असफलता की आँधी में
नहीं टूटेगा
ऐसा खड़ा पेड़ हूँ मैं
हिलकर फिर जम जाउँगा
दृढता से अड़ा
पेड़ हूँ मैं
मुझे हिलाने तुफान आयेगा
कितना बल लगा पाएगा?
सूर्य पीकर हरा भरा ये
पाया मैंने चेहरा है
जनम से ही धरती मैया पर
मेरा विश्वास गहरा है
छाया और घर देनेवाला
विस्तृत बड़ा पेड़ हूँ मैं
हिलकर फिर जम जाउँगा
दृढता से अड़ा
पेड़ हूँ मैं
तुषार जोशी, नागपूर



























9 टिप्पणी:
तुषार जी,
निःसंदेह आपकी प्रत्येक कविता मन में जोश भरती है। मगर इस बार आपसे अनुरोध करना चाहूँगा कि कविता को विस्तार दें। इतनी ज़ल्दी न खत्म किया करें।
sahi artho me bastvikata ko chitrit kiya hai. mai bhi shailesh G se sahmat hu ki aapne jaldi khatm kar diya hai.
कविता मे जोश वह भी सफलता के पार बहुत कम नजर आती है इस दर्द भरे शैलावों से…आशावान होना व्यक्ति की सबसे बड़ी शक्ति है जिसे आपने यहाँ पेश किया है…
एक संदेशपूर्ण कविता. बधाई, जल्दी खत्म तो हो गई मगर संदेश पूरा दे गई तो कोई चिंता नहीं...कविता यूँ ही होना चाहिये कम शब्द बड़ संदेश... :)
"घाव करे गंभीर"..कविता बाध्य करती है सोच को..
विस्तृत बड़ा पेड़ हूँ मैं
हिलकर फिर जम जाउँगा
दृढता से अड़ा
पेड़ हूँ मैं
बधाई|
Kya baat kahi,abhi abhi main low mahsus kar rahi thi,aur abhi manmein vishwas paida ho gaya.
Tusharji Aapki kavita ka hetu sadhya ho gaya.
अच्छी रचना, कविता कवि की दृढता और व्यक्तित्त्व का प्रतिबिम्ब है।पेड के माध्यम से आदमी की प्रेरणा का अच्छा चित्रण।
Tushar ji, badhai. itne kam shabdon me itna utsahvardhak kavya,padhkar josh aa gaya.
tushar ji....
bahut achcha likha hai... mere to naam ka to meaning hi ped hai... aur apne aap ko itne inspiring andaj me padhna streangth deta hai.
aap bal sahitya ke lekhak hain... ye hindi yugm ki list se pata chala....mai jaipur se ek bachcho ki magzine ka sampadan dekh rahi hu... agar apka sahyog apni patrika ke liye milega to bahut khushi hogi... pathko ko bhi aur hamare group ko bhi.kripya respose de...
tarushree.sharma@gmail.com
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