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Friday, June 01, 2007

यूनिकवि और यूनिपाठक प्रतियोगिता में हिस्सा लें (अंतिम तिथि- १५ जून)


'हिन्द-युग्म यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता' आयोजित किये जाने की यह छठवीं सूचना है। जिस तरह का उत्साह पाठकों और प्रतिभागियों ने दिखाया है, उससे हमारी पूरी टीम उत्साहित है। इस प्रतियोगिता के आयोजन का प्रमुख उद्देश्य इंटरनेट पर देवनागरी-प्रयोग को बढ़ावा देना है, इसलिए हम लेखकों और पाठकों में से यूनिकवि तथा यूनिपाठक तो चुनते हैं मगर हमारी यह भी कोशिश रहती है कि हर लिखने और पढ़ने वाले को हम प्रोत्साहित करते रहें। इसीलिए हमारी खोजी नज़रें प्रायोजकों पर , हिन्दी के समर्थकों पर हमेशा लगी रहती हैं। इसी का परिणाम है कि मई माह के १२ प्रतिभागियों (टॉप १० लेखकों और २ पाठकों) को हम प्रसिद्ध कवि-संचालक डॉ॰ कुमार विश्वास की पुस्तक 'कोई दीवाना कहता है' भेंट करने की उद्‌घोषणा कर पाये हैं। (मई माह की प्रतियोगिता के परिणाम सोमवार, ४ जून २००७ को प्रकाशित होंगे) इस बार भी हम लेखकों और पाठकों के लिए तमाम पुरस्कार लेकर आये हैं-

१) यूनिकवि को रु ६०० का नकद ईनाम, रु १०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

२) यूनिपाठक को रु ३०० का नकद ईनाम, रु २०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।

३) टॉप ४ पाठकों को कवि कुलवंत सिंह की ओर से उनकी काव्य-पुस्तक 'निकुंज' की स्वहस्ताक्षरित प्रति।

४) क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान के कवियों को वेबज़ीन सृजनगाथा की ओर से रु ३००-रु ३०० तक की पुस्तकें।

५) पाँचवें से दसवें स्थान के कवियों को कवि कुलवंत सिंह की ओर से उनकी पुस्तक 'निकुंज' की एक-एक स्वहस्ताक्षरित प्रति।

६) टॉप २ कवियों और टॉप २ पाठकों को डॉ॰ कुमार विश्वास की ओर से उनकी पुस्तक 'कोई दीवाना कहता है' की एक-एक स्वहस्ताक्षरित प्रति।

७) यूनिकवि और यूनिपाठक को तत्वमीमांसक (मेटाफ़िजिस्ट) डॉ॰ गरिमा तिवारी से ध्यान (मेडिटेशन) पर किसी भी एक पैकेज़ की सम्पूर्ण ऑनलाइन शिक्षा पाने का अधिकार होगा। (लक पैकेज़ को छोड़कर)

८) यूनिकवि की कविता पर हिन्द-युग्म की पेंटर स्मिता तिवारी के द्वारा बनाई गई पेंटिंग भी प्रकाशित की जाती है।

इतना सबकुछ पाने के लिए आपको करना कुछ नहीं है।

यदि आप यूनिकवि बनना चाहते हैं तो-

१) अपनी कोई अप्रकाशित कविता (जो कि गीत ग़ज़ल, लयबद्ध, अलयबद्ध इत्यादि किसी भी श्रेणी में आती हो) को १५ जून २००७ तक hindyugm@gmail.com पर भेजिए।
(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)

२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो सरलतम ऑनलाइन टूल 'यूनिनागरी' का प्रयोग करें या सरलतम गाइड लेख यहाँ देखें।

३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सीखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।

यदि आप यूनिपाठक बनना चाहते हैं तो-

१) हिन्द-युग्म पर १ जून २००७ से ३० जून २००७ तक की प्रकाशित अधिक से अधिक प्रविष्टियों (पोस्टों) पर समीक्षात्मक टिप्पणी (कमेंट) कीजिए। घबराइए नहीं, समीक्षात्मक मतलब आप के जी में जो आए, वही लिखिए।

२) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।

३) हम यूनिकोड में की गई टिप्पणियों को वरियता देंगे।

यद्यपि अभी तक पाठकों के बीच उस तरह की सक्रियता नहीं देखने को मिली है जिसकी हमें अपेक्षा है। शायद वो इसलिए क्योंकि पढ़ना लिखने से कई गुना मुश्किल है। फ़िर भी हमें पाठकों पर भरोसा है। उम्मीद करते हैं कि इस बार नियमित पाठकों की संख्या बढ़ेगी।

प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय कवियों की रचनाओं को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।

प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।

तो सोच क्या रहे हैं? आज से ही हमारे इस नेक काम में हिस्सा लेकर हमारे प्रयासों को सफल बनाइए।

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

4 कविताप्रेमियों का कहना है :

sunita (shanoo) का कहना है कि -

शैलेश ये आप सब ने बहुत अच्छा किया है...ईनाम देकर कवियों का मनोबल बढ़ाया जा रहा है
सुनीता(शानू)

sifar का कहना है कि -

शैलेश जी ,
आप लोगों का यह प्रयास बहुत ही सराहनीय है । साथ ही ’ हिन्दी -युग्म ’ को रचनाओ के संकलन ( जो इंटरनेट पर बिखड़ी पड़ी हैं )पर भी ध्यान देना चाहिए । मित्र विनोद कुमार जी ने एक कोशिश की थी ; शायद काल-कलवित हो गई । देवनागरी को समर्पित एक समूह होने के नाते ’हिन्दी-युग्म ’ की यह नैतिक जिम्मेवारी भी बनती है ।

साभार,
श्रवण

Guru Bhai का कहना है कि -

हमे शैलेश जी की ऑरकुट मे इक पोस्टिग से ञात हुऑ कि इस प्रकार की भी कोई सस्था है जो नये लेखको उनके विचारो को ऊपर तक लाने का प्रयास कर रही है।
मेरे तरफ से ऑप लोगो को शुभकामना के साथ बधाई जो स्वीकार करे।

ऑभारी
नवीन-

"Sulabh" का कहना है कि -

हिंदी युग्म एक अभियान..

लिखते हुए रोमांचित हूँ कि अपने पड़ोस मे कुछ लोग हैं जो हिंदी कवियों और पाठकों को बढावा देने मे लगे हैं ।

बहुत बहुत धन्यवाद !!

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