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Saturday, December 02, 2006

समाधान


तुम अब ठान लोगे
ज़िंदगी की हर उलझन को
नया समाधान दोगे
तुम अब ठान लोगे

अपयश मिला मगर
सब खत्म नहीं हुआ है
सफलता ने अभी भी
ना नहीं कहा है
आँधी तुफाँ आये फिर भी
तुम भीड जाओगे
परिस्थिती को निडर होकर
शह दे पाओगे

तुम अब ठान लोगे
ज़िंदगी की हर उलझन को
नया समाधान दोगे
तुम अब ठान लोगे

तुम्हारा साथ निभाने
विवेक शक्ति साथ होगी
सब खतम हुआ लगेगा
मगर फिर शुरुआत होगी
अंधेरा घना हो फिर भी
तुम जलते जाओगे
दृढता से आत्मविश्वास
अटल रख पाओगे

तुम अब ठान लोगे
ज़िंदगी की हर उलझन को
नया समाधान दोगे
तुम अब ठान लोगे

तुषार जोशी, नागपूर


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5 कविताप्रेमियों का कहना है :

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

तुषार जी,

अभी कुछ दिन पहले इस ब्लॉग पर एक पाठक आये थे जिनका नाम था रवीन्द्र। वे एक आशावादी कविता की तलाश में थे। मैं सोचता हूँ, अब उनकी तलाश पूरी हुयी होगी।
आप धन्यवाद के पात्र हैं।

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

A good one Tusharji..
Impressive & influencive
Rajeev Ranjan

Pramendra Pratap Singh का कहना है कि -

बहुत ही अच्‍छा लिख है।

तुम अब ठान लोगे
ज़िंदगी की हर उलझन को
नया समाधान दोगे
ये पक्तिंयां वास्‍तव मे प्रेरित करती है।

sahil का कहना है कि -

एक pyari और aashawadi कविता.
alok singh "sahil"

jeje का कहना है कि -

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