें झंकृत
होकर प्रिय को पास बुलातीं
आँखें तब आँसू भर लातीं

सुन्दर रचना के लिये धन्यवाद।

उर्मिला का कहना है कि -

Ajay ji

aapane bahut likhaa hai.

-रिपुदमन का कहना है कि -

आजय यादव जी,

आपकी यह कविता बहुत पसंद आई। कितना सुन्दर लिखा है आपने। मन प्रसन्न हो गया है।

मंगल-कामनायें।
-रिपुदमन

प्रियतम की यादों से अलंकृत
उसकी पग-ध्वनि से आंदोलित
मन-वीणा की तारें झंकृत
होकर प्रिय को पास बुलातीं
आँखें तब आँसू भर लातीं

सांसारिक कार्यों से बोझिल
दिन भर हँसते हैं सबसे मिल
हृदय टूटता रहता तिल-तिल
रातें दाह और भड़कातीं
आँखें तब आँसू भर लातीं

खिली चाँदनी है अंबर में
दीप प्रकाशित हैं घर-घर में
लेकिन मेरे कातर उर में
दुख की अंधियारी गहराती
आँखें तब आँसू भर लातीं

तपन शर्मा का कहना है कि -

अजय जी,
आपकी कविता की आखिरी 4 पंक्तियाँ कमाल कर जाती हैं.. आँखों में आँसू ले आती हैं..

खिली चाँदनी है अंबर में
दीप प्रकाशित हैं घर-घर में
लेकिन मेरे कातर उर में
दुख की अंधियारी गहराती
आँखें तब आँसू भर लातीं

तपन शर्मा

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

आपने हर छंद की प्रथम तीन पंक्तियों में लयांतता का ध्यान तो रखा है। मगर मात्राएँ बहुत कम-अधिक हो गई हैं। इसलिए मज़ा नहीं आ पा रहा है।

ऐसे मौकों पर पर्यायवाची शब्द काम आते हैं।

गौरव सोलंकी का कहना है कि -

दर्द भरा एक मधुर गीत।

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