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Thursday, June 28, 2007

पिता से


वक्त के साथ वृद्ध होते पिता,
तुम्हें देखकर,
सभी घड़ियाँ तोड़ने का मन करता है,
ये जो छोटी मुश्किलें
तुम्हारे बड़े जीवट को पस्त करने लगी हैं,
अपने सब सपनों में
तुम्हारी उम्र सहेजने का मन करता है,
अब बहुत से काम मैं कर सकता हूं,
जो तुम नहीं कर पाते,
तो ये सारी कामयाबी फेंकने का मन करता है,
देर से लौटने पर अब
तुम क्यों नहीं पूछते देरी का कारण,
तुम्हें बहुत से जवाब देने का मन करता है,
तुम्हीं मेरे नायक हो
और सफलताओं के सर्वोच्च प्रतिरूप,
नहीं अच्छा लगता अपने पैर में तुम्हारे जूते पहनना,
तुम्हें वही हिम्मती जवान देखने का मन करता है,
चश्मे के पीछे से झाँकती,
तुम्हारी सिकुड़ी मगर खूबसूरत आँखें,
अख़बार पढ़ती हुई नहीं,
ख़्वाब देखती हुई अच्छी लगती हैं,
एक प्यारी सी शर्त लगाएँ आओ फिर,
सब शर्तों में तुमसे हारने का मन करता है,
तुमसे छिपकर अब कुछ बातें
आहिस्ता होती हैं,
घर में अब कुछ हंसी ठहाके
आहिस्ता होते हैं,
आओ मिलकर हँसें, खेलें खेल पुराने,
हँसते हँसते तुम्हारी गोदी में सिर रखकर,
घंटों रोने का मन करता है,
हर एक कहानी झूठी है,
सब दादी नानी झूठी हैं,
सच वो है बस,
जो तुम बोलो और मैं सुन लूं,
एक नई कहानी सुनते सुनते
हर रात तुम्हारे पाँव दबाने का मन करता है,
तुम्हारी चुप्पी का यह हर क्षण
एक एक युग से भी लम्बा है,
पुरानी डायरी को खोलो अब,
कुछ गीत तुम्हारे सुनने का मन करता है,
तुम चुके नहीं हो,
बस रुक गए हो,
तुम ढले नहीं हो,
बस थक गए हो,
तुम जागो तो सवेरा हो,
तुम सो जाओ तो अँधेरा हो,
तुममें अब भी शक्ति है,
जीतने की, उड़ने की,
तुममें अब भी शक्ति है,
आसमान रचने की,
कभी घूमने का मन करे तो बताना,
तुम्हारे साथ पैदल
चाँद तक चलने का मन करता है।

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45 कविताप्रेमियों का कहना है :

Rajesh का कहना है कि -

Bahut acchi rachna hai Gaurav ji.

रंजू का कहना है कि -

हिला दिया आपके लफ़्ज़ो ने गौरव ...ना जाने क्यू आँखे भीग गयी ..बहुत ही दिल को छूती रचना है यह आपकी ...

Rajesh का कहना है कि -

चश्मे के पीछे से झाँकती,
तुम्हारी सिकुड़ी मगर खूबसूरत आँखें,
अख़बार पढ़ती हुई नहीं,
ख़्वाब देखती हुई अच्छी लगती हैं,


आओ मिलकर हँसें, खेलें खेल पुराने,
हँसते हँसते तुम्हारी गोदी में सिर रखकर,
घंटों रोने का मन करता है,


तुम चुके नहीं हो,
बस रुक गए हो,
तुम ढले नहीं हो,
बस थक गए हो,
तुम जागो तो सवेरा हो,
तुम सो जाओ तो अँधेरा हो,
तुममें अब भी शक्ति है,
जीतने की, उड़ने की,
तुममें अब भी शक्ति है,
आसमान रचने की.......

waise to puri rachna hi acchi hai lekin uski kuchh panktiyon ko sahsa dohrane ka man hota hai, excellent!

Anonymous का कहना है कि -

bahut achche gaurav....bhavnaon ka adar hi hona chahiye, aur kahin itne sundar dhang se pesh ki gayi hon to badhaeyan bhi mialni chahiyen. par puri kavita me pita ke charitra ka ek bhi nakaratmak pahalu kahin bhi nahi jhalka...ye apki shraddha bhi ho sakti hai aur paramparaagat kupmandukata bhi...kavita achchi hai, itna kuch sametane ke liye apke jaisi hi kalam chahiye..par bahut kuch ya aisa kuch jo aap nahi sameet sakate abhi bhi rah gaya....
- Ravindra

varsha का कहना है कि -

gr8 gaurav
jo ham santane sirf sochte hai usko tumne kalambaddh karke dikhaya hai
gr8 feelings

sunita (shanoo) का कहना है कि -

गौरव जी काश एसा हो जाता हम धड़ी की सुईयो को पकड पाते और हमारे अज़ीज हमसे दूर कभी ना जा पाते... पिता का स्थान घर में मुखिया का तो होता ही है वरन पिता से ही घर का अस्तित्व बनता है बहुत प्यार है हमे भी अपने पिता से ..कविता बेहद अच्छा लगी...बहुत-बहुत बधाई.. बहुत सजीव चित्रण है एक पिता के प्यार अपने पन का...आँखो में आँसू आ गये...

सुनीता(शानू)

आप इतने कन्जूस कबसे हो गये हमारे चिटठे पर टिप्पीयाने नही आ रहे?

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

सुन्दर रचना है गौरव जी,

वक्त के सिवा आदमी किसी के आगे झुकता नही
और ये वक्त है कि कमबख्त कभी कहीं रुकता नहीं

सुनील डोगरा ज़ालिम का कहना है कि -

आप नाम के ही नहीं अपितु हिन्द युग्म के भी गौरव हैं।

बधाई।

chhavi का कहना है कि -

behad hansi khwab hai aapka lekin kya kare waqut ne waqut hi na diya vapas mudkar aane ka.

अजय यादव का कहना है कि -

गौरव जी, भारतीय परंपरा में पिता का स्थान बहुत ऊँचा है. आपने उसी परंपरागत तरीके से पिता के सम्मान में एक बेटे के भावों को बेहद खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है. हर बच्चे के लिये उसके पिता सबसे काबिल और अच्छे होते हैं.

कुछ पँक्तियाँ बहुत ही सुंदर हैं:

तुम चुके नहीं हो,
बस रुक गए हो,
तुम ढले नहीं हो,
बस थक गए हो,
तुम जागो तो सवेरा हो,
तुम सो जाओ तो अँधेरा हो,

इस खूबसूरत और भावप्रवण रचना के लिये बहुत बहुत बधाई.

sona का कहना है कि -

This is wonderful for its positive approach & heart touching aspect......i simply loved it for it touched my soul..........

ritu का कहना है कि -

no doubt a one more g8 g8 poem 4rm ur 'KALAM':)
in 1 line mein itna kahongi ki.......
'dil ko chhooooo liya' realy wondrful:)
keep it up n best of luck in advance 4 ur next poem:)
n
haan
soch rahi hoo ki tumse ek-do class kyon na le li jay:)

swapna का कहना है कि -

गौरवजी, दिल को छू लेनेवाली रचना है आपकी । बधाई ।

tanha kavi का कहना है कि -

सच कह रहा हूँ गौरव जी, पढते-पढते नेत्रों से अश्रू-धार निकल पड़ें। मैंने इस रचना के लिए आपको तहे-दिल से शुक्रिया करता हूँ। पिता पर इससे अच्छी रचना मैंने कभी नहीं पढी। मैं भी बहुत दिनों से ऎसा कुछ लिखना चाहता था, मगर शब्द नहीं मिल रहे थे। अब आपने मुझे एक दिशा दे दी है। उम्मीद करता हूँ कि मैं भी अपने पिता पर कुछ लिख पाऊँगा अब।

तुम चुके नहीं हो,
बस रुक गए हो,
तुम ढले नहीं हो,
बस थक गए हो,
तुम जागो तो सवेरा हो,
तुम सो जाओ तो अँधेरा हो,
तुममें अब भी शक्ति है,
जीतने की, उड़ने की,
तुममें अब भी शक्ति है,
आसमान रचने की.......

बहुत सही लिखा है आपने। बधाई स्वीकारें।

sajeev sarathie का कहना है कि -

waah gaurav itni sundar rachna hai ki man karta hai agar tum samne hote to gale se laga leta ...waah

vivek का कहना है कि -

Tumhare ye rachna un sab ke liye hai jo apne pita ko bhul jate hai, jo bhul jate unke upkar. Tumhare ye rachna bahut hi achi hai, meri ankho main pani aa gaya pad kar.........

mohit का कहना है कि -

aapki kavita muje bahut achi lagi

Piyush ohri का कहना है कि -

kahana chahunga, is sajeev chitran ke liye aakno mein pani nahi, dil mein harsh aur hotho per muskan aagayi ...

Anupama Chauhan का कहना है कि -

Gauravji.....ab tak ki aapki saari rachnaao me se mujhe yeh sabse zyada gehaaraii se chu gai.....u made imagine a moment with my dad....really dad's are great heros.....they keep us going

keep it up

durgesh का कहना है कि -

you have been evolved like a king of emotion
may be this song is written by u put ur father in ur mind
but it is applicable to us like bagaban we shd take inspiration frm this song

आर्य मनु का कहना है कि -

"आओ मिलकर हँसें, खेलें खेल पुराने,हँसते हँसते तुम्हारी गोदी में सिर रखकर,घंटों रोने का मन करता है, "

काफी है आँख को भिगो देने के लिये ।
इस मार्मिक प्रस्तुति के लिये एक भीगा आभार ।

Anonymous का कहना है कि -

कहाँ से शुरू करूँ समझ नही आ रहा, गौरव जी ने ये कविता लिखकर अनजाने मे मुझ पर एहसान किया है,मेरा अपने पापा से हमेशा से सबसे ज्यादा लगाव रहा है, और तालमेल इतना गहरा की हम आँखों से एक दूसरे की बात समझ लेते हैं, पापा पहले आर्मी मे थे, इस कविता मे जिस हिम्मती नौजवान की बात की गई है, वैसे प्रत्यक्ष देखा है मैने अपने पिता को, और आज विशेषकर पिछले ३-४ महीने से अस्वस्थ हैं ,मधुमेह, रक्तचाप और न जाने कितनी छोटी-छोटी बीमारियों ने जैसे उन्हे जैसे थका सा दिया है, मै उनके काफी करीब रही हूँ जानती हूँ कि अगर मैने धीरज खोया तो उन्हे सबसे ज्यादा तकलीफ होगी, इसलिये उनके सामने कभी खुदको परेशान नही दिखा पाई हमेशा हिम्मत देती रही की परेशान होने की बात नही है सब ठीक हो जायेगा। कभी ये नही कह पाई की पापा प्लीज़ जल्दी ठीक हो जाऒ मुझे आपको बीमार देखकर अच्छा नही लग रहा, आज ये कविता पढते वक्त कब आँखों से आँसू निकले पता नही, खुलकर, फूट-फूटकर खूब रोयी जितना मै रो सकती थी, लग रहा था जैसे ४ महीने से जो कुछ घुटन अन्दर जम गई थी वो बाहर निकल गई हो, अब अपनेआप को काफी हलका महसूस कर रही हूँ।
बहुत बहुत धन्यवाद।

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

पहले मैं आपको पारम्परिका कविता का ही शिल्पकार समझता था, लेकिन नये मूड और स्टाइल की आपकी यह कविता भी इस विधा के वाहकों के लिए प्रेरणास्रोत हो सकती है। वो कविताएँ अच्छी होती हैं जिसमें निहित भावनाओं को कवि ने महसूस किया हो, चाहे विषय कुछ भी हो। इस प्रकार कवि पाठक के अंदर उतर जाता है। यहाँ हर पाठक अपने पिता तक पहुँच जाता है।

मुझे लगता है कि गौरव के लिए यही बहुत बड़ा पुरस्कार है। मुझे इतनी पसंद आई कि बेसुरी आवाज़ का मालिक होते हुए भी इसका पॉडकास्ट बनाने से नहीं रोक सका। जिसे यहाँ सुना जा सकता है।

विनीत का कहना है कि -

बहुत ख़ूब, आँख नम हो गयी

पंकज का कहना है कि -

बिल्कुल ही नये विषय को बहुत ही प्रभावी तरीके से कहा है।
गौरव जी, आप का ये अंदाज भी पसन्द आया।

दिवाकर मणि का कहना है कि -

गौरव जी !!
आपकी लेखनी में वो जादू है जो किसी पाषाणहृदय को भी द्रवीभूत कर दे । आपके कविता की पंक्तियों ने आँख गीले कर दिये । आपकी यह कविता केवल एक रचनामात्र नहीं है अपितु एक भारतीय पुत्र का अपने पिता के प्रति सच्चा प्यार है । आज के इस व्यावसायिक संसार में पाश्चात्य के वशीभूत होकर लोग अपने श्रद्धेयजनों के प्रति लापरवाह होते जा रहे हैं, आपकी यह रचना शायद उन्हें जाग्रत कर दे ।
आप का कवि हिन्दी साहित्य के उच्चतम शिखर पर आसीन हो, यही इस मित्र की शुभकामना है ।

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

बहुत देर से टिप्पणी कर रहा हूँ और इस लिये क्षमा प्रार्थी भी हूँ। आपकी यह रचना कालजयी है..केवल महसूस की जा सकती है। इस रचना की कोई समालोचना हो ही नहीं सकती।

*** राजीव रंजन प्रसाद

गौरव सोलंकी का कहना है कि -

आप सबका बहुत बहुत शुक्रिया कि मेरे हृदय के भाव आपको भी अपने लगे। मैं ये कविता आप सबके पिता को भी समर्पित करता हूं। सच कहता हूं कि मैंने जब भी आपकी टिप्पणी पढ़ी, उतना ही भावुक हो उठा जितना इसे लिखते समय हुआ था। पिता के लिए जितना भी कहा जाए, वही कम है।
अनामिका जी, जो अपना नाम लिखना भूल गई, उनके पिता के लिए मैं प्रार्थना करता हूं कि वे जल्दी ही भले चंगे हो जाएं।
काश, सबके पिता हमेशा वैसे ही रहें, जैसा सब चाहते हैं और मेरे पिता के लिए--

कभी घूमने का मन करे तो बताना,
तुम्हारे साथ पैदल
चाँद तक चलने का मन करता है।

monika का कहना है कि -

HI Gaurav
jab bhi tumhari kavita padti hu .. bhout khanna chate hue bhi khee nahi pati..
this one is reaily very very very good. u can say tuch to heart
Bye Monika
( keep writing)

saurabh का कहना है कि -

really gaurav bahut acchi kavita likhi hai. seedhi dil ko chhoo gayi.
dhanyawad esi kavita ke liye

तपन शर्मा का कहना है कि -

गौरव जी,
आपकी कविता दिल को छू देने वाली है..
मैंने ये कविता अपनी माँ को भी सुनाई.. और उनका कहना था कि ऐसी सोच आज के समय में हर कोई नहीं रखता..
आपकी ये कृति सर्वोत्तम कविताओं में गिनी जानी चाहिये ऐस मेरा मानना है। ऐसे ही लिखते रहें..

ek insan का कहना है कि -

advitiy ankh jo nam kar de aisee kavita sar jhuk jaye aisee kavita aur kya kahoon

anil masoomshayer@gmail.com
shayarfamily.com

Sheela का कहना है कि -

पिता के ऊपर इतनी सुन्दर रचना मैने कभी नही पढ़ी,मा के उपर तो सभी लिखते है,पिता का ऋण अक्सर भूल जाते है लोग.मुझे मेरे बाबूजी याद आये, पर वो मुझे कभी कमजोर नही लगे,गौरव ने पिता की भावनाओ उकेर दिया है बधाई गौरव मुझे रुलाने का...
शीला,वाराण्सी

Sarvesh का कहना है कि -

bahut khoob gaurav ji. aaj hi Hindi yugm par aaya aur kitna kuch mil gaya. aapki kavitayen bahut hridaysparshi hain.har kavita aapne aap main bejod hain.bahut accha lagta hain jab kisi ko acchi kavita karte dekhta hoon.Keep it up. sach main dil khush ho gaya aapki kavitayen padh ke.is kavita ke baare main kya kahoon. itna sundar chitra itni saadgi ke saath aur aise nazuk vishay pe. aapki kalam ka abhinandan karta hoon.

अभिषेक पाटनी का कहना है कि -

गौरव भाई...मैं इस एक एहसास के बिना पला-बढ़ा हूं...बावजूद इसके...जब भी आता हूं एक बार पढ़ लेता हूं...हां अपनी मां के लिए मेरे पास कुछ ऐसे ही भाव हैं...ये अलग बात है कि वह भारत की आम मांओं की तरह...तनिक कम पढ़ी-लिखी गृहणी हैं...खैर बेइजाजत या बाइजाजत मैं इस कविता को बार-बार पढ़ने जरूर आता हूं....

Shailesh Jamloki का कहना है कि -

gaurav ji,

Aapki kavita dil ko itne bhaa gayi ki prayer mai gaane ko man karta hai

aur aisa laga pad kar ki jaise tum mere man ki baat kah rahe ho...

mai itna doob gaya tha padne mai ki bhool gaya ki kaha hu.. mere paas ke log poochne lage office mai.. ki ro kyu rahe ho...

tum sachmuch badhai ke paatr ho,,,

aur tumare parents bhi...

ye humare liye.. ek prerna ban kar aayi hai kavita
sadar
shailesh

Vinod का कहना है कि -

Meri ab tak ki sabse achchi Kavita
Thank You
Gaurav Ji
Vinod Kumar

Pratham का कहना है कि -

Dear Gaurav,

No doubt that your feelings are marvelous, stunning, dazzling, impressive, notable, extraordinary this shows that how inspiring impression your father is having on you. And I am dame sure that your father is very supportive, caring, loving, sympathetic, kind and comprehensible.

Don’t take me wrong but there are some families where your thoughts are not acceptable. I mean take example of the slum area where every day father is full drunk and every night he beets his family unnecessary and those parents who never support their DAUGHTER (Want to say about sibling partiality) please note that I am not discouraging you but what u have written is good when I am presenting this “Excellent Heart Touching poem” to my father.

Your poem is creating a soft corner in the hearts of child like u and me but it will be highly appreciable if you will write more about father’s responsibility towards their sibling and that must be inspiring to fathers.

See when u r writing write after considering all the society issue and upcoming as this will make your poem more practical and thoughtful. Hope u got my idea what I want to suggest as your writing skills are gr88 u can utilize them.

Best regards,
Lekhraj,

Deepali Sangwan का कहना है कि -

marmik.. seedha man pe dastak deti hai yeh rachna.
badhai gaurav ji.

Gopal K rishna Rai का कहना है कि -

Gaurav Ji,

Aapki rachana nemere pita ji ko aankhon me la diya.Jab bhi isko padhta hun mera bachpan aur mere pit ji sath sath aa jate hain aur ashru dhara bahne lagti hai.der tak bhavanaon me dubta rahta hoon.Kafi der rone ke bad halka hhta hoon.Aapka naman aur bandan karta hoon.Aapka abhinandan karne ko ji cahata hai.

Gopal Krishna Rai

Unknown का कहना है कि -

Wow reallt tuching poem sir

jitesh verma का कहना है कि -

Aanshu aa gaye bhaia aapki pankti pad kar

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Aanshu aa gaye bhaia aapki pankti pad kar

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