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Wednesday, July 11, 2007

हिन्द-युग्म 'ताला' हटा रहा है


मित्रो,

१५ मार्च, २००७ को हिन्द-युग्म ने चिट्ठाचर्चाकारों और ब्लॉग-पंडितों का ध्यान चिट्ठों की हो रही चोरी की तरफ़ आकृष्ट कराया था। १४ मार्च २००७ को चिट्ठाचर्चा पर उड़न तश्तरी ने हमारे ताला लगाने पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी, जिसपर हिन्द-युग्म ने भी एक पोस्ट द्वारा मंथन किया था, मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ आई थीं।

अभी मैं जब इलाहाबाद में था तो प्रमेन्द्र जी ने बताया कि हिन्द-युग्म पर लगे ताले के कारण लिंकों को नये विंडो में खोलना सम्भव नहीं होता और कोई भी पाठक बार-बार बैक होकर सारे लिंक पढ़ना नहीं चाहता इसलिए कई ज़रूरी लिंक लोग खोलते भी नहीं हैं।

घुघूती बासूती से रंजना भाटिया, सुनीता चोटिया और मोहिन्दर कुमार की मुलाकात के दरम्यान मसिजीवी ने बताया कि वो ताला लगाने से दुःखी व नाराज़ हैं।

उधर उड़न तश्तरी भी हमें पढ़कर भी कमेंट इसलिए नहीं करते कि हमने ताला लगा रखा है। एक बार चैट पर उड़नतश्तरी से चैट पर इस बावत बात हुई थी, उन्होंने कहा कि वो हिन्द-युग्म पर बहुत कुछ लिखना चाहते हैं लेकिन यहाँ लगा ताला उन्हे मज़बूर कर रहा है। काफ़ी लम्बी चर्चा के बाद यह तय हुआ कि नारद पर इस तरह का एक पोल कराया जाय, उन्होंने कहा जिसका बहुमत होगा, हिन्द-युग्म उसे स्वीकारेगा, लेकिन शायद जीतू भाई ने इसे इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि यह उन्हें व्यक्तिगत मसला लग रहा था। समीर भाई ने इसे इस तरह से कहा कि मैं भी तो कमेंट पर माडरेशन लगाता हूँ, वो भी एक तरह का ताला है। सबकी अपनी-अपनी मरज़ी है। यह कहकर उन्होंने यह तो वादा किया कि अब इस कारण हिन्द-युग्म को नहीं नकारेंगे, हमेशा पढ़ेंगे और कविताओं की समालोचना करेंगे लेकिन कभी नहीं आये। हमारा उद्देश्य हिन्दी कविता व हिन्दी का पतन नहीं बल्कि उत्थान है। हम किसी भी कीमत पर अपनी उपेक्षा नहीं होने देंगे, इसलिए ताला हटाया जा रहा है।

हम समझते हैं कि अब ताला विरोधियों को युग्म से शिकायत नहीं होगी।

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8 कविताप्रेमियों का कहना है :

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

शैलेश भाई,
अच्छी वापसी है.......ताले की "चाबी" लाने गए थे......एक तरह से अच्छा ही है........अब हम सबके लिए समान रुप से सुलभ होंगे.......खाली अपने प्रशंसक ही नही "धुर" विरोधी भी हमारे पन्ने पर आएंगे.....अपनी नाराज़गी भुलाकर.......

काकेश का कहना है कि -

आपके ताला लगाने से हम भी दुखी थे.. और जिस मुलाकात का जिक्र आप कर रहे हैं उस मुलाकात में हम भी शामिल थे ..उस दौरान मैने मोहिन्दर जी से कहा भी था कि इस ताला लगाने से कोई फायदा नहीं क्योकि मेरा जैसा व्यक्ति जो फायरफॉक्स इस्तेमाल करता है वहाँ ये ताला अप्रभावी है...और मोहिन्दर जी भी मेरी बात से सहमत दिखे थे..

इस निर्णय के लिये धन्यवाद ..हमारी भी आवाजाही अब इस ओर बढ़ेगी...

mahashakti का कहना है कि -

यह कदम सराहनीय है। मै इसका तहेदिल से स्‍वागत करता हूँ। और इस इसके लिये हिन्द युग्‍म समूह को बधाई प्रेषित करता हूँ।

masijeevi का कहना है कि -

.....उद्देश्य हिन्दी कविता व हिन्दी का पतन नहीं बल्कि उत्थान है। हम किसी भी कीमत पर अपनी उपेक्षा नहीं होने देंगे, इसलिए ताला हटाया जा रहा है।...

लीजिए पहली 'चोरी' हमने की इस टिप्‍पणी के लिए :)

आशा है उस चर्चा के अन्‍य बिंदु भी आप तक पहुँचे होंगे- और आपके प्रयास रचनाधर्मिता के प्रसार में दूर तक जाएंगे।

Udan Tashtari का कहना है कि -

समीर भाई ने इसे इस तरह से कहा कि मैं भी तो कमेंट पर माडरेशन लगाता हूँ, वो भी एक तरह का ताला है। सबकी अपनी-अपनी मरज़ी है। यह कहकर उन्होंने यह तो वादा किया कि अब इस कारण हिन्द-युग्म को नहीं नकारेंगे, हमेशा पढ़ेंगे और कविताओं की समालोचना करेंगे लेकिन कभी नहीं आये।


---चलिये,अब शिकायत दूर कर लें,अब "ताला" हट गया. हम कट पेस्ट कर पाये-मानों मन की दबी बरसों की मुराद पूरी हो गई हो. :)

-आभार, आपने इतना ध्यान रखा. पूर्व में कही गई उन समस्त बातों के लिये खेद व्यक्त करता हूँ, जिनसे आपको और अन्य साथियों को दुख पहुँचा हो.

--समीर लाल

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

शैलेश जी,
आपने सराहनीय काम किया है....नतीजा देख ही रहे हैं....कई दिशाओं से हिंद-युग्म पर "मेहमान" आ रहे हैं...अच्छा हुआ आपने इस "ताला संस्कृति" पर रोक लगा दीं....हिंद-युग्म और फले-फूले....यही कामना है...........
सभी "नए-पुराने" मेहमानों का स्वागत..जो चाहें "चुराएँ...", अपना ही घर है.....

निखिल आनंद गिरि

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

नाराजगियों के जमाने बीत ही जाने चाहिये। हिन्दी और ब्लॉगिंग की भी भलाई "सर्वे भवंतु सुखिन:" में ही निहित है।

*** राजीव रंजन प्रसाद

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