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Saturday, November 18, 2006

हम


हम बनाएंगे वतन को
हम सजाएंगे चमन को
हम ।

हम बताएंगे सभी को
कूट कूट कर भरा है हम में
दम ।

हम बनाएंगे वतन को
हम सजाएंगे चमन को
हम ।

मंज़िल सबको लेकर चलना
मुश्किल राहों से गुज़रना
आँधी आए तुफाँ आए
हौसला हुआ कभी ना
कम ।

हम बनाएंगे वतन को
हम सजाएंगे चमन को
हम ।

सुख दुख चुनने की हिम्मत है
बढ़ते रहने की ताकत है
जहाँ जहाँ भी हम जाएंगे
हो जाएगा खुशनुमा
मौसम ।

हम बनाएंगे वतन को
हम सजाएंगे चमन को
हम ।

हम बताएंगे सभी को
कूट कूट कर भरा है हम में
दम ।

हम बनाएंगे वतन को
हम सजाएंगे चमन को
हम ।

तुषार जोशी, नागपुर

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2 कविताप्रेमियों का कहना है :

sahil का कहना है कि -

tushar जी बहुत ही सरल tarike से आपने deshbhakti की bhawna को ukera है.
badhai हो
alok singh "sahil"

jeje का कहना है कि -

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