फटाफट (25 नई पोस्ट):

Wednesday, June 06, 2007

उन्हें पता तो चले


उन्हें ना प्यार हो हमसे ना हो भले ही ना हो।
हमें है प्यार उन्हीं से उन्हें पता तो चले।

नज़र में लायें ना हम लाख खताएँ उनकी,
हमारी क्या है खता ये हमें पता तो चले।

बगैर उनके भी हम सीख लेंगे जी लेना,
इसी में उनकी रज़ा है ज़रा पता तो चले।

मुझे तसल्ली मिलेगी कभी जो साथ चलें,
मैं कदम तेज रखूँ और वो आहिस्ता जो चले।

ऐ सनम सोचना फुरसत से मेरे बारे में,
क्या पता कोई नई बात फिर पता ही चले।

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

10 कविताप्रेमियों का कहना है :

Mohinder56 का कहना है कि -

बगैर उनके भी हम सीख लेंगे जी लेना,
इसी में उनकी रज़ा है ज़रा पता तो चले।

बढिया लिखा है पंकज जी....
मगर हसीनो की रजा का पता इतनी आसानी से लगता कहां है

ghughutibasuti का कहना है कि -

बहुत अच्छा लिखा है ।
घुघूती बासूती

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

बहुत सधा हुआ लिखा है पंकज जी, इसे रिकार्ड कर युग्म पर डालें।

*** राजीव रंजन प्रसाद

Unknown का कहना है कि -

पंकज जी, अच्छा लिखा है मगर आपके स्तर के अनुरूप नहीं है।

रंजू भाटिया का कहना है कि -

बहुत अच्छा लिखा है......

बगैर उनके भी हम सीख लेंगे जी लेना,
इसी में उनकी रज़ा है ज़रा पता तो चले।

मुझे तसल्ली मिलेगी कभी जो साथ चलें,
मैं कदम तेज रखूँ और वो आहिस्ता जो चले।

सुनीता शानू का कहना है कि -

बहुत अच्छा लिखा है... गाने में रचना अच्छी लग रही है मगर आप इससे और अच्छा लिख सकते है...

सुनीता(शानू)

देवेश वशिष्ठ ' खबरी ' का कहना है कि -

मुझे ये नहीं पता कि लोग बिना डूबे, सरसरी निगाह से पढकर टिपिया क्यों देते हैं कि कविता स्तरीय नहीं है।
पंकज जी, हर शेर माशाअल्लाह है।
गाकर जरूर सुनाइयेगा।
'खबरी'
9811852336

Anonymous का कहना है कि -

बहुत सुन्दर!

इसे गुनगुनाने में मजा आ रहा है -

बगैर उनके भी हम सीख लेंगे जी लेना,
इसी में उनकी रज़ा है ज़रा पता तो चले।

क्या यह इतना आसां है? :)

Unknown का कहना है कि -

ऐ सनम सोचना फुरसत से मेरे बारे में,
क्या पता कोई नई बात फिर पता ही चले।

ये पंक्तिया बहुत अच्छी लगी ।

...स्वप्ना

Tushar Joshi का कहना है कि -

खुबसूरत भाव है।

ऐ सनम सोचना फुरसत से मेरे बारे में,
क्या पता कोई नई बात फिर पता ही चले।

ये शेर खास पसंद आया।

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)